इमरान ख़ान ने यूपी पुलिस का बताकर ट्वीट किया बांग्लादेश का वीडियो

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
सोशल मीडिया पर ग़लत संदर्भ के साथ एक पुराना वीडियो पोस्ट करने की वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की आलोचना हो रही है.
शुक्रवार शाम को इमरान ख़ान ने क़रीब दो मिनट का एक वीडियो क्लिप इस दावे के साथ शेयर किया था कि 'भारतीय पुलिस उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के साथ सामूहिक हिंसा कर रही है.'
लेकिन यूपी पुलिस ने तुरंत इमरान ख़ान के इस दावे का खंडन किया और अपने आधिकारिक ट्वीट में लिखा, "ये वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं है, बल्कि मई 2013 में बांग्लादेश के ढाका शहर में हुई किसी घटना का है. वीडियो में दिख रहे सैनिकों की वर्दी पर RAB लिखा है यानी रेपिड एक्शन बटालियन और ये सैनिक बांग्ला में बात कर रहे हैं."

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इमरान ख़ान ने इस वीडियो के अलावा दो अन्य वीडियो भी ट्वीट किये थे. लेकिन दावा ग़लत साबित होने पर इमरान ख़ान ने अपने ट्विटर अकाउंट से तीनों ही वीडियो डिलीट कर दिये.
लेकिन सोशल मीडिया पर अब उनके द्वारा ट्वीट किये गए वीडियो के स्क्रीनशॉट शेयर हो रहे हैं.
50 हज़ार से ज़्यादा ट्वीट इस बारे में किये जा चुके हैं. #ImranKhan और #Bangladesh ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं.
लोग लिख रहे हैं कि ग़लत संदर्भ में वीडियो शेयर करने और अफ़वाहें फ़ैलाने पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शर्म महसूस करनी चाहिए.
कुछ लोगों ने ट्विटर पर इमरान ख़ान का यह कहते हुए मज़ाक उड़ाया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री वॉट्सऐप पर ज़्यादा समय बिता रहे हैं क्योंकि जो वीडियो उन्होंने ट्वीट किया वो वॉट्सऐप पर भी असम और यूपी में पुलिस के अत्याचार का बताकर सर्कुलेट हो रहा है.

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वीडियो की सच्चाई
इमरान ख़ान ने 26 दिसंबर 2019 को भी तेलंगाना में आरएसएस के स्वयंसेवकों के मार्च का एक वीडियो शेयर किया था.
इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कुछ बोलना चाहिए, कहीं आरएसएस के लोग मुसलमानों का नरसंहार ना कर दें.
इमरान ख़ान ने आरएसएस के स्वयंसेवकों के मार्च की तुलना हिटलर की नाज़ी सेना से की थी.
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पोस्ट X समाप्त
इस बार उन्होंने उत्तर प्रदेश का बताकर जो वीडियो शेयर किया था वो दरअसल मई 2013 में बांग्लादेश के ढाका शहर में पुलिस और धार्मिक कट्टरपंथियों के बीच हुई मुठभेड़ का है.
यू-ट्यूब पर भी यह वीडियो कई बार पोस्ट किया जा चुका है. इस वीडियो की सबसे पुरानी पोस्ट सितंबर 2013 में मिलती है.
द गार्जियन और अल-जज़ीरा की पुरानी रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम नाम के एक संगठन से जुड़े क़रीब 20 हज़ार प्रदर्शनकारियों पर सख़्त कार्रवाई की थी जो ढाका शहर में जमा हो गए थे और कट्टर इस्लामिक क़ानून-क़ायदों की माँग कर रहे थे.
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