अंडरटेकर इतने क्यों ख़ास हैं?

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जिन लोगों ने नब्बे और उसके बाद के दशक में बचपन देखा है उनके लिए रेसलिंग एक खेल से कहीं बढ़कर था.
टेलीविज़न से घंटों चिपके रहना, रेसलरों के कार्ड इकट्ठा करना हो या फिर रेसलिंग वाली गेम्स को जान के ज़्यादा चाहना- ये वो दौर था जब क्रिकेट से ज़्यादा दिलचस्पी बच्चों की रेसलिंग में हुआ करती थी.
और WWF (जो बाद में WWE बना) का हर मैच दिल थामकर देखा जाता था. इस बात से बेख़बर कि रेसलिंग में होने वाली लड़ाई असली नहीं बल्कि मनोरंजन है.
बच्चों को ख़ूब पसंद होती थी रेसलिंग

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केज मैच, लास्ट मैन स्टैंडिंग, स्लेज हैमर या फिर कोई फ़ीचर - हर मुक़ाबला धमाकेदार जिसमें हर बच्चा एक नायक और एक खलनायक चुन लेता था.
उस दौर में एक रेसलर था जिसका हर अंदाज़ रहस्य से भरा था, लेकिन इसके बावजूद उसे ज़्यादातर लोग पसंद करते थे.
रेसलिंग बेल्ट जीतने वाले लड़ाके बदलते रहे, लेकिन इस पहलवान की दीवानगी में ज़रा भी कमी नहीं आई.
क्या ख़ास था अंडरटेकर में?

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अंडरटेकर - नाम ऐसा कि मौत की याद दिला दे. उनके रिंग की तरफ़ बढ़ने पर डराने वाली सिग्नेचर ट्यून बजती थी और अंधेरा उनकी पहचान था.
रेसलर जिस दौर में अपने साथ हसीनाएं रखते थे, अंडरटेकर ताबूत में से निकलते थे. वो विरोधी से पिटकर लेट जाते थे तो दिल बैठ जाते थे. जब अचानक उठकर बैठ जाते थे तो दिल उछल जाते थे.
इसी साल अप्रैल में जब इस शख़्स के रेसलिंग रिंग से विदाई की बारी आई तो वहां बैठा हर प्रशंसक दुखी था. रेसलमेनिया में अंधेरा था, लेकिन मद्धिम रोशनी में भी फ़ैंस की आंखों के आंसू आसानी से देखे जा सकते थे.
आख़िर कौन हैं अंडरटेकर?

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द अंडरटेकर अपने आप में मुक़म्मल पहचान है, लेकिन ये शख़्स कौन है और रिंग से बाहर की दुनिया में किस नाम से पहचाना जाता है, ये जानना भी दिलचस्प रहेगा.
इनका असली नाम मार्क विलियम कैलवे है. साल 1984 में वर्ल्ड क्लास चैम्पियनशिप रेसलिंग से जुड़े कैलवे 1989 में 'मीन मार्क' के रूप में वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग में पहुंचे और वहां से उनका सफ़र 1990 में वर्ल्ड रेसलिंग फ़ेडरेशन पहुंचा.
27 साल गुज़रने के बाद जब अंडरटेकर ने विदा ली तो लोगों ने बताया कि उनका रिंग से जाना कितनी बड़ी बात है. आख़िर यूं ही उन्हें सर्वकालिक प्रोफ़ेशनल रेसलर नहीं माना जाता.
हिंदी फ़िल्मों में भी दिखे

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द अंडरटेकर बने कैलवे का पूरा प्रोफ़ाइल डर पर आधारित था. साल 2000 की शुरुआत में उनके किरदार में ज़रा बदलाव आया जिसमें बाइक की एंट्री हुई. वो बाइक पर सवार होकर रिंग तक आते थे.
लेकिन साल 2004 में वो दोबारा पहले वाले तरीके से आने लगे. WWE में उनके 'सौतेले भाई' केन भी नज़र आए. स्टोरीलाइन में शुरुआत में दोनों के बीच दुश्मनी थी, लेकिन बाद में एक हो गए और मिलकर 'ब्रदर्स ऑफ़ डिस्ट्रक्शन' बनाया.
और उनका जलवा फ़िल्मों में भी दिखा. अक्षय कुमार की फ़िल्म 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' में वो हीरो से लड़ते नज़र आए थे.
यूं तो अंडरटेकर को रेसलमेनिया में लगातार 21 जीतों के लिए याद किया जाता है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी जीत प्रोफ़ेशनल रेसलिंग के दीवानों के दिलों को जीतना है. रिंग को अंडरटेकर की काफ़ी याद आएगी.
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