कंगना मामले में बोले शरद पवार-अनावश्यक कार्रवाई से बोलने का मौका मिला

पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अभिनेत्री कंगना रनौत के बयानों को बेवजह इतना महत्व दिया जा रहा है.

उन्होंने कंगना रनौत के दफ़्तर में की गई मुंबई महानगरपालिका की कार्रवाई पर कहा है कि मुंबई में ऐसे बहुत सारे ग़ैर-क़ानूनी निर्माण हैं मगर 'ऐसी अनावश्यक कार्रवाई करने से उन्हें (कंगना) बोलने का मौक़ा मिल गया'.

उन्होंने बिना कंगना रनौत का नाम लिए मुंबई में पत्रकारों से कहा,"हम उन लोगों को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व दे रहे हैं जो ऐसे बयान देते रहते हैं. हमें देखना चाहिए कि इन बयानों से आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है."

शरद पवार ने कहा कि 'मुझे नहीं लगता लोग ऐसे लोगों के बयानों को गंभीरता से लेते हैं'.

एनसीपी प्रमुख पवार ने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई के लोगों को ये समझने का बरसों लंबा अनुभव है कि इस राज्य और शहर की पुलिस कैसे काम करती है.

उन्होंने कहा,"पुलिस कैसा काम करती है, ये लोगों को पता है, इसलिए हमें इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि कौन क्या कहता है."

वहीं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडनवीस ने भी कंगना के दफ़्तर पर कार्रवाई की आलोचना की है.

उन्होंने कहा,"अगर अवैध कंस्ट्रक्शन है तो ज़रूर कार्रवाई होनी चाहिए. किसी ने आपके खिलाफ़ बात कही इसलिए अगर आप तब कार्रवाई करते हो तो ये कायरता है, बदले की भावना है और महाराष्ट्र में इस तरह की भावना का कोई सम्मान नहीं हो सकता."

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी कंगना रनौत के बंगले के एक हिस्से में तोड़-फोड़ की निंदा करते हुए कहा है कि उन्हें अपने क्षेत्र में काम करने के लिए "उचित माहौलॅ" दिया जाना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मिलिंद देवरा ने बिना कंगना प्रकरण का नाम लिए लिखा है, "देश की आर्थिक राजधानी का बाशिंदा होने के नाते यहाँ का हाल देख व्यथित हूँ. महाराष्ट्र कोविड-19 का केंद्र है. उसपर ध्यान देने की जगह, हम राजनीतिक खेल में लगे हैं."

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

कंगना रनौत के दफ़्तर को गिराने की मुंबई महानगरपालिका की कार्रवाई पर सोशल मीडिया में भी कई लोगों ने प्रतिक्रियाएँ दी हैं.

इस मुद्दे पर ट्विटर पर लोग अपने-अपने तरीके से राय रख रहे हैं.

पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा है कि दोनों तरफ़ से राजनीति हो रही है और यहां इंसाफ की बात करना बेवकूफ़ी है.

वहीं, ओडिशा सरकार में अधिकारी अरूण बोथरा ने लिखा है कि अगर रिया चक्रवर्ती के लिए आंसू बहाए तो कंगना पर हंसना एंजेडा है.

उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने लिखा है कि ये कार्रवाई महिला विरोधी है.

लेखक अशोक कुमार पांडे ने लिखा है कि जो कंगना ने कहा वो उत्तर प्रदेश के लिए कोई बोलकर दिखाए तब पता चलेगा.

कांग्रेस नेता उदित राज ने लिखा है कि कोर्ट ने कंगना के मामले में तो मिनटों में समय दे दिया लेकिन मज़दूरों के लिए वक्त नहीं है.

एक्टिविस्ट अर्जुन महर ने याद दिलाया है कि जब लाखों आदिवासियों के घर तोड़े गए और उन्हें जंगलों से विस्थापित किया, तब आम जनता चुप रही.

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