श्रीलंका को यूएन की चेतावनी

श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ दूत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह गृहयुद्ध के घावों को भरने की दिशा में काम नहीं करेगी तो देश के भविष्य को ख़तरे में डालेगी.
संयुक्त राष्ट्र के दूत लिन पॉस्को ने कहा है कि तमिल विद्रोहियों से हुए संघर्ष के दौरान मानवाधिकार हनन के जो आरोप लगे हैं उनकी ओर भी ध्यान देना होगा.
उन्होंने तमिलों को शरणार्थी कैंपों से घर लौटने की इजाज़त देने की बात भी कही है.
लिन पॉस्को से राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि वे उम्मीद करते हैं कि नवंबर तक 70 प्रतिशत लोगों का पुनर्वास हो जाएगा और शेष का जनवरी तक.
समय सीमा
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई के दौरान विस्थापित हुए ढाई लाख से ज्यादा लोगों के पुनर्वास की समय सीमा की घोषणा की है.
उन्होंने कहा है कि शरणार्थी अगले साल जनवरी तक अपने घरों को लौट सकेंगे.
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी शिविरों मे रह रहे इन शरणार्थियों को दिन में काम करने के लिए जल्दी ही पास दिये जाएंगे ताकि वे अपनी नौकरियों पर लौट सकें.

श्रीलंका के आम लोगों समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन शरणार्थियों को लेकर चिंतित है.
राजपक्षे ने सयुंक्त राष्ट्र के विशेष दूत से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन शरणार्थियों के पुनर्वास का लक्ष्य 2010 जनवरी तक हासिल कर लिया जाएगा.
एक सरकारी वेबसाईट पर जारी किये एक वक्तव्य के अनुसार इनमें से 70 प्रतिशत इस साल नवंबर तक ही अपने घरों को लौट सकेंगे लेकिन बीबीसी के श्रीलंका संवाददाता के अनुसार ये बहुत ही लंबी प्रक्रिया होगी.
सयुंक्त राष्ट्र के आकंड़ों के अनुसार 2 लाख 65 हज़ार लोग अब भी सरकारी कैंपों मे रह रहे हैं.
आशंका
पहली बार राष्ट्रपति ने ऐसे प्रबंधों की घोषणा की है जिनके अनुसार विस्थापित हुए नागरिक काम कर सकेंगे या अपनी पुरानी नौकरियों पर लौट सकेंगे.
हालांकि खुद राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों को आशंका है कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिये ज्यादा लोग सामने नहीं आएंगे.
इससे पहले सरकार ने इन शरणार्थियों के रिश्तेदारों के सामने प्रस्ताव रखा था कि वे अपने सगे संबंधियों को अपने घरों में शरण दें लेकिन ये योजना ज़्यादा प्रभावशाली साबित नहीं हुई.
इसी बीच सयुंक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि एक हफ़्ते पहले जिन शरणार्थियों को कैंप छोड़ने की इजाज़त दी गई थी, उन्हे वास्तव में फिर से अपने घरों के पास अस्थाई कैंपों में रखा गया है.
इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है कि उन्हे इन शिविरों में कब तक रखा जाएगा. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इन शरणार्थियों की अतिरिक्त सुरक्षा जांच की जा रही है और सरकार की ओर से उन्हें फिलहाल छोड़ने के आदेश नहीं दिये गये हैं.












