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जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे... समझो कुछ ग़लत है
रयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के बच्चे की हत्या और उसके बाद टैगोर पब्लिक स्कूल में बच्ची के साथ रेप. इन दोनों घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है.
लोग कैंडल मार्च निकाल रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं. घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर भी यह मामला छाया हुआ है.
सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने भी एक कविता के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं.
अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखने वाली रेणुका शहाणे ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय साझा की है.
रेणुका लिखती हैं, 'गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे की हत्या और दिल्ली के टैगोर पब्लिक स्कूल में बच्ची के साथ रेप की घटना से सदमे में हूं.'
रेणुका ने कई सवाल भी उठाए हैं. मसलन, बस के ड्राइवर और कंडक्टर को बच्चों के टॉयलेट का इस्तेमाल करने की इजाज़त क्यों दी गई? कैसे कोई चाकू लेकर स्कूल में दाख़िल हो गया? क्यों नहीं वहां कोई फीमेल अटेंडेंट थी और जब बच्चा चीख रहा था तो मदद के लिए वहां कोई क्यों नही था?
उन्होंने सभी अभिभावकों को एकसाथ आगे आने की भी बात की है ताकि उन सभी दोषियों को सज़ा मिल सके जिन्होंने कुछ भी ऐसा किया है.
रेणुका लिखती है कि देश के हर स्कूल से जहां ऐसी कोई भी घटना हुई है, उसकी एक लिस्ट बनानी चाहिए. इस लिस्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय और शिक्षा विभाग से जुड़ी साइट्स पर डाल देना चाहिए. ताकि हर कोई इन्हें देख सके.
रेणुका के अनुसार, 'बेशक प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया गया है लेकिन ट्रस्टी और चेयरपर्सन का क्या? जब तक उनके ख़िलाफ़ सख़्त कदम नहीं उठाया जाएगा दूसरे स्कूल भी इसे गंभीरता से नहीं लेंगे.'