सोशल: नगर निगम की लड़ाई क्यों हारे केजरीवाल?

दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद वोटों की गिनती शुरू होते ही बीजेपी बढ़त लेती दिख रही थी. धीरे-धीरे साफ हो गया कि बीजेपी को बहुमत मिल रहा है और आम आदमी पार्टी की हालत खराब है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन आने भी शुरू हो गए.

विधानसभा चुनाव में आप ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. कुछ सालों बाद ही पार्टी को एमसीडी चुनाव में मिली इतनी करारी हार भी चौंकाने वाली है.

बीबीसी ने 'कहासुनी' के ज़रिए लोगों से पूछा था कि क्या अरविंद केजरीवाल मतदाताओं का मिजाज भांपने में असफल रहे. इस सवाल के अलग-अलग जवाब आए.

सुहैल अंसारी नाम के ट्विटर यूजर ने कहा,''मुझे लगता है कि आप को निगेटिव कैंपेन नहीं करना चाहिए था. अपने किए हुए कामों और नए वादों के साथ जनता के बीच जाना चाहिए था.''

प्रशांत शुक्ला ने कहा,''पिछले चुनाव में लोग बिजली और पानी के आधे दामों के झांसे में आ गए थे. इस बार लोगों ने प्रतिशोध लिया है.''

राम कृष्ण सिंह कहते ''करप्शन का मुद्दा केजरीवाल के हाथ से जा चुका है. अब मोदी जी को कोई नया मुद्दा देना होगा तभी कांग्रेस और आप जिंदा बचेंगी.''

एक दूसरे ट्विटर यूजर ने कहा,''अगर आप दिन भर दूसरों को कोसते रहेंगे तो लोग तंग हो जाएंगे. केजरीवाल का आक्रामक रवैया मजाक जैसा बन गया था.''

सैयद का कहना है,'जब सारा फैसला ईवीएम को ही करना है तो काम करो न करो, सेटिंग होनी चाहिए.'

उमेशशंकर को लगता है कि आम आदमी पार्टी ने पहली बार एमसीडी चुनाव लड़ा है और केजरीवाल का प्रदर्शन अच्छा रहा है. कुछ लोगों ने ईवीएम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए.

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