मेसी और रोनाल्डो के बाहर होने से एडिडास और नाइकी दुखी क्यों?

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लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख न सिर्फ उनके चाहने वालों को हुआ, बल्कि कुछ कंपनियां भी उनकी टीम की हार से दुखी हैं.

ये दोनों खिलाड़ी न सिर्फ गोल्डन बॉल विजेता रहे हैं, बल्कि दुनिया में सबसे अधिक कमाई करने वाले खिलाड़ियों में से हैं. सिर्फ़ खेल से ही नहीं, स्पॉन्सरशिप भी इनकी कमाई का जरिया होता है.

फुटबॉल की दुनिया में एडिडास और नाइकी स्पॉन्सरशिप के बादशाह माने जाते हैं. फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप जैसे आयोजन उनके ब्रांड को मजबूत करने और कमाई बढ़ाने के मौके देते हैं और वो किसी कीमत पर इसे गंवाना नहीं चाहते हैं.

ऐसे आयोजन उनके लिए फायदे का सौदा होता है. ब्राजील के एक मार्केटिंग सलाहकार अमीर सोमोगी कहते हैं, "एडिडास और नाइकी की रणनीति होती है कि वो खुद को वैसी टीमों और खिलाड़ियों से जोड़े जो जीत दर्ज सकते हैं. वो चाहते हैं कि उनकी कंपनी का नाम विजेता टीम से जुड़े ताकि वो ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सके."

एडिडास मेसी और उनकी टीम अर्जेंटीना को स्पॉन्सर करता है. वहीं नाइकी रोनाल्डो और उनकी टीम पुर्तगाल को स्पॉन्सर करती है. उनके टीशर्ट पर इन कंपनियों का लोगो होता है और इसका बकायदा अनुबंध होता है.

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इमेज कैप्शन, एडिडास कंपनी को प्रोमोट करते हैं मेसी

टीम की जीत-हार और कंपनी का फायदा

खिलाड़ियों का बेहतर प्रदर्शन और टीम की जीत-हार का संबंध सीधे कंपनी की कमाई से जुड़ा होता है. साल 2014 में ब्राजील में हुए वर्ल्ड कप में टीम के बेहतर प्रदर्शन का फायदा सीधे कंपनियों को पहुंचा था.

एडिडास ने इस साल 17,153 करोड़ रुपए की बिक्री की थी. वहीं नाइकी ने भी खेलों के दौरान अपनी आमदनी में 23 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की थी.

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ब्राजील में हुए वर्ल्ड कप के दौरान दोनों कंपनियों के बीच स्पॉन्सरशिप की होड़ मची थी. 32 में से 12 टीमों को नाइकी ने और 10 टीमों को एडिडास ने स्पॉन्सर किया था.

हालांकि इन खेलों में सबसे ज्यादा फायदा जर्मनी की एक कंपनी ने उठाई थी. यह कंपनी फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का ऑफिशियल स्पॉन्सर थी.

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स्पॉन्सरशिप देने की होड़

एडिडास की स्पॉन्सर की गई टीमें, अर्जेंटीना और जर्मनी फाइनल मैच खेली थी. 1998 के बाद यह तीसरी बार था जब उनकी स्पॉन्सर की गई टीम विजेता बनी थी.

वहीं नाइकी की स्पॉन्सर की गई टीम ब्राजील साल 2002 में विश्व विजेता रही थी.

इस साल हो रहे वर्ल्ड कप में एडिडास स्पॉन्सरशिप देने की होड़ में नाइकी को पीछे छोड़ दिया है. एडिडास ने 12 और नाइकी ने 10 टीमों को स्पॉन्सर किया है.

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फुटबॉल से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान के अध्ययन के मुताबिक इस साल हो रहे फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में टॉप 200 खिलाड़ियों में से 132 नाइकी के जूते पहन रहे हैं. वहीं 59 एडिडास के जूते पहनकर मैदान में खेल रहे हैं.

संस्थान के मुताबिक नाइकी ने रोनाल्डो के साथ 'जीवन भर' के लिए 6862 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है.

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कितना खर्च करती है कंपनियां

नाइकी ने फ्रांस के फुटबॉल फेडरेशन से करीब 343 करोड़ रुपए का समझौता किया है. यह समझौता 2026 तक खिलाड़ियों की जर्सी के लिए किया गया है. कंपनी ने इंग्लैंड और ब्राजील से भी इसी तरह का कुछ समझौता किया है, हालांकि समझौते की राशि फ्रांस के मुकाबले कुछ करोड़ ज्यादा है.

जर्मनी की टीम को एडिडास हर साल 397 करोड़ रुपए देती है. स्पेन को करीब 322 और अर्जेंटीना को 75 करोड़ रुपए स्पॉन्सरशिप राशि के तौर पर देता है.

पहले राउंड में जर्मनी की टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना, एडिडास के लिए किसी बुरी ख़बर से कम नहीं था. जर्मनी की पीआर मार्केटिंग के अनुसार 2002 में हुए वर्ल्ड कप के दौरान कंपनी के करीब 59 करोड़ टीशर्ट बिके थे.

2014 आते-आते यह संख्या करीब 97 करोड़ हो गई. एक टीशर्ट की औसत कीमत करीब 4.5 हजार रुपए होती है. इस साल मेसी और रोनाल्डो का टूर्नामेंट से बाहर होना कंपनी के लिए झटके जैसा हो, जो उनकी बिक्री और ब्रांड को प्रभावित कर सकता है.

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