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सोशल: बार-बार क्यों फंस जाते हैं शशि थरूर?
कांग्रेस नेता शशि थरूर एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं. इस बार भी उन्होंने ट्विटर पर कुछ ऐसा लिख दिया जिसके चलते बवाल मच गया और लोग पचा नहीं पाए.
हालांकि कुछ ट्वीट करना और उसके बाद ट्रोल हो जाना थरूर के लिए नया नहीं है. पर ये होता क्यों है? दरअसल, शशि थरूर का माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर वैरिफ़ाइड अकाउंट है और उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या 6.05 मिलियन है. थरूर अब तक 40.8 हज़ार ट्वीट कर चुके हैं.
इन आंकड़ों से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि थरूर का एक ट्वीट एक ही बार में कितने लोगों तक पहुंचता है. वो पब्लिक फ़िगर हैं ऐसे में एक-एक शब्द पर लोगों की नज़र भी होती है.
ताज़ा मामला मानुषी छिल्लर के नाम के साथ छेड़छाड़ करके उसे 'चिल्लर' बताने का है. 17 साल के इंतज़ार के बाद भारत से विश्व सुंदरी चुनी गई. हरियाणा की मानुषी छिल्लर की इस कामयाबी पर जहां दुनियाभर से बधाई संदेश आए वहीं थरूर के एक ट्वीट पर बवाल मच गया.
उन्होंने ट्वीट किया कि "नोटबंदी से कितनी ग़लती हुई. बीजेपी को समझना चाहिए कि भारत की नकदी दुनिया में श्रेष्ठ है. यहां तक कि हमारे चिल्लर तक को विश्व सुंदरी का खिताब मिल गया."
थरूर को इस ट्वीट के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. अभिनेता अनुपम ख़ेर ने ट्वीट किया कि आपका स्तर इतना कैसे गिर गया?
आलोचनाओं के बाद थरूर ने अपना पक्ष रखा और कहा कि जिन लोगों को मेरे मज़ाकिया ट्वीट से तक़लीफ हुई उनसे माफ़ी चाहता हूं.
वैसे थरूर के लिए ट्विटर ट्रोलिंग नई नहीं है. उन्हें उनके कई ट्वीट्स के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.
थरूर ने 9 अगस्त 2017 को एक ट्वीट किया, ''अब एकमात्र विवाद ये है कि मुग़लई पराठे को अब क्या कहा जाना चाहिए...शिवाजी पराठा या फिर दीनदयाल उपाध्याय पराठा?''
इससे पहले 8 मई, 2017 को थरूर ने एक ऐसा ट्वीट किया जिसका मतलब समझने के लिए न जाने कितने ही लोगों को डिक्शनरी का सहारा लेना पड़ा था.
इसके अलावा साल 2009 में जब यूपीए सरकार ने अपने मंत्रियों से खर्चों में कटौती करने की दरख़्वास्त की थी.
उस व़क्त विदेश राज्य मंत्री के पद पर रहे थरूर ने एक ट्वीट में कहा था कि किफ़ायत बरतने के काम में वे अपने बाक़ी मंत्रियों के साथ हवाई जहाज़ की इकॉनमी क्लास या उनके शब्दों में मवेशी श्रेणी (कैटल क्लास) में यात्रा करने को तैयार हैं.
हालांकि बाद में उन्होंने इसके लिए माफ़ी मांगी और एक ट्वीट में लिखा, "यह एक अनावश्यक प्रयोग है लेकिन इकोनॉमी क्लास में सफ़र करने वालों के अनादर के लिए नहीं इस्तेमाल किया गया था. अर्थ सिर्फ़ उन विमान कंपनियों के लिए था, जो हमें मवेशियों की तरह अंदर धकेल देते हैं. लोग इसका ग़लत अर्थ निकाल रहे हैं."
साथ ही थरूर ने लिखा कि उन्होंने इस घटना से सबक ज़रूर ले लिया है, "मुझे इस बात का अहसास हो रहा है कि मुझे यह नहीं मान लेना चाहिए कि लोग मज़ाक को समझ ही लेंगे. आपको उन लोगों को ऐसे मौक़े नहीं देने चाहिए जिनसे वो मौक़ा पड़ने पर आपके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करें."
थरूर के इस बयान पर काफ़ी शोर मचा था. यहां तक कि उनके इस्तीफ़े की भी मांग की गई थी.