सोशल: एक कंपनी लाई अदरक और शहद फ़्लेवर वाला कंडोम

चॉकलेट, वनीला, स्ट्रॉबेरी, कॉफ़ी, अचार के बाद अब हाज़िर है अदरक और शहद.

बात हो रही है कंडोम फ़्लेवर्स की. कंडोम बनाने वाली एक कंपनी ने इस साल सर्दियों में अदरक फ़्लेवर वाला कॉन्डोम बाज़ार में उतारा है.

कंपनी ने इसकी जानकारी अपने फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दी है.

नए फ़्लेवर वाले कंडोम के पैकेट की तस्वीर पोस्ट की है और साथ में लिखा है - साफ़ गले के लिए अदरक और शहद. पेश करते हैं अदरक फ़्लेवर.

इसके साथ ही कुछ और कैप्शन पोस्ट किए गए हैं. जैसे:

  • तो अब सर्दियों में अपनी सुबह की शुरुआत कैसे करना चाहेंगे? अपनी सर्दियों की सुबह को गर्म बनाएं, पसंद आपकी है.
  • अब सर्दियां ज्यादा गर्म और आरामदेह होंगीं. पेश करते हैं अदरक फ़्लेवर्ड कॉन्डोम्स.

ज़ाहिर है सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफ़ी हलचल है. लोग इस बारे में हंसी-मज़ाक भी कर रहे हैं.

वरुण खुल्लर नाम के शख़्स ने ट्विटर पर लिखा, "अब मैं ये सोचकर कंफ़्यूज़ हो रहा हूं कि अदरक के बाद क्या होगा. अदरक-लहसुन का पेस्ट, और फिर अदरक लहसुन का भुना मसाला कॉन्डोम?''

कंपनी भी लोगों के मज़ाक और सवालों का जवाब देने में पीछे नहीं रही. कंपनी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मज़ेदार अंदाज़ में लोगों की उलझनें सुलझाईं.

नीलाद्री ने फ़ेसबुक पर लिखा, "अब अदरक ख़त्म हो जाए तो चिंता की बात नहीं. कटिंग चाय बनाने के लिए दो-तीन अदरक उबाल लें."

इसके जवाब में कंपनी ने लिखा, "कंडोम इस्तेमाल करने के दूसरे बेहतर तरीके भी मौजूद हैं."

किसी ने कंपनी को मुलेठी फ़्लेवर्ड कंडोम तो किसी ने बिरयानी और नींबू फ़्लेवर्ड कॉन्डोम लाने की सलाह दी.

क्या इसका कोई फ़ायदा होगा?

ये तो रही हंसी मज़ाक की बात. लेकिन क्या इन अलग-अलग तरह के फ़्लेवर वाले कॉन्डोम्स से सेक्स लाइफ़ पर कोई असर भी पड़ता है या ये बस ग्राहकों को लुभाने के तरीके हैं?

इस बारे में बीबीसी ने जाने-माने सेक्सॉलजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी से बात की.

डॉ. कोठारी के मुताबिक अलग-अलग तरह के फ़्लेवर लोगों के मन में सेक्स की ख़्वाहिश तो जगा सकते हैं लेकिन इसका सेक्स की अवधि और बाकी सेक्स लाइफ़ पर कोई असर नहीं पड़ता.

उन्होंने कहा, "मिसाल के तौर पर अगर किसी को अदरक और शहद की ख़ुशबू बहुत पसंद है तो अदरक फ़्लेवर्ड कॉन्डोम उसे पार्टनर के करीब आने में मदद करेगा.''

हालांकि डॉ. कोठारी ये भी मानते हैं कि इससे ये तय नहीं होता कि सेक्स कितना अच्छा होगा या कितने वक़्त तक होगा.

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