दिनेश कार्तिक ने महेंद्र सिंह धोनी को क्यों बताया 'टॉपर'?

कोलंबो में निदहास कप में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ फ़ाइनल मुक़ाबले में आखिरी गेंद पर छक्का जड़कर भारत को ट्रॉफ़ी दिलाने वाले दिनेश कार्तिक की चर्चा हर गली चौराहे पर हो रही है.

कोई उन्हें बेस्ट फ़िनिशर करार दे रहा है तो कुछ खेल प्रेमियों का ये भी मानना है कि दिनेश कार्तिक को भारतीय क्रिकेट में उतनी अहमियत नहीं मिली जिसके कि वो हक़दार थे.

फ़ाइनल मुक़ाबले में जब टीम इंडिया बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जूझ रही थी, तब कार्तिक ने आठ गेंदों पर 29 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर बांग्लादेशियों को 'नागिन डांस' करने से वंचित कर दिया.

जब हर तरफ़ विकेटकीपर बल्लेबाज़ दिनेश कार्तिक की वाहवाही हो रही है, तब ये जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वो टीम इंडिया में अपनी जगह और महेंद्र सिंह धोनी के साथ अपनी तुलना को किस तरह देखते हैं.

धोनी हैं 'टॉपर'

चेन्नई में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "अगर धोनी की बात करें तो मैं उस यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हूँ जहां वह (धोनी) टॉपर हैं. वह ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका मैं हमेशा अनुसरण करता आया हूँ. उनके साथ मेरी तुलना अनुचित होगी."

ये दिलचस्प है कि दिनेश कार्तिक ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत धोनी से पहले की थी. कार्तिक ने इंग्लैंड में सितंबर 2004 की चैंपियंस ट्रॉफ़ी में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला खेला था, जबकि धोनी को तीन महीने बाद बांग्लादेश के ख़िलाफ़ द्विपक्षीय सिरीज़ में टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला.

धोनी ने पहले अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से टीम में जगह पक्की की और फिर जब उन्हें भारतीय टीम की कमान मिली तो उन्होंने इतिहास ही रच दिया. धोनी अपनी कप्तानी में भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 का वर्ल्ड कप जीता और साथ ही चैंपियंस ट्रॉफ़ी पर भी कब्जा किया.

उधर, कार्तिक को भी कम ही सही, लेकिन मौके ज़रूर मिले, लेकिन वो उन मौकों का भरपूर लाभ नहीं उठा सके.

कार्तिक ने कहा, "उनका (धोनी) करियर पूरी तरह अलग था और मेरा सफर पूरी तरह से अलग है. वह बेहतरीन खिलाड़ी हैं. वो काफी शर्मीले थे. आज, वो ऐसे इंसान बन गए हैं जो युवाओं की मदद करने के लिए खुलकर बोलता है. मेरा मानना है उनसे मेरी तुलना पूरी तरह अनुचित है. जैसा कि मैंने कहा, वह शायद उस यूनिवर्सिटी के टॉपर हैं, जहाँ मैं पढ़ रहा हूँ. मैं जिस स्थिति में हूँ, खुश हूं."

सिक्स और ईश्वर की कृपा

तकरीबन डेढ़ दशक से खेल रहे कार्तिक को आखिरकार वो तारीफ़ें मिल रही हैं, जिनके वास्तव में वो हकदार थे. कार्तिक इसे अच्छे कर्म और ईश्वर की कृपा मानते हैं.

कार्तिक ने कहा, "सभी मेरे बारे में बात कर रहे हैं और इससे अच्छा लग रहा है. मैंने वर्षों में अच्छे काम किए, उससे मुझे वो छक्का जड़ने में मदद मिली. वह शॉट छक्के के लिए चला गया, शायद दो मिलीमीटर के फासले वह छक्का बन गया."

कार्तिक मानते हैं कि इस जीत की खुशी ही कुछ अलग है.

कार्तिक ने कहा, "मेरे लिये उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. मैं यह खेल खेलकर खुश हूं. जब आप घरेलू क्रिकेट खेलते हो तो यह कठिन दौर होता है. अचानक इस तरह से चर्चा में आने से अच्छा लग रहा है, लेकिन आप यह भी जानते हो कि आप चाहते हो कि ये कुछ स्पेशल होने की शुरुआत हो."

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