एलन मस्क से क्यों भिड़े यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की

सोमवार को टेस्ला और स्पेसएक्स के फ़ाउंडर एलन मस्क के एक के बाद एक किए गए ट्वीट्स ने विवाद खड़ा कर दिया.

मस्क ने रूस-यूक्रेन के बीच शांति क़ायम करने के लिए एक प्लान सुझाया, जिसे लेकर उनकी ख़ूब आलोचना हो रही है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी एक ट्वीट के ज़रिए मस्क पर पलटवार किया है.

ये विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार को एलन मस्क ने ट्वीट करते हुए लिखा- यूक्रेन-रूस शांति

  • रूस के कब्ज़े वाले यूक्रेन के हिस्से में जनमत संग्रह संयुक्त राष्ट्र की देख-रेख में फिर किया जाए
  • क्राइमिया रूस का आधिकारिक हिस्सा है, जो साल 1783 से रहा है
  • क्राइमिया में पानी की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाए
  • यूक्रेन निष्पक्ष बना रहे

इस ट्वीट के साथ ही मस्क ने एक ट्विटर पोल साझा किया और सोशल मीडिया यूज़र्स से इस पर वोट करने को कहा.

अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, "काफ़ी हद तक संभव है कि इस युद्ध का भी यहीं अंत होगा. सवाल है कि कितने लोगों की जान इस नतीजे तक पहुँचने से पहले जाएगी. यह भी ध्यान देने योग्य है कि इसका एक संभावित परिणाम परमाणु युद्ध हो सकता है."

इसके बाद मस्क ने एक और ट्विटर पोल शेयर किया जिसमें लिखा, "चलिए इसके लिए कोशिश करते हैं: डोनबास और क्राइमिया में रहने वाले लोगों की इच्छा से तय होना चाहिए कि वह रूस के साथ रहना चाहते हैं या यूक्रेन के साथ."

एलन मस्क के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने ट्विटर पर पोल शेयर करते हुए लिखा, "आपको कौन से एलन मस्क पसंद है? "

इसके लिए उन्होंने दो विकल्प दिए- वह एलन मस्क जो यूक्रेन का समर्थन करता है या वह जो रूस का समर्थन करता है?

जर्मनी में यूक्रेन के राजदूत ने एलन मस्क के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मेरा मस्क के लिए एक बेहद कूटनीतिक जवाब है, भाड़ में जाओ!''

एलन मस्क के ट्वीट पर लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानस नौसियाडा ने लिखा, "प्रिय एलन मस्क, जब कोई आपके टेस्ला के पहियों को चुराने की कोशिश करता है, तो यह उन्हें कार या पहियों का क़ानूनी मालिक नहीं बनाता है. भले ही उनका दावा है कि दोनों ने इसके पक्ष में मतदान किया."

जब मस्क के ट्वीट पर विवाद बढ़ा तो एक यूज़र को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "अगर आपको लगता है कि मैं मशहूर होना चाहता हूँ,तो लगे, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं. मुझे परवाह है, उन लाखों लोगों की जिनकी जान जा रही है और परमाणु युद्ध की."

यूक्रेन की एक पत्रकार अंतास्तासिया लेपेटिना ने मस्क से सवाल पूछते हुए लिखा, "रूस के कब्ज़े के कारण लाखों यूक्रेनियों को डोनबास और क्राइमिया से भागना पड़ा. फिर रूस ने उन क्षेत्रों को सैकड़ों हज़ारों रुसियों से भर दिया. क्या यह आपको निष्पक्ष मतदान लगता है?"

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने और अपनी सेना को मज़बूत करने के लिए आंशिक लामबंदी का एलान करने और परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी देने के बाद यूक्रेन से बातचीत करने का आह्वान किया है

लेकिन ज़ेलेंस्की ने कहा है कि जब तक पुतिन नेता बने रहेंगे, वह रूस के साथ कभी बातचीत नहीं करेंगे.

रेड स्क्वेयर पर एक होर्डिंग में उन चार इलाक़ों के नाम लगाए गए हैं, जिन्हें औपचारिक तौर पर रूस ने अपने देश में मिला लिया है.

रूस का विवादित जनमत संग्रह

इस साल फ़रवरी में रूस ने यूक्रेन हमला किया था. लगभग सात महीनों से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है.

बीते सप्ताह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक हस्ताक्षर समारोह के दौरान औपचारिक रूप से यूक्रेन के चार इलाकों का अपने देश में विलय कर लिय़ा. यह फ़ैसला इन चार इलाक़ों में रूस के अपनी तरह के जनमत संग्रह के नतीजों के बाद लिया गया.

यूक्रेन समेत पश्चिम के देश इस 'जनमत संग्रह को दिखावा' बताते हुए इसे यूक्रेन की ज़मीन हड़पने का एक बहाना बता रहे हैं.

रूस समर्थित अधिकारियों ने पहले यह दावा किया कि पांच दिनों तक चले इस जनमत संग्रह को लोगों का बड़ा समर्थन मिला है.

जनमत संग्रह पर तथाकथित मतदान पूर्व के लुहांस्क, दोनेत्स्क और दक्षिण के ज़ापोरिज़्ज़िया, खेरसोन में करवाए गए.

इससे पहले रूस ने क्राइमिया को 18 मार्च, 2014 को औपचारिक रूप से अपने में मिला लिया था. क्राइमिया के उस क़ब्ज़े को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कभी स्वीकृति नहीं मिली.

अमेरिका, यूरोपीय संघ करेंगे कार्रवाई

यूक्रेन के चार इलाक़ों में जनमत संग्रह कराने को लेकर अमेरिका रूस पर नए प्रतिबंध लगाएगा. वहीं यूरोपीय संघ के सदस्य भी नई कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं, इसमें वहाँ जो भी मतदान में शामिल हुआ है, उस पर प्रतिबंध लगाने को भी जोड़ा जाएगा.

अमेरिका ने कहा है कि वह रूस के इस तथाकथित जनमत संग्रह को कभी मान्यता नहीं देगा.

वहीं जर्मनी की विदेश मंत्री अनालेना बायेरबॉक ने कहा था कि इस जनमत संग्रह के लिए यूक्रेन के क़ब्ज़ा किए गए इलाकों के लोगों को उनके घरों और दफ़्तरों से डरा धमका कर और कुछ को तो बंदूक की नोक पर लाया गया.

उन्होंने कहा, "ये स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के उलट है. और ये शांति के विरूद्ध भी है. ये एक तानाशाही वाली शांति है."

जनमत-संग्रह केवल कुछ दिनों के नोटिस पर 23 सितंबर को यूक्रेन के 15 फ़ीसद इलाकों में शुरू किया गया था. रूस की सरकारी मीडिया ने तर्क दिया था कि हथियारबंद सैन्यकर्मियों का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से किया गया था. लेकिन ये स्पष्ट था कि इसने वहां के निवासियों को धमकाने का काम किया.

पुतिन की धमकी

22 सितंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में मौजूद अपनी सेना को मज़बूत करने के लिए तीन लाख रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने का एलान किया था. व्लादिमीर पुतिन ने एक संबोधन करते हुए पश्चिम के ताक़तवर देशों पर आरोप लगाया कि वो रूस के 'टुकड़े-टुकड़े' करने की लगातार धमकियां दे रहे हैं.

उन्होंने नेटो को चेतावनी देते हुए कहा कि परमाणु क्षमता से लैस रूस पश्चिम के किसी भी 'परमाणु ब्लैकमेल' से निपटने के लिए अपने शस्त्रागार में मौजूद किसी भी हथियार का उपयोग कर सकता है.

पुतिन के बयान के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा. ज़ेलेंस्की ने जर्मनी के बिल्ड न्यूज़पेपर के टीवी स्टेशन से कहा, "मुझे नहीं लगता कि वो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करेंगे. मुझे नहीं लगता कि दुनिया उन्हें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत देगी."

उन्होंने कहा था, "कल पुतिन कह सकते हैं कि यूक्रेन के साथ वो पोलैंड को अपना हिस्सा बनाना चाहते हैं, ऐसा न होने पर वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेंगे. तो क्या हम इसे मान जाएंगे."

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