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राष्ट्रमंडल खेल डायरी: ‘समय से पहले जश्न मनाया इसलिए नहीं मिला स्वर्ण’
- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) से
ऐसा बहुत कम ही होता है कि खेल के दौरान पूरी भारतीय टीम अपने साथी का मनोबल बढ़ाने के लिए 'जीतेगा भई जीतेगा इंडिया जीतेगा' के नारे लगाए.
जैसे ही साइना नेहवाल के स्मैश को मलेशियाई खिलाड़ी चिया सोनिया ने जाल में डाला पूरी भारतीय टीम झंडा लेकर कोर्ट में घुस गई और साइना नेहवाल को बीच में करके नाचने लगी.
मिक्स्ड डबल्स भारत की कमज़ोर कड़ी थी. भारत ने मलेशियाई जोड़ी के खिलाफ़ सात्विक रेड्डी और अनुभवी अश्वनी पोनप्पा को उतारा. सात्विक ने मलेशियाई खिलाड़ियों को शरीर पर स्मैशों की झड़ी लगा दी.
सात्विक के स्मैश हमेशा विरोधी खिलाड़ी के शरीर पर पड़ते हैं. एक बार उनका स्मैश गोह लियु यिंग के मुंह पर लगा. उन्होंने 'पॉइंट' पर खुशी मनाने के बजाए गोह से माफ़ी मांगी.
अंपायर को देनी पड़ी चेतावनी
पूरे मुकाबले में पोनप्पा सात्विक को सलाह देती रहीं. पोनप्पा सात्विक को एक-एक अंक पर रणनीति समझा रही थीं, वो भी मुंह पर हाथ रखकर ताकि उनकी बात कोई सुन न ले.
पोनप्पा को शायद अहसास नहीं था कि अगर वो मुंह पर हाथ न भी लगातीं तब भी मलेशियाई खिलाड़ियों को तो समझ में आने वाला नहीं था कि वो क्या कह रही हैं. जब इन दोनों की बातें बहुत बढ़ गईं तो अंपायर को उन्हें वार्न करना पड़ा कि वो बातों के अलावा खेल पर भी ध्यान दें. भारत ने ये मैच तीन सेटों में जीता.
दूसरे मैच में किदंबी श्रीकांत ने कभी दुनिया के नंबर एक और इस समय नंबर छह ली चोंग वी को सीधे सेटों में हराया. मैच के बाद श्रीकांत ने मुझे बताया कि स्कोर पर मत जाइए. ये इतना आसान मैच नहीं था. मैंने अपना सब कुछ झोंक कर ली चोंग पर जीत हासिल की.
डबल्स हारने के बाद चौथे मैच में साइना भारत की तरफ़ से उतरीं. पहले सेट में 11-11 से बराबरी के बाद साइना ने लगातार 10 अंक जीत कर पहला सेट आसानी से जीत लिया. लेकिन दूसरे गेम में मलेशियाई खिलाड़ी सोनिया की उंगली में चोट लगी और साइना का ध्यान भंग हो गया.
तीसरे गेम में सोनिया एक समय 7-5 से आगे थीं, लेकिन फिर साइना ने कहा कि बहुत हो चुका. तीसरा गेम उन्होंने 21-9 से जीता. सोनिया ने साइना को ऊँची सर्व कर परेशान करने की कोशिश की. वो परेशान भी हुईं लेकिन आख़िर में उन्होंने उसकी काट ढूंढ ली.
साइना बहुत 'फ़्लैशी' खिलाड़ी नहीं हैं और न ही हमेशा 'स्मैश' लगाने के लिए तत्पर रहती हैं. उनकी पूरी कोशिश रहती है कि 'शटल' को गेम में रखा जाए और दूसरे खिलाड़ी को ग़लती करने पर मजबूर किया जाए. वो शटल की उड़ान की बहुत अच्छी जज भी हैं.
कितनी ही बार हुआ कि साइना ने सोनिया के बाहर गिरते शॉट्स पर अपना रैकेट नहीं अड़ाया और उसे छोड़ दिया. करारा स्टेडियम में इतने अधिक भारतीय मूल के दर्शक ये मैच देख रहे थे कि लग रहा था कि मैच हैदराबाद में हो रहा है.
एक दिलचस्प चीज़ देखने में ये लगी कि हर भारतीय खिलाड़ी विनिंग शॉट लगाने के बाद कोच गोपीचंद की तरफ़ देखता था, मानो उनसे पूछ रहा हो कैसा था ये शॉट. वहीं ख़राब खेलने पर भी वो गोपीचंद की तरफ़ देखकर अपना अफ़सोस प्रकट करते थे.
इस पूरे अभियान में सिंधु को आराम दिया गया और उनकी जगह साइना ने ही भारत का प्रतिनिधित्व किया. मैच के बाद कोच गोपीचंद ने बताया कि सिंधु सिंगल्स मैच खेलेंगी और सिंगल्स फ़ाइनल में सिंधु और साइना के भिड़ने की संभावना है.
समय से पहले मनाई ख़ुशी
10 मीटर महिला एयर राइफ़ल शूटिंग में 23वें शॉट तक मेहुली घोष सिंगापुर की शूटर मार्टीना वेलोसो से थोड़ा पीछे चल रही थी. अंतिम शॉट में उन्होंने 10.9 निशाना लगाया जो कि शूटिंग में सबसे अच्छा निशाना माना जाता है.
उन्होंने समझा कि बाज़ी उनके हाथ आ गई है और उन्होंने अपने दस्ताने उतारकर स्वर्ण पदक जीतने के अंदाज़ में अपने हाथ ऊपर कर दिए. बाद में पता चला कि उन्होंने सिंगापुर की शूटर की बराबरी भर की है.
दोनों में फिर शूट आफ़ हुआ, लेकिन तब तक उनका ध्यान भंग हो चुका था और आखिरी शॉट में मेहुली मात खा गईं. उन्होंने 9.9 का निशाना लगाया और स्वर्ण पदक उनके हाथ से जाता रहा.
बाद में मेहुली ने माना कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. लेकिन मेहुली अभी सिर्फ़ 17 साल की हैं. महत्वपूर्ण मौकों पर अपना ध्यान केंद्रित करने की कला तो अनुभव से ही आएगी.
जीतू राय ने हारी बाज़ी पलटी
पुरुषों के 10 मीटर एयर पिस्टल के क्वालिफ़ाइंग राउंड में भारत के जीतू राय चौथे स्थान पर थे. पहले स्थान पर भारत के ही दूसरे खिलाड़ी ओमप्रकाश मिथरवाल थे. बाद में जीतू ने बताया कि शुरुआती दौर में उनके ख़राब प्रदर्शन का कारण था, उनके शरीर से बेइंतहा निकलने वाला पसीना और उनके ट्रिगर की ख़राब टाइमिंग.
बाद में उन्होंने अपने कोच से सलाह ली और उनका पुराना अनुभव काम आया. जैसे ही जीतू जीते स्टैंड्स में बैठे जसपाल राणा ने दौड़ कर गले लगा लिया. जीतू का जन्म नेपाल में हुआ था और इस समय वो गोरखा राइफ़ल में नायब सूबेदार के पद पर काम कर रहे हैं.
वहीं, क्वालिफ़ाइंग मुकाबलों में आगे रहने और कॉमनवेल्थ का रिकार्ड तोड़ने वाले मिथरवाल फ़ाइनल में अपने नर्व्स पर नियंत्रण नहीं रख पाए और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा.