क्या नौ बैंकों के बंद होने की अफ़वाह आपने भी सुनी? जानें सच

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सुप्रीम कोर्ट के हवाले से सोशल मीडिया पर यह अफ़वाह फ़ैलाई जा रही है कि 'रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया जल्द ही नौ बैंकों को ताला लगाने वाला है.'
सोशल मीडिया पर, ख़ासकर वॉट्सऐप पर यह मैसेज शेयर किया जा रहा है कि 'भारत के केंद्रीय बैंक 'रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया' ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नौ बैंकों को बंद करने का फ़ैसला किया है.
इनमें कॉर्पोरेशन बैंक, यूको बैंक, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, आंध्रा बैंक, इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, देना बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं'.

इस वायरल मैसेज में लिखा है कि 'जिन लोगों के इन बैंकों में खाते हैं, वो जल्द से जल्द अपना पैसा निकाल लें और अन्य लोगों को सूचित करें.'
इस मैसेज की सच्चाई जानने के लिए बुधवार को बीबीसी ने वित्त मंत्रालय और आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की थी.
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर इसे महज़ एक अफ़वाह घोषित किया और कहा कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कमर्शियल बैंकों को बंद किये जाने की बात ग़लत है.
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साथ ही भारत सरकार के वित्त सचिव राजीव कुमार ने भी इस संबंध में एक ट्वीट किया.
उन्होंने लिखा, "सोशल मीडिया पर अफ़वाह चल रही है कि आरबीआई कुछ बैंकों को बंद करने वाला है. ये सवाल ही पैदा नहीं होता कि आरबीआई पब्लिक सेक्टर के बैंकों को बंद करे. बल्कि सरकार नए सुधारों के ज़रिये इन बैंकों को मज़बूती देने की कोशिश कर रही है ताकि ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं दी जा सकें."
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30 अगस्त 2019 को भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक साथ कई बैंकों के विलय की घोषणा की थी.
वित्त मंत्री ने कई अन्य बैंकों के विलय की घोषणा के बीच यह कहा था कि यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का विलय होगा. विलय के बाद यह बैंक शाखाओं के मामले में देश का पाँचवा सबसे बड़ा बैंक होगा.
इन्हीं तीन बैंकों का नाम वायरल मैसेज में भी शामिल है और अफ़वाह फ़ैलाई जा रही है कि ये बैंक बंद होने वाले हैं.
जबकि विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने यह साफ़ कहा था कि 'हम बैंकिंग की दशा, दिशा और गंतव्य बदलने के लिए ये बड़ा फ़ैसला कर रहे हैं'.

पुरानी अफ़वाह
हमने पाया कि साल 2017 में भी इसी मैसेज को सोशल मीडिया पर फैलाया गया था.
फ़ेसबुक पर हमें जुलाई 2017 के कई पोस्ट मिले जिनमें शब्दश: यही दावा किया गया था.


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