वो 5 चीज़ें जिनसे दांव पलट सकते हैं कोहली

विराट कोहली

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आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में भारतीय टीम इन दिनों शीर्ष पर है लेकिन सिर्फ़ इस बात से खुश हुआ जाता तो शुक्रवार से शुरू होने वाले दक्षिण अफ़्रीका के मुश्किल दौरे की इतनी चर्चा नहीं होती.

एक ख़बर ये भी आई कि तीन टेस्ट मैचों की इस सिरीज़ में अगर दक्षिण अफ़्रीका, टीम कोहली को 3-0 से हरा देती है तो भी आईसीसी रैंकिंग में भारत पहले और द. अफ़्रीका दूसरे पायदान पर ही बना रहेगा.

लेकिन महज़ रैंकिंग को दिमाग में रखकर क्रिकेट खेला जाता तो बात ही क्या थी. कई बार क्रिकेट खेला जाता है परंपराएं तोड़ने और इतिहास बदलने के लिए.

और भारतीय टीम के साथ यह ऐतिहासिक धारणा चस्पा है कि वह घर में अच्छा खेलती है और उसके ख़तरनाक बल्लेबाज़ बाहर निकलने के बाद काग़ज़ी शेर साबित होते हैं.

बदलेगा 25 साल का इतिहास?

धोनी, स्मिथ

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और ऐसा ही एक काला इतिहास टीम इंडिया के पीछे 25 बरस से लगा है. इतना वक़्त गुज़रने के बाद भी वो दक्षिण अफ़्रीका की ज़मीन पर कोई टेस्ट सिरीज़ नहीं जीत पाई.

लेकिन इस बार बात कुछ अलग है. हर बार भारतीय टीम बनाम विरोधी टीम के तेज़ गेंदबाज़ों की बात होती थी. इस बार भारतीय टीम के पास सुनहरा मौका बताया जा रहा है.

मौका इसलिए कि कोहली की फ़ौज में सारे सैनिक चुस्त-दुरुस्त हैं और नौजवान कप्तान की अगुवाई में खेलने वाली नौजवान टीम कुछ अलग साबित करना चाहती हैं.

वो कौन से हथियार हैं जिनके बूते भारतीय टीम इस बार दक्षिण अफ़्रीका के अपने रिकॉर्ड में से सिफ़र मिटाने का ख़्वाब देख रही है?

1. बल्लेबाज़ और कप्तान कोहली

विराट कोहली

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भारतीय टीम के कप्तान आक्रामक हैं और साथ ही फ़ॉर्म में चल रहे एक धमाकेदार बल्लेबाज़ भी. इंग्लैंड के दौरे में स्विंग के हाथों नाकाम रहने के बाद कोहली ने ऑस्ट्रेलिया में दिखाया कि वो लड़ना जानते हैं.

कुछ ऐसी ही उम्मीद उनसे दक्षिण अफ़्रीका में होगी. ऑफ़ स्टंप के बाहर मूव होती गेंदों को छोड़ने का संयम दिखाकर अगर वो शुरुआती पल काट लेते हैं तो गेंद पर नज़रें जमने के बाद वो बेहद ख़तरनाक हैं.

कोहली स्कोर करते हैं तो दूसरे बल्लेबाज़ों का उत्साह भी बना रहता हैं. वो आक्रामक खेलते हैं, इसलिए तेज़ गेंदबाज़ों के साथ उनकी जंग देखने में मज़ा आएगा.

साल 2013 में वो बतौर बल्लेबाज़ दक्षिण अफ़्रीका में दो मैचों में 272 रन बना चुके हैं जिसमें एक शानदार शतक भी शामिल है. और इस बार वो तीन टेस्ट में बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज़ अपना असर छोड़ना चाहेंगे.

2. भारतीय पेस बैटरी

भुवनेश्वर कुमार

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जब कभी भारतीय टीम विदेश दौरा करती है तो चर्चा होती है 'हमारी बल्लेबाज़ी और उनकी गेंदबाज़ी' पर लेकिन इस बार मामला यहां भी अलग है. हमारे गेंदबाज़ों की चर्चा भी हो रही है.

सामने वाली टीम में डेल स्टेन, मॉरने मॉर्कल, कगिसो रबाडा और वर्नोन फ़िलेंडर जैसे ख़तरनाक गेंदबाज़ हैं तो भारतीय कप्तान के पास भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह में से चुनने का विकल्प है.

पांचों भारतीय गेंदबाज़ अलग हैं. भुवनेश्वर और शमी स्विंग का हथियार रखते हैं तो ईशांत और उमेश को डेक बॉलर कहा जाता है. साथ में बुमराह का अजीबोगरीब एक्शन और यॉर्कर. बीस विकेट लेने का सारा इंतज़ाम.

इसके अलावा रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन हैं, जो विदेशी पिचों पर भारत जितना असरदार साबित नहीं होते, लेकिन पिच की ज़रा सी मदद मिलने पर बेहद ख़तरनाक बन जाते हैं.

3. कोहली के अलावा बल्लेबाज़

रोहित, रहाणे

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अगर स्विंग संभाल लें तो शिखर धवन के पास उछाल वाली पिचों पर बल्लेबाज़ी की ठोस तकनीक है. उनके अलावा के एल राहुल, अजिंक्ये रहाणे, मुरली विजय भी हैं. लेकिन एक नाम काफ़ी ख़ास है.

हाल में जब विराट कोहली शादी की छुट्टियां लेकर गए थे तो घर में खेल रही भारतीय टीम को उनकी ज़रा कमी नहीं खली. इसकी वजह थे रोहित शर्मा. वो कप्तानी संभाल रहे थे लेकिन उससे शानदार तरीके से उन्होंने बल्ला संभाला.

वनडे मैच हो या फिर टी20, रोहित की पारियां ख़ास रहीं. और इस वजह से कोहली को सिरदर्द का सामना भी करना होगा. एक तरफ़ रहाणे हैं, तो दूसरी तरफ़ रोहित.

रहाणे भले भारत में नाकाम चल रहे हों लेकिन विदेशी पिचों पर उन्होंने कई दिलेर पारियां खेली हैं और रोहित के हालिया फ़ॉर्म को नज़रअंदाज़ करना काफ़ी मुश्किल होगा.

4. 'हार्दिक' स्वागत है

हार्दिक पंड्या

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वनडे टीम और टी20 मैचों में अपना जलवा दिखा चुके हार्दिक पंड्या को अगर दक्षिण अफ़्रीका में टेस्ट खिलाया जाता है तो ये इस बात का संकेत होगा कि भारतीय टीम मैच बचाने के लिए नहीं, जीतने के लिए खेल रही है.

विराट कोहली अपने आक्रामक अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं और पंड्या उनकी स्कीम में फ़िट बैठते हैं. सातवें-आठवें क्रम पर बल्ला थामना हो या पांचवें तेज़ गेंदबाज़ के रूप में 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से बॉल फेंकना हो, पंड्या दोनों कर सकते हैं.

सचिन तेंदुलकर ने हार्दिक पंड्या को टीम के लिए बेहद ज़रूरी बताया है. उनका कहना है कि जब वो खेल रहे थे, टीम में कभी कोई ऐसा हरफ़नमौला खिलाड़ी नहीं था जो कंपोजिशन में इस कदर फ़िट बैठता हो.

पंड्या नौजवान हैं और दबाव में नहीं आते. टेस्ट मैच में आक्रामकता के साथ संयम भी दिखाना होता है. अगर पंड्या ये गुर सीख गए तो खेल बन सकता है.

5. टीम अफ्रीका की समस्या

डेल स्टेन

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टीम इंडिया के अपने हथियार तो हैं ही, साथ ही दक्षिण अफ़्रीका की कमज़ोरियां भी उसके काम आ सकती हैं. इन कमज़ोरी में तेज़ गेंदबाज़ भी हैं और स्टार बल्लेबाज़ भी.

अफ़्रीकी टीम के सबसे ख़तरनाक गेंदबाज़ डेल स्टेन कंधे के ऑपरेशन के बाद टीम में वापसी कर रहे हैं और ए बी डीविलियर्स भी कई दिन के बाद सफ़ेद जर्सी पहन रहे हैं.

इसके अलावा दक्षिण अफ़्रीका के कुछ शहरों में पानी की कमी है, इसलिए पिचें भी इस बार शायद वो रफ़्तार ना दिखाएं.

और इन मुश्किलों का क्या होगा?

टीम इंडिया

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ये बात सही है कि टीम इंडिया के पक्ष में इस बार कई चीज़ें हैं. लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं. अगर भारतीय टीम को जीतना है तो इस मुश्किलों से पार पाना होगा.

भारतीय बल्लेबाज़ों को हर गेंद को छूने का मोह छोड़ना होगा. बाहर जाती हुई गेंदों को सम्मान देने के क़ायदे पर बने रहना होगा.

इसके अलावा स्लिप कॉरिडोर में कैच लपकने होंगे. गेंदबाज़ों की सारी मेहनत तब काम आएगी जब बल्ला का किनारा लेकर पीछे जाने वाली कैच पकड़ी जाएंगी.

कोहली को इस कॉरिडोर में ऐसे फ़ील्डर लगाने होंगे जो स्लिप में विशेषज्ञता रखते हैं.

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