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क्या इस बार गोल्ड के लिए तैयार हैं बबीता फोगट?
बात चार साल पहले की है जब बबीता राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ग्लासगो में थी. डॉक्टर की ओर से सलाह आई कि बबीता को जो चोट लगी है वो गंभीर है और उन्हें प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेना चाहिए.
बहन गीता से सलाह की लेकिन आख़िर में फ़ैसला किया कि वो मुक़ाबले के लिए उतरेंगी. वो न सिर्फ़ लड़ी बल्कि गोल्ड मेडल लेकर लौंटी.
भारत में जब अगर महिला पहलवानों की बात होती है तो फोगट बहनों- गीता और बबीता का नाम सबसे ऊपर आता है.
हरियाणा के भिवानी के बलाली गाँव से आने वाली बबीता की कहानी फ़िल्म दंगल के ज़रिए काफ़ी मशहूर हुई है. करीब 17-18 साल पहले 2000-2001 में बबीता ने खेलना शुरु किया. छठी-सातवीं तो बबीता ने पढ़ाई की लेकिन फिर पूरा दम खम दंगलों में डाल दिया.
पिता महावीर फोगट की कड़ाई के किस्से भी काफ़ी मशहूर. बबीता की बहन गीता ने बीबीसी से बातचीत में बताया था, पापा ने पिटाई के लिए लकड़ी की पतली छड़ रखी हुई थी. बस दादी ही थीं जो बचाती थी. लेकिन ये सब हमें तैयार करने के लिए था.
यूँ तो पिछले कुछ सालों में कई महिला पहलवान सुर्खियों में रही हैं लेकिन बबीता और उनकी बहन गीता का नाम पहलवानी में इसलिए ख़ास माना जाता है क्योंकि करीब 10 साल पहले दोनों बहनों ने तब पहलवानी में नाम कमाया जब बहुत कम लड़कियाँ इस खेल को अपना रही थीं.
2010 राष्ट्रमंडल में बबीता का रजत पदक और गीता का स्वर्ण पदक एक तरह से महिलाओं के लिए गेम चेंजर माना जाता है.
वैसे कुश्ती में अकसर लोग सोचते हैं कि ख़ूब खाना-पाना होता होगा लेकिन बबीता बताती हैं कि ऐसी धारणा ग़लत है. वे कहती हैं कि वजन को काबू में रखना पड़ता है और कम फैट का खाना होता है.
गीता और बबीता दोनों बहनों के बीच रिश्ता कैसा जब दोनों रिंग में आमने सामने हों और घर पर एक साथ. बबीता का कहना है कि रिंग में तो बस यही दिमाग़ में होता है कि उसे प्वाइंट नहीं लेने देना है चाहे कुछ भी हो जाए. लेकिन घर में बहुत प्यार है आपस में.
वैसे आमिर ख़ान ने भले ही उनके परिवार पर फ़िल्म बनाई हो लेकिन सलमान खान भी बबीता के कम चहेते नहीं है- उन्हें वो पसंदीदा एक्टर्स में एक गिनती हैं.
पहलवानी की बात करें तो रियो ओलंपिक में बबीता के ख़राब प्रदर्शन के बाद अटकलें लगने लगी थीं कि बबीता अब नहीं खेलेंगी. वे प्रतियोगिताओं से भी ग़ायब रहीं. लेकिन पिता के प्रोत्साहन और बाहरी मदद से बबीता ने वापसी की है .
हाल ही उन्होंने एक ट्वीट किया है-
"कुछ नहीं मिलता दुनिया में मेहनत के बग़ैर, मेरा अपना साया भी मुझे धूप में आने के बाद मिला."
शायद यही जज़्बा बबीता को फिर से मेडल की राह तक ले जाए.