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मैं मुसलमान, मेरी पत्नी हिंदू और बच्चे हिन्दुस्तान हैं: शाहरुख़ ख़ान
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने हाल में एक टेलीविज़न शो में कहा कि उनके परिवार में धर्म को लेकर कभी कोई चर्चा नहीं होती.
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले एक डांस रियलिटी शो डांस प्लस में उन्होंने कहा, "हमारे परिवार में हमने कभी हिंदू मुसलमान की कोई बात ही नहीं की. मेरी बीवी हिंदू हैं, मैं मुसलमान हूं और मेरे जो बच्चे हैं वो हिन्दुस्तान हैं."
बीते शनिवार रात प्रसारित इस शो में शाहरुख़ ने बतौर गेस्ट शिरकत की थी. शो के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "कई बार, जब वो स्कूल गए तो, स्कूल में भरना पड़ता है कि धर्म क्या है. जब मेरी बेटी छोटी थी तो उसने आकर मुझसे पूछा एक बार कि हम कौन से धर्म के हैं. तो मैंने उसमें लिखा कि हम इंडियन हैं. कोई धर्म नहीं है और होना भी नहीं चाहिए."
उनके इस बयान के लिए सोशल मीडिया में उनकी काफी तारीफ़ हो रही है.
कई लोग उनके बयान को देश को गौरवान्वित करने वाला कह रहे हैं जबकि कई नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और एनआरसी पर उनकी चुप्पी के लिए उनकी निंदा भी कर रहे हैं.
नरेश नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "हमें गर्व है, हम सब भारतीय है और इससे अधिक गर्व की कोई बात हो ही नहीं सकती."
शैलभ नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "हिन्दुस्तान को शाहरुख़ ख़ान बेहतरीन तरीके से समझाया."
पूर्वी ने शाहरुख़ ख़ान के बयान को "दिल छू लेने वाला" बताया.
भावनिधि ने लिखा, "अब तक मैंने जो कुछ सुना है उनमें ये कुछ वाक्य सबसे खूबसूरत हैं."
मानसी शर्मा ने लिखा, "आज के मुश्किल वक्त में जब इतना कुछ हो रहा है, शाहरुख़ ख़ान का बयान सूकून देता है. भारतीय होने से बेहतर कुछ और नहीं है."
एक व्यक्ति ने इसी वीडियो के जवाब में शाहरुख़ से पूछा कि ऐसा है तो बच्चों के मुसलमान नाम क्यों रखे. इसका जवाब एक अन्य ट्विटर यूज़र ने कहते हुए दिया कि "सुहाना मुस्लिम नाम है, आर्यन हिंदू नाम है और अबराम में अब्दुल्लाह और राम के नाम को जोड़ कर बनाया गया है."
इस पर रानी नाम की एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है, "बच्चों के नाम ऐसे रखे हैं जो दो धर्मों को मिलाते हों."
अंकुर अग्रवाल लिखते हैं, "शाहरुख़ भारत का गौरव हैं लेकिन सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे विरोध के बीच वो चुप्पी साधे हैं. जब वो ट्विटर पर लोगों के सवालों के जवाब दे रहे थे लोगों ने उनसे इस बारे में पूछा भी थी, लेकिन उन्होंने चुप रहना ही बेहतर समझा."
इशाक़ सिद्दिक़ी ने लिखा, "अच्छा है कि आप कुछ न बोल कर भी एनआरसी के मुद्दे पर रोशनी डाल रहे हो. बोलना या नहीं बोलना आपकी इच्छा है. लेकिन इससे फायदा होगा और लोगों के सामने सीएए, एनआरसी का सच आएगा."
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