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ज़ोमैटो की 10 मिनट में डिलीवरी सुविधा को लेकर क्यों हुआ बवाल- सोशल
ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ज़ोमैटो ने अपने ग्राहकों को 10 मिनट में खाना पहुँचाने की सुविधा देने की घोषणा की है. लेकिन, ये घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर कई लोग कंपनी को ट्रोल करने लगे.
लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर खाना पहुंचाने की इतनी जल्दी क्यों है. उनका कहना था कि इससे खाना बनाने को लेकर जल्दबाजी होगी और डिलीवरी करने वाले पर दबाव बढ़ेगा. हालांकि, कंपनी ने इसे लेकर सफ़ाई भी दी है.
ज़ोमैटो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और संस्थापक दीपिंदर गोयल ने सोमवार को एक ट्वीट किया था कि उनकी कंपनी इंस्टेंट डिलीवरी सेवा शुरू करने जा रही है और अब ग्राहकों को 10 मिनट के अंदर उनका पसंदीदा खाना मिल सकेगा.
ज़ोमैटो की इस घोषणा पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि इससे डिलीवरी करने वाले पर दबाव बनेगा और उसकी सुरक्षा प्रभावित होगी.
कार्ति चिदंबरम ने ट्वीट किया, "ये बेतुका है. इससे डिलीवरी करने वाले उन लोगों पर दबाव बनेगा, जो इनके कर्मचारी भी नहीं हैं. मैंने इस मुद्दे को संसद में उठाया है और इस बारे में सरकार को पत्र भी लिखा है."
कार्ति चिदंबरम ज़ोमैटो की घोषणा से पहले भी जल्दी से जल्दी डिलीवरी करने जैसी सुविधाओं से कमर्चारियों पर पड़ने वाले दबाव का मुद्दा संसद में उठाया था.
उन्होंने कहा था, "इनके लिए किसी भी तरह की सुरक्षा का बंदोबस्त नहीं है. इस बात की भी जानकारी नहीं हैं कि जिन दोपहियों का इस्तेमाल हो रहा है क्या वो डिलीवरी के लायक हैं भी या नहीं. बीमा कंपनी भी किसी भी हादसे के मामले में मुआवज़ा देने से इनकार कर देती है."
कार्ति चिदंबरम ने संसद का ये वीडियो अपने ट्वीटर हैंडल पर फिर से शेयर किया है.
ज़ोमैटो का जवाब
सीईओ दीपिंदर गोयल ने भी लोगों के सवालों का जवाब दिया है और 10 मिनट डिलीवरी को सुरक्षित बताया है.
दीपिंदर गोयल ने ट्वीट किया, ''मैं आपको समझाना चाहता हूं कि कैसे 10 मिनट की डिलीवरी भी उसी तरह सुरक्षित है जितनी कि आधे घंटे की डिलीवरी.''
उन्होंने बताया, "देर से होने वाली डिलीवरी के लिए कोई पेनल्टी नहीं होगी और न ही समय पर डिलीवरी के लिए किसी तरह का प्रोत्साहन. हम कुछ विशेष जगहों में नए फूड स्टेशन बना रहे हैं जहां पर 10 मिनट की डिलीवरी सेवा उपलब्ध होगी."
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग
ज़ोमैटो की इस घोषणा को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी को ट्रोल करना शुरू कर दिया.
लेखक और अभिनेता सुहेल सेठ ने ट्वीट किया, "10 मिनट डिलीवरी अनावश्यक और ख़तरनाक है. इससे न सिर्फ़ डिलीवरी पार्टनर्स को बल्कि सड़कों पर मौजूद लोगों को भी ख़तरा हो सकता है इसलिए इस कदम को टाल देना चाहिए. किसी को भी इतनी जल्दी नहीं है, न ही कोई इतना बेवकूफ है कि वो 10 मिनट पहले तय करे कि उसे क्या खाना है."
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट जीतेन जैन ने लिखा, "एक ग्राहक के रूप में 10 मिनट बहुत अच्छा है. लेकिन निश्चित रूप से ये आपके डिलीवरी स्टाफ़ को लापरवाह बना देगा और परेशान कर देगा. हमारे दरवाजे पर स्वादिष्ट भोजन के लिए हम 30 मिनट का इंतज़ार कर सकते हैं."
एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, "उन्होंने साफ़-साफ़ लिखा है कि डिलीवरी पार्टनर्स को ये नहीं बताया जाएगा कि डिलीवरी 10 मिनट में होनी चाहिए. अगर डिलीवरी में ज़्यादा समय लग जाए तो उन्हें सज़ा भी नहीं दी जाएगी इसलिए डिलीवरी पार्टनर पर किसी तरह का दबाव नहीं होगा. उनकी बात बिल्कुल सही है कि लोगों को अब जल्द से जल्द डिलीवरी चाहिए और अगर वो ये काम नहीं करेंगे तो कोई और ज़रूर करेगा."
पत्रकार अभिजीत मजूमदार लिखते हैं, "ज़ोमैटो की 10 मिनट डिलीवरी बहुत सारे स्तरों पर गलत है. 10 मिनट में ताज़ा और स्वादिष्ट खाना आखिर कैसे बनेगा, पैक होगा और फिर हम तक पहुंचाया भी जाएगा? हमारे खुद की रसोई में भी ये करना मुश्किल है."
कुछ लोगों ने ज़ोमैटो के इस कदम पर चुटकी भी ली. ट्विटर हैंडल ट्रेनडुलकर ने ज़ोमैटो को टैग करते हुए लिखा, "10 मिनट का डिलीवरी समय तो बहुत ज़्यादा है. मुझे मेरा खाना ऑर्डर करने से पहले ही चाहिए."
आलोचना के साथ-साथ ट्विटर पर लोगों ने मीम भी साझा किए. ट्विटर यूज़र टीना गुरनाने एक अधूरे सैंडविच की तस्वीर शेयर करते हुए लिखती हैं कि 10 मिनट में ज़ोमैटो ऐसा ही खाना देगा.
कुछ ऐसे मीम भी नज़र आए जो 10 मिनट डिलीवरी सेवा को मैगी के 2 मिनट नूडल से भी जोड़ रहे हैं.
इन्हें लेकर कंपनी के सीईओ दीपिंदर गोयल ने ट्वीट करते हुए कहा, "हां, हम आपको अपने 10 मिनट वाले फूड स्टेशन में मैगी भी परोसेंगे."
भारत की सबसे बड़े फूड टेक कंपनियों में से एक ज़ोमैटो जुलाई 2021 में अपने 120 करोड़ डॉलर के आईपीओ के साथ शेयर बाज़ार से जुड़ी थी.
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