अमित शाह से मिलने वाले जूनियर एनटीआर को लोग क्यों बता रहे हैं तेलंगाना का भावी सीएम - सोशल

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अमित शाह ने रविवार को तेलुगू सुपरस्टार जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा है.
भारत में यह टॉप-ट्विटर ट्रेंड बना हुआ है. #AmitShahWithNTR हैशटैग से अभी तक 219 हज़ार ट्वीट हो चुके हैं.
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ख़ुद अमित शाह ने सात घंटे पहले इस मुलाक़ात की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं. जूनियर एनटीआर के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए अमित शाह के ट्विटर हैंडल से लिखा गया है, "तेलुगू सिनेमा के रत्न और बेहद प्रतिभासाली अभिनेता जूनियर के साथ हैदराबाद में एक बहुत अच्छी मुलाक़ात रही."
आरआरआर के भीमा यानी जूनियर एनटीआर ने भी अमित शाह के साथ मुलाक़ात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है, "आपसे (अमित शाह) मिलना बहुत सुखद रहा और एक अच्छी बातचीत हुई. आपके विनम्र शब्दों के लिए शुक्रिया."
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क्या तेलगांना चुनावों के मद्देनज़र हुई ये मुलाक़ात
जूनियर एनटीआर से अमित शाह की मुलाक़ात को लोग कई नज़रिए से देख रहे हैं. जिनमें से एक वजह तो बेशक तौर पर उनकी फ़िल्म आरआरआर से जुड़ी हुई है, जिसमें उन्होंने आदिवासी नेता भीम का किरदार निभाया था.
बीजेपी के शेड्यूल ट्राइब मोर्चा ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए ट्वीट भी किया है.
बीजेपी के एसटी मोर्चा ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुपरस्टार जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की. जिन्होंने अपनी आख़िरी रिलीज़ हुई फ़िल्म आरआरआर में महान आदिवासी नेता कोमरम भीम का किरदार निभाया था.
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इसके अलावा एक वजह राजनीतिक भी बताई जा रही है.
दरअसल, उत्तर भारत में बीजेपी की लोकप्रियता अपने चरम पर है और अब बीजेपी इसे दक्षिण भारत में भी कायम करने की कोशिश कर रही है. बीजेपी अब दक्षिण भारत में भी वही लोकप्रियता हासिल करने के लिए ज़ोर लगा रही है. इसी क्रम में बीजेपी का सारा ध्यान फिलहाल 'ऑपरेशन-तेलंगाना' पर है.
राज्य में साल 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में लोग जूनियर एनटीआर के साथ अमित शाह की बैठक को लेकर राजनीतिक कयास भी लग रहे हैं.
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डॉ. उज्जवल कुमार ने ट्वीट किया है, "केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तेलंगाना से बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार से मुलाक़ात की."
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राहुल तिवारी नाम के यूज़र ने ट्वीट किया है, "अच्छा इस नीति के तहत फ़तह करने की कोशिश कर रहे हों. नहीं कर पाओगे. कतई नहीं कर पाओगे."
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अनिल शाह ने जूनियर एनटीआर को तेलंगाना का भावी मुख्यमंत्री ही बता दिया है.
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नदीम अहमद ने ट्वीट किया है, "पहले सनी देओल को पार्टी में लिया, अब जूनियर एनटीआर को पार्टी में लेंगे. जैसा कि सभी जानते हैं कि देओल परिवार को राजनीति में रुचि नहीं है लेकिन वे मोदी-शाह के दबाव में राजनीति में आए हैं. वही हाल अब एनटीआर का भी है."
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एक अन्य यूज़र ने ट्वीट किया है, "अमित शाह उनकी ख़्याति को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं."
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जूनियर एनटीआर की राजनीतिक पृष्ठभूमि
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका विस्तार से उल्लेख किया है.
दरअसल, जूनियर एनटीआर तेलुगू देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव के पोते हैं.
जूनियर एनटीआर जिन्होंने साल 2009 के आम चुनावों में टीडीपी के लिए प्रचार किया था, वो फिलहाल राजनीति से दूर हैं. 2009 के बाद से उन्हें कभी भी किसी राजनीति कार्यक्रम में नहीं देखा गया. ना ही उन्हें टीडीपी की किसी बैठक में देखा गया और ना ही टीडीपी के किसी नेता के साथ.
हालांकि उनके पिता नंदामुरी हरिकृष्णा टीडीपी से राज्यसभा सांसद (2008-2013) थे. उनके चाचा भी आंध्र प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं.
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मुलाक़ात के बहाने बॉलीवुड पर भी निशाना
एक ओर जहां कुछ लोग अमित शाह और जूनियर एनटीआर की मुलाक़ात को राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं वहीं कुछ लोग इसे चर्चित बॉलीवुड बनाम दक्षिण भारतीय सिनेमा की तर्ज़ पर भी रखकर कमेंट कर रहे हैं.
दरअसल, बीते कुछ समय से लगातार बॉलीवुड फ़िल्मों की तुलना साउथ के सिनेमा से की जा रही है. बॉलीवुड की फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं और साउथ की फ़िल्में उत्तर भारत में भी कमाल कर रही हैं, इसलिए ये तुलना और व्यापक हो रखी है.
एक ट्विटर यूज़र ने अमित शाह और जूनियर एनटीआर की मुलाक़ात की फ़ोटो पर कमेंट करते हुए लिखा है, "बॉस ऑफ़ पॉलिटिक्स मीट्स बॉस ऑफ़ बॉक्स ऑफ़िस."
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एक यूज़र ने लिखा है कि क्या अमित शाह ने भी #BoycottBollywood गैंग ज्वाइन कर लिया है?
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राजेश साहू नाम के यूज़र ने लिखा है, "दक्षिण भारतीय सिनेमा का क्रेज़ बढ़ता ही जा रहा है. वहीं दूसरी ओर आज अमित साह ने जूनियर एनटीआर से मुलाक़ात की है. यह बॉलीवुड के लिए एक चेतावनी है."
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ट्विटर पर लोग जूनियर एनटीआर को सबसे बड़ा मास-हीरो बता रहे हैं.
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आरआरआर के किरदार ने दी बड़ी पहचान
एसएस राजमौली की फ़िल्म RRR इस साल रिलीज़ हुई फ़िल्मों में से एक सबसे सफल फ़िल्म है. सिनेमाघरों में झंडे गाड़ने के बाद फ़िल्म ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स पर भी टॉप-10 लिस्ट में हैं.

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फ़िल्म में दो मुख्य किरदार हैं, जिनमें से एक रामचरण तेजा ने निभाया है और दूसरा जूनियर एनटीआर ने.
जूनियर एनटीआर ने तेलंगाना के कुमारम भीम का किरदार निभाया है और रामचरण ने 'मनयम के नायक' और आंध्र प्रदेश के रहने वाले अल्लुरी सीतारामा राजू का.

कौन थे कुमारम भीम
कुमारम भीम, 22 अक्टूबर 1902 को संकेपल्ली गांव के एक गोंड आदिवासी परिवार में पैदा हुए थे. उनके पिता का नाम कुमारम चिमना था.
18वीं और 19वीं सदी में आदिवासियों को नई तरह की मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था. जंगलों के संरक्षण के क़ानून के नाम पर आदिवासियों की ज़मीनें और खेत उनसे छीने जा रहे थे.
उस वक़्त हैदराबाद रियासत में निज़ाम की हुकूमत कुछ इस तरह थी कि एक तरफ़ तो निज़ाम के रज़ाकार जनता का शोषण करते थे, और दूसरी तरफ़ लोगों को अंग्रेज़ों के दमन का भी शिकार होना पड़ता था.
ऐसी मुश्किलों का सामना करने वाले गोंड आदिवासियों में कुमारम भीम का परिवार भी शामिल था. जब भीम 15 बरस के थे, तो संकेपल्ली गांव में वन अधिकारियों और कारोबारियों की वजह से उनके परिवार को बहुत परेशानियां उठानी पड़ीं.
अल्लम राजैया और साहू ने अपनी क़िताब 'कोमुरम भीम' में लिखा है कि, "जब भीम के पिता गुज़र गए तो उनका परिवार शूद्रपुर चला गया और वहां उन्होंने खेती शुरू की. फ़सल तैयार हो गई, तो सादिक़ नाम के एक व्यक्ति ने उस ज़मीन पर अपना दावा किया जिस पर भीम का परिवार खेती कर रहा था. उसने दावा किया कि उसके पास ज़मीन के काग़ज़ात हैं. तब भीम ने सादिक़ के सिर पर वार किया. उसके बाद वहां हंगामा मच गया और भीम भागकर असम चले गए. वो वहां के चाय बाग़ान में मज़दूरी करने लगे. वहीं पर भीम ने पढ़ना-लिखना सीखा और राजनीति और बग़ावत के बारे में पढ़ा."
भीम ने असम के मज़दूरों की बग़ावत में भी शिरकत की. उन्हें असम पुलिस ने भी हिरासत में लिया था. मगर भीम, असम पुलिस को चकमा देकर भाग निकले और आसिफ़ाबाद के क़रीब कंकनघाट जा पहुंचे. वहां वो लच्छू पटेल की शागिर्दी में काम करने लगे. बाद में भीम ने सोम बाई से शादी कर ली.

जंगल के अधिकारों के लिए संघर्ष
इधर भीम के चाचाओं ने अन्य आदिवासियों के साथ मिलकर बाबेझारी के पास बारह गांवों के जंगल साफ़ किए और वहां खेती करने लगे. इसके बाद उन पर ज़ुल्म शुरू हो गए, पुलिस ने उनके गांवों को तहस-नहस कर दिया.
तब इन बारह गांवों की तरफ़ से प्रशासन से बात करने के लिए भीम को नेता चुना गया. भीम और बाक़ी आदिवासियों को रोज़-रोज़ सरकारी अधिकारियों के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ता था. वो अपनी ही बोई हुई फ़सल नहीं काट पाते थे. उनका कहना था कि जंगलों पर उनके हक़ छीने जा रहे थे.
इन सबसे खीझकर भीम ने इन बारह गांवों के आदिवासियों को एकजुट करने का आंदोलन छेड़ दिया. सबसे अहम बात ये है कि भीम का कहना था कि जंगलों, वहां की ज़मीनों और नदियों के पानी पर आदिवासियों का हक़ होना चाहिए.

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इसके लिए भीम ने, 'जल, जंगल और ज़मीन' का नारा दिया. आदिवासियों ने भीम के नेतृत्व में इन संसाधनों पर अपना हक़ हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया.
भीम ने नारा दिया- 'मावा नाते मावा राज', यानी 'हमारी ज़मीन पर हमारी सरकार'.

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आरआरआर के फ़र्स्ट लुक पर बीजेपी ने जताया था एतराज़
फ़िल्म के रिलीज़ से पहले बीजेपी ने उसके फ़र्स्ट लुक को लेकर आपत्ति जताई थी. बीजेपी ने भीम के किरदार के री-प्रेज़ेटेंशन को लेकर आपत्ति जताई थी और थिएटर जलाने तक की धमकियां भी दी थीं.
तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष बंदी संजय ने जनजातियों की भावना को आहत करने का आरोप लगाया था.
फ़िल्म के कुछ दृश्यों में भीम के किरदार को मुसलमान दिखाया गया है, जो एक खास किस्म की टोपी पहनता है. इसी को लेकर तेलंगाना बीजेपी ने रोष ज़ाहिर किया था.

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ऑस्कर के लिए भेजे जाने को लेकर भी चर्चा में है आरआरआर
सोशल मीडिया पर लोग इस पर बहस करते नज़र आते हैं कि दक्षिण की फ़िल्में देश भर में अच्छी कमाई कर रही हैं जबकि बॉलीवुड की फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर औंधे मुंह गिर रही हैं.
अब इस बहस में फ़िल्म निर्माता अनुराग कश्यप के 'लोगों के पास पैसे नहीं हैं' वाले बयान और 'ऑस्कर' वाले बयान ने चर्चा को एक अलग दिशा दे दी है.
उन्होंने 'बॉलीवुड नाउ' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "आपको क्या मालूम है कि साउथ की कितनी फ़िल्में नहीं चल रही हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों के पास पैसे नहीं हैं ख़र्च करने के लिए.''
वहीं, गलाटा प्लस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ऑस्कर पर भी बात की. उन्होंने इस इंटरव्यू में 'द कश्मीर फ़ाइल्स' के बारे में जो कहा उस पर फ़िल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की प्रतिक्रिया भी आई है.
अनुराग कश्यप ने गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में ऑस्कर में फ़िल्म भेजे जाने के बारे में कहा, ''पश्चिम में लोग आरआरआर को अलग तरह से देखते हैं और उन्हें यह फ़िल्म काफी पसंद आई. अगर आरआरआर को चुना जाता है तो 99 प्रतिशत इस बात की संभावना है कि इसका चयन अकेडमी अवॉर्ड के लिए हो."
उन्होंने कहा, ''आरआरआर ने हॉलीवुड की दुनिया में ऐसा प्रभाव पैदा किया है कि अगर हम आरआरआर का चयन करते हैं तो भारत को अंतिम पांच फ़िल्मों में नामांकन में जगह मिल सकती है. हालांकि, मुझे नहीं पता कि किसका चयन होगा, कहीं 'कश्मीर फ़ाइल्स' को न चुन लें.''
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