कौन हैं निदहास टूर्नामेंट के मैन ऑफ़ द सिरीज़ सुंदर वाशिंगटन?

वाशिंगटन सुंदर

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भारत ने कोलंबो में बांग्लादेश को चार विकेट से हराकर टी-20 मैचों की निदहास ट्रॉफ़ी अपने नाम कर ली. इस जीत के हीरो रहे दिनेश कार्तिक, जिन्होंने आख़िरी गेंद पर छक्का जड़कर भारत को जीत के मुकाम पर पहुँचाया.

लेकिन चैंपियन बनी टीम इंडिया के लिए इस टूर्नामेंट में एक और प्रतिभा ने अपना लोहा मनवाया. 18 साल के युवा वाशिंगटन सुंदर ने. सुंदर को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया.

तमिलनाडु के सुंदर ने निदहास ट्रॉफ़ी में आठ विकेट चटकाए और ऐसा प्रदर्शन करने वाले वो भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं. भारत ने 14 मार्च को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ ही इस टूर्नामेंट का आख़िरी ग्रुप मैच खेला था और तब वाशिंगटन सुंदर ने तीन विकेट चटकाए थे.

वो 18 साल की सबसे कम उम्र में 3 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज़ बने थे. उनसे पहले, ये रिकॉर्ड ऑफ़ स्पिनर अक्षर पटेल के नाम था. अक्षर पटेल ने 21 साल की उम्र में 2015 में ज़िंबाब्वे के ख़िलाफ़ 3 विकेट लिए थे.

किस्मत कनेक्शन!

रोहित शर्मा और सुंदर

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मैन ऑफ़ द सिरीज़ का पुरस्कार लेने के बाद सुंदरराजन ने कहा, "मेरे लिए इतनी कम उम्र में ये हासिल करना बहुत अहमियत रखता है. मैं इसके लिए अपने परिवार को शुक्रिया कहना चाहता हूँ."

दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम में सुंदर का सफर शुरू हुए अभी तकरीबन तीन महीने ही हुए हैं. मोहाली में 13 दिसंबर 2017 को भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रवि शास्त्री ने जब सुंदर वाशिंगटन को टीम इंडिया की कैप दी थी, तो सुंदर के लिए वो न भूलने वाले पल थे.

सुंदर की उम्र तब 18 साल 69 दिन थी और उन्होंने तमिलनाडु के लिए सिर्फ़ 12 प्रथम श्रेणी मुक़ाबले ही खेले थे. टीम इंडिया में सबसे कम उम्र में दाखिला लेने वालों में वो सातवें नंबर पर पहुंच गए थे.

इस सूची में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर पहले नंबर पर हैं. तेंदुलकर ने भारत के लिए पहला मैच 16 साल 238 दिन की उम्र में खेला था.

लेकिन वॉशिंगटन सुंदर के नाम को लेकर भी चर्चा होती रहती है. उनका इतना दिलचस्प नाम कैसे रखा गया?

एक बार उनके पिता ने इसके पीछे की कहानी बताई थी. ''हमारे घर से कुछ दूरी पर पी डी वॉशिंगटन नाम के पूर्व सैनिक रहते थे. उन्हें क्रिकेट पसंद था और मरीना ग्राउंड पर हमें देखने आते थे. मेरा खेल उन्हें अच्छा लगने लगा.''

सुंदर सीनियर ने बताया, ''हम गरीब थे और वो मुझे स्कूल ड्रेस खरीदकर देते, फ़ीस भरते, किताबें लाकर देते और प्रोत्साहित करते.''

वॉशिंगटन सुंदर के पिता भी क्रिकेटर रहे हैं. उन्होंने बताया, ''मेरी पत्नी ने जब बच्चे को जन्म दिया तो काफ़ी मुश्किल रहा. लेकिन बच्चा सलामत रहा. हिंदू परंपरा के मुताबिक, मैंने बच्चे के कान में नाम कहा, श्रीनिवासन. लेकिन मैंने बच्चे को वॉशिंगटन नाम दिया क्योंकि मैं उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना चाहता था जिसने मेरे लिए इतना कुछ किया. ''

''अगर मेरा दूसरा बेटा होता तो मैं उसे वॉशिंगटन जूनियर नाम देता.''

कहा जाता है कि सवा सौ करोड़ से अधिक की आबादी वाले भारत में जहाँ गली-गली में क्रिकेट खेला जाता है, वहां टीम इंडिया में पहुंचने के लिए मेहनत और प्रतिभा तो ज़रूरी है ही, किस्मत कनेक्शन भी बहुत हद तक अहमियत रखता है.

दरअसल, श्रीलंका के ख़िलाफ़ वनडे की घरेलू सिरीज़ में केदार जाधव घायल हो गए थे और ये मौका सुंदर को टीम इंडिया के अंतिम एकादम में पहुंचाने के लिए काफी था. सुंदर वाशिंगटन को चाइनामैन कुलदीप यादव की जगह टीम में शामिल कर लिया गया.

क्या ख़ासियत है सुंदर की?

भारतीय टीम

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5 अक्टूबर 1999 को चेन्नई में जन्में बाएं हाथ से बल्लेबाज़ी करने वाले सुंदर वाशिंगटन दाएं हाथ से ऑफ़ब्रेक गेंदबाज़ी करते हैं. सुंदर की ख़ासियत है उनका ये भांप लेना कि बल्लेबाज़ के दिमाग़ में चल क्या रहा है.

सुंदर कहते हैं, "मैं हमेशा बल्लेबाज़ों के दिमाग को पढ़ने की कोशिश करता हूं और मेरी लगातार यही कोशिश रहती है. मैं चाहता था कि जब हम जीतें तो मैं मैदान पर रहूँ और मैं समझता हूँ कि दिनेश भाई (कार्तिक) ने शानदार खेल दिखाया और मैच की बाज़ी पलटते हुए इसे यादगार बना दिया."

20-20 ओवरों के खेल में जहाँ सिर्फ़ बल्लेबाज़ों का ही जलवा दिखता है. वहाँ वो पावर प्ले में चतुराई से गेंदें फेंकते हैं और निदहास ट्रॉफ़ी में उनकी सबसे बड़ी ताकत आक्रामक बल्लेबाज़ों के सामने भी अपने मनोबल को बनाए रखने में दिखाई दी. वो अपनी गेंदें ऑफ़ स्टंप के कुछ बाहर रखकर बल्लेबाज़ों को ललचाते हैं, लेकिन यही उनका मारक हथियार है और वो बल्लेबाज़ को भ्रम में डाल देते हैं.

टूर्नामेंट में उनका इकॉनोमी रेट 5.80 का रहा और सबसे अहम बात ये है कि उनके 20 ओवरों में से अधिकांश पावरप्ले में फेंके गए हैं.

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