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इंशाअल्लाह, भारत कभी हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा: NRC विवाद पर असदुद्दीन ओवैसी
"अगर भारत हिंदुओं की रक्षा नहीं करेगा तो फिर कौन उनकी रक्षा करेगा? पाकिस्तान?..."
"भारत को सभी भारतीयों की रक्षा करनी चाहिए, हिंदुओं की नहीं..."
बुधवार को बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी के बीच ट्विटर पर कुछ ऐसी ही तीखी बहस देखने को मिली.
बहस का मुद्दा था भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में एनआरसी यानी नेशनल सिटिजन्स रजिस्टर. वैसे तो एनआरसी शुरू से ही बहस का विषय रहा है लेकिन ओवैसी और सरमा के बीच ये बहस मंगलवार को शुरू हुई.
दरअसल असम के वित्त मंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि वो एनआरसी की आख़िरी लिस्ट, एनआरसी अध्यक्ष और इसकी पूरी प्रक्रिया से निराश हैं.
उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा, "एनआरसी की प्रक्रिया में साल 1971 से पहले भारत आए कई बांग्लादेशी हिंदुओं को लिस्ट से बाहर कर दिया गया क्योंकि अथॉरिटी ने उनके 'शरणार्थी सर्टिफ़िकेट' को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. नतीजन बांग्लादेश से आए कई वैध हिंदू शरणार्थियों को लिस्ट में जगह नहीं मिली. दूसरी बात ये कि एनआरसी की प्रक्रिया में बहुत से लोगों ने जानकारी में हेरफेर करके लिस्ट में अपनी जगह बना ली."
टीवी पर चल रही इस डिबेट में हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, "जिन हिंदू शरणार्थियों के नाम एनआरसी लिस्ट में होना चाहिए थे और नहीं हैं, असम सरकार फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल और नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए उनकी मदद करेगी."
असदुद्दीन ओवैसी ने इस टीवी डिबेट का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, "ये बिल्कुल स्पष्ट है कि असम में एनआरसी के जरिए मुसलमानों को हटाने की कोशिश की जा रही है. अब हिमंत बिस्वा सरमा कह रहे हैं कि चाहे जैसे भी हो, हिंदुओं को बचाया जाएगा."
इस ट्वीट के जवाब में हिमंत बिस्वा सरमा ने लिखा, "अगर भारत हिंदुओं की रक्षा नहीं करेगा तो कौन करेगा? पाकिस्तान? आपकी मुख़ालफ़त के बावजूद भारत पीड़ित हिंदुओं का घर रहेगा."
इसके जवाब में ओवैसी ने लिखा, "भारत को सभी भारतीयों की रक्षा करनी चाहिए, हिंदुओं की नहीं. 'टू-नेशन थ्योरी' को पूजने वालों को कभी समझ में नहीं आएगा कि यह देश किसी एक धर्म से बहुत, बहुत बड़ा है. संविधान कहता है कि भारत सभी धर्मों, नस्लों और जातियों से समान व्यवहार करेगा. ये हिंदू राष्ट्र नहीं है और इंशाअल्लाह, कभी होगा भी नहीं."
ओवैसी यहीं नहीं रुके. उन्होंने फिर ट्वीट किया, "एक देश के तौर हमने कई पीड़ित समुदायों (हिंदुओं और मुसलमानों) का स्वागत किया है. वो शरणार्थी हैं, संभावित नागरिक नहीं. धर्म कभी नागरिकता का आधार नहीं हो सकता. हमारे पूर्वजों ने इस विचार को तभी ख़ारिज कर दिया था जब उन्होंने संविधान बनाया."
ओवैसी के इस ट्वीट के जवाब में हिमंत बिस्वा सरमा ने लिखा, "भारत एक सभ्यता है, देश नहीं. किसी देश का इतिहास उसके संविधान से शुरू होता है लेकिन किसी सभ्यता की शुरुआत और भी बहुत सी चीज़ों से होती है. भारत एक समृद्ध सभ्यता था और हमेशा रहेगा. भारत हिंदुओं के लिए 5,000 वर्षों से ज़्यादा उनकी मातृभूमि है."
एनआरसी को लेकर भारत में राजनीतिक पार्टियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं. इससे पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वो एनआरसी के आख़िरी नतीजों से न तो ख़ुश हैं और ही पूरी तरह नाख़ुश.
उन्होंने कहा था, "एनआरसी के नतीजों से दुखी होने के कारण हैं. मैं ख़ुश इसलिए हूं कि असम में नागरिकों का रिकॉर्ड है और अब यह असंभव है कि कोई आए और यहां के होने का दावा करे. दूसरी सकारात्मक बात यह है कि असम के अनुभव से बाकी भारत को भी सबक़ मिलेगा."
एनआरसी की आख़िरी लिस्ट में कुल 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है. इस लिस्ट में से 19,06,657 लोग बाहर हैं.
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