कितने ताक़तवर बांग्लादेश में चरमपंथी

बांग्लादेश की पुलिस का दावा है कि उसके अभियानों से चरमपंथी कमज़ोर पड़े हैं

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    • Author, अकबर हुसैन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, ढाका

बांग्लादेश पुलिस के विशेष बल – रैपिड ऐक्शन बटालियन – का कहना है कि उन्होंने प्रतिबंधित इस्लामी चरमपंथी गुट जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के नेटवर्क को कमज़ोर कर दिया है.

जेएमबी को अभी भी बांग्लादेश का सबसे ख़तरनाक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन समझा जाता है.

ठीक छह साल पहले – 17 अगस्त 2005 को – जेएमबी ने मात्र एक ज़िले को छोड़ सारे बांग्लादेश में सिलसिलेवार बम धमाके किए थे.

इन सिलसिलेवार धमाकों में दो लोगों की जान गई और इनसे जेएमबी ने अपनी सांगठनिक ताक़त का अहसास कराया.

इन धमाकों के बाद जेएमबी ने एक आत्मघाती हमला कर दो न्यायाधीशों की जान ली.

अधिकारियों का दावा है कि रैपिड ऐक्शन बटालियन की जेएमबी के ख़िलाफ़ लगातार की जा रही कार्रवाई से अब संगठन का नेतृत्व तंत्र कमज़ोर हो चुका है.

कार्रवाई

सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद वर्ष 2006 में जेएमबी के दो शीर्ष नेताओं को गिरफ़्तार किया गया था और क़ानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद उन्हें 2007 में फ़ाँसी दे दी गई.

अधिकारियों का कहना है कि अभी तक जेएमबी के 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

संगठन को अभी भी ख़तरनाक माना जाता है लेकिन अधिकारियों को लगता है कि क़ानून का पालन करवानेवाली संस्थाओं ने बहुत हद तक चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण कर लिया है.

ठीक छह साल पहले पूरे बांग्लादेश में सैकड़ों छोटे धमाके हुए थे

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आरएबी के प्रवक्ता कमांडर एम सोहेल ने कहा,"अब जेएमबी और दूसरी प्रतिबंधित इस्लामी पार्टियों की देश में तोड़-फोड़ करने की क्षमता नहीं रही."

बांग्लादेश सरकार ने 2005 से लेकर अब तक पाँच इस्लामी पार्टियों पर प्रतिबंध लगाया है जिनमें जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश भी शामिल है.

हालाँकि सुरक्षा विशेषज्ञ और अधिकारी दोनों का कहना है कि प्रतिबंधित इस्लामी पार्टियाँ बेशक खुलकर सक्रिय नहीं हैं, लेकिन भूमिगत तौर पर वे काफ़ी सक्रिय हैं.

बांग्लादेश में इस्लामी गुट अब अपनी ताक़त दोबारा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

हाल के वर्षों में पुलिस को स्थानीय चरमपंथी गुटों के बाहर के गुटों से संपर्क होने का पता चला है.

हाल के वर्षों में बांग्लादेश में पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट लश्करे-तैबा के कम-से-कम 11 सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है.

मगर पुलिस का कहना है कि लश्कर वहाँ वैसा कोई सक्रिय अभियान नहीं चला रही है और वो कभी-कभी बांग्लादेश को दूसरी जगहों पर अभियान चलाने के लिए एक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

चेतावनी

वैसे सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश में अभी पूरी तरह से आतंकवाद के ख़तरे को ख़त्म हुआ मान लेना सही नहीं होगा.

पिछले सप्ताह, एक अन्य प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी हिज्बुत तहरीर ने राजधानी ढाका में एक जुलूस निकाला जिसके बाद पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ़्तार किया.

विश्लेषकों का कहना है कि समाज में चरमपंथ के पनपने के मूल कारण अभी भी बरक़रार हैं.

वे ग़रीब युवकों के चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के पीछे ग़रीबी और ऊँच-नीच की खाई के चौड़ी होने जैसे कारण गिनाते हैं.

14 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में लगभग आधे लोग ग़रीबी की रेखा के नीचे वास करते हैं.

एक विश्लेषक नूर ख़ान कहते हैं,"ग़रीबी और चरमपंथ का संपर्क साबित हो चुका है और चरमपंथी गुटों के अधिकतर सदस्य ग़रीब परिवारों से लाए जाते हैं."

उनका मानना है कि कड़े क़ानूनों और व्यापक अभियान से चरमपंथी गतिविधियों पर रोक नहीं लग सकेगी.

नूर ख़ान ने कहा,"चरमपंथ पर लगाम लगाने के लिए जड़ पर चोट करनी होगी – पहले ग़रीबी से लड़कर और फिर मदरसों के पाठ्यक्रम को बदलकर."