विराट कोहली के लिए हार्दिक पंड्या इतने ज़रूरी क्यों हो गए?

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इंदौर का होल्कर स्टेडियम इससे पहले भी कई बड़े स्कोर वाले मैच देख चुका है. वीरेंद्र सहवाग ने इसी मैदान पर वनडे में 200 का आंकड़ा छुआ था.
ऐसे में बल्लेबाज़ों के लिए जन्नत जैसे दिखने वाली पिच पर 294 रनों का भारी-भरकम स्कोर भी मामूली लगता है.
वो भी तब जब पहले रोहित शर्मा के गगनचुंबी छक्कों और अजिंक्ये रहाणे की आक्रामक पारी ने भारतीय टीम को मज़बूत स्थिति में ला दिया हो.
पंड्या क्यों उतरे जल्दी?

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सलामी बल्लेबाज़ अच्छी-ख़ासी शुरुआत देकर गए, रन रेट क़ाबू में था और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ ज़रूरत से ज़्यादा हावी नहीं दिख रहे थे.
जब सब कुछ इतना ठीक था तो फिर 147 रनों पर दो विकेट गिरने के बाद हार्दिक पंड्या को अचानक बल्लेबाज़ी के लिए क्यों उतारा गया?
उनसे पहले मनीष पांडे और महेंद्र सिंह धोनी थे, फिर पंड्या पर दांव क्यों लगा? ये सवाल कुछ मिनट तक ही ज़हन में रहा. उसके बाद पंड्या ने ऐसे सारे सवालों का जवाब अपनी शानदार बल्लेबाज़ी से दिया.
कोहली ने की तारीफ़

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पंड्या ने शानदार 78 रन बनाए, टीम को जीत तक पहुंचाया और ये सुनिश्चित किया कि चेज़ स्पेशलिस्ट विराट कोहली की कमी ना खले.
और ख़ुद कप्तान कोहली ने मैच के बाद बताया कि पंड्या को चार नंबर पर क्यों उतारा गया. उन्होंने कहा, ''वो (हार्दिक पंड्या) स्टार है. बॉल, बैट और फ़ील्ड, तीनों में धमाकेदार है. हमें उन जैसे खिलाड़ी की ज़रूरत थी.''
उन्होंने कहा, ''उनके जैसा आक्रामक ऑलराउंडर भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद ज़रूरी था. पंड्या को पहले उतारने का फ़ैसला रवि (शास्त्री) भाई का था. और ये स्पिनर पर हमला करने के लिए किया गया था.''
पंड्या ने बताया मौका

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ख़ुद पंड्या ने बताया कि उनकी क्या योजना थी और किस तरह हर चीज़ खांचे में फ़िट होती गई. तीसरे वनडे में मैन ऑफ़ द मैच चुने गए हार्दिक ने कहा, ''मुझे काफ़ी अच्छा महसूस हो रहा है लेकिन अगली बार मैच ख़त्म होने तक रहना चाहूंगा.''
उन्होंने कहा, ''मुझे पहले उतारे जाने पर कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि मेरे लिए ये एक मौके की तरह है. मैं बाएं हाथ के स्पिनर को टारगेट करना चाहता था. जब मैं कुछ छक्के मारने में कामयाब रहा तो अहसास हो गया कि कुछ वक़्त ले सकता हूं.''
इत्तफ़ाक देखिए कि जब पंड्या बल्लेबाज़ी के लिए उतरे थे, तो इस फ़ैसले पर सवाल उठ रहे थे लेकिन मैच के बाद सवाल तारीफ़ में बदल गए.
जानकारों की राय बदलती गई

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जाने-माने क्रिकेट कमेंटटेर हर्षा भोगले के ट्वीट से भी समझा सकता है कि खेल और पंड्या को लेकर नज़रिया किस तरह बदलता चला गया.
पंड्या के उतरने पर उन्होंने लिखा, ''ज़ाहिर है पंड्या को स्पिनर को निशाना बनाने के लिए भेजा गया है लेकिन (मनीष) पांडे के लिए बुरा लग सकता है जो टीम में अपनी जगह बनाने की कोशिशों में लगे हैं.''
इसके बाद उन्होंने लिखा, ''पंड्या ऊपर बल्लेबाज़ी करते हुए ज़रा भी कमज़ोर नहीं दिख रहे लेकिन अब उन्हें टीम को जीत तक ले जाना होगा.''
हमला और संभालना, दोनों साथ

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और जब भारतीय टीम मैच और सिरीज़ दोनों जीत गए तो भोगले ने ट्वीट किया, ''मैं क्रिकेटर के रूप में हार्दिक पंड्या के डेवलपमेंट देखकर काफ़ी ख़ुश हूं. वो सक्षम हैं, इसमें पहले भी शक नहीं था लेकिन टेम्परामेंट काबिल-ए-तारीफ़ है.''
पंड्या ने मैदान में उतरते ही वो करना शुरू किया, जिसके लिए उन्हें भेजा गया था. एश्टन एगर फ़िरकी में फंसाने में लगे थे लेकिन पंड्या ने हर ओवर में उन्हें जमकर कूटा.
जो गेंद पंड्या के दायरे में आई, उसे उन्होंने बाहर भेजने में ज़रा देर नहीं लगाई. साथ ही उनका संयम भी ज़ोरदार रहा. छक्के मारने के बाद वो सिंगल लेकर स्ट्राइक रोटेट भी करते रहे.
सिरीज़ में लगातार चमके

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लेकिन पंड्या कोहली के लिए इतने ज़रूरी क्यों गए हैं? इस सिरीज़ में उनका प्रदर्शन इसकी झलकी देता है.
ऑस्ट्रेलिया घर में खेले या भारत में, कभी भी उसे हल्के में नहीं लिया जाता. सिरीज़ के पहले मैच में जब भारतीय टीम का ऊपरी क्रम पवेलियन लौट गया था तो खेल का रुख़ पलटा हार्दिक पंड्या ने.
उन्होंने 83 रन बनाए और बाद में 28 रन देकर दो विकेट झटके. दूसरे मैच में वो 20 रन बना पाए लेकिन 56 रन देकर फिर दो विकेट चटकाए.
और तीसरे मैच में 58 रन देकर 1 विकेट लेने के बाद उन्होंने बल्लेबाज़ी में भी जलवा दिखाया.
मनीष पांडे या पंड्या?

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दरअसल, भारतीय टीम के लिए वनडे टीम में चौथा क्रम लंबे वक़्त से सिरदर्द बना हुआ है. मनीष पांडे को इस नंबर पर मौका दिया जा रहा था लेकिन अब वो तक कुछ ख़ास नहीं कर सके हैं.
ऐसे में इंदौर वनडे में पंड्या पर दांव लगाया गया है, जो चल भी गया. पंड्या ने अब तक 24 वनडे मैच में 15 पारियां खेली हैं. उन्होंने अब तक कुल 489 रन बनाए हैं. इस छोटे से करियर में उन्होंने 30 चौके और 25 छक्के लगाए हैं.
और छक्के लगाने की यही काबिलियत उनका स्ट्राइक रेट चमकाए हुए है. 24 वनडे में उनका औसत 40 से ज़रा ऊपर है लेकिन स्ट्राइक रेट 122 से ऊपर है.
जल्दी या बाद में, नया सिरदर्द

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अब अगर क्रम की बात की जाए तो पंड्या सातवें पायदान पर काफ़ी मज़बूत नज़र आते हैं. वो सातवें क्रम पर 8 बार उतरे हैं और इसी क्रम पर बल्लेबाज़ी करते हुए 52.33 की औसत से 314 रन बना चुके हैं.
आठवें क्रम पर उनके नाम 45 रन हैं. जबकि चौथे क्रम पर उन्होंने तीन पारियों में 101 रन बनाए हैं और 33.66 रन का औसत है.
अगले वर्ल्ड कप के लिए टीम सजाने में जुटे कोहली और शास्त्री के लिए पंड्या ने नया सिरदर्द पैदा कर दिया है. मनीष और हार्दिक में से किस पर कैसा दांव लगाया जाएगा?
दिक्कत ये है कि मनीष नीचे उतरकर वो बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते जिसके लिए पंड्या जाने जाते हैं. और अगर पंड्या को ऊपर उतारा गया तो अंतिम ओवरों में कौन रफ़्तार बढ़ाएगा.
पंड्या जैसे और चाहिए?

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बड़े दिनों के बाद पंड्या के रूप में टीम इंडिया को वो आतिशी ऑलराउंडर मिलता दिख रहा है, जिसका इंतज़ार लंबे वक़्त से था. लेकिन सवाल ये है कि उन्हें किस क्रम पर खिलाया जाएगा.
या फिर मैच की स्थिति को देखते हुए पंड्या के क्रम में बदलाव होगा. ऐसा हो भी सकता है क्योंकि इन दिनों पंड्या का बल्ला हर क्रम पर बोल रहा है.
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