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योगी सरकार की मुहिम: रोमियो बदनाम हुआ, ओ यूपी तेरे लिए...
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश में इन दिनों 'एंटी रोमियो स्कवेड' काफ़ी सक्रिय हैं. पुलिसवालों के दल तैनात हैं और 'मनचलों' पर शिकंजा कसा जा रहा है.
यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत सिंह के मुताबिक 'एंटी रोमियो दल' दो पुलिसकर्मियों की एक टीम है और ऐसी कई टीमें बनी हैं.
ये स्कूल-कॉलेज, बाज़ार, इंडस्ट्रियल इलाकों में गश्त करेंगी. अगर किसी को छेड़खानी करते देखेंगी तो कार्रवाई करेंगी.
रोमियो शब्द पर सोशल मीडिया में चर्चा
लेकिन इन टीमों को जो नाम दिया गया है, उसमें 'रोमियो' नाम के ज़िक्र पर सोशल मीडिया में काफ़ी सवाल उठ रहे हैं.
कुछ लोग कह रहे हैं कि रोमियो तो आशिक़ था और 'मनचलों' के लिए उसका नाम इस्तेमाल करना ग़लत हैं.
ज़क्का जैकब ने टि्वटर पर लिखा है, ''रोमियो त्रासदी का सामना करने वाला नायक था, जो निस्वार्थ प्रेम के लिए खड़ा हुआ. वो कोई छेड़खानी करने वाला शख़्स नहीं था''
भाजपा संकल्प पत्र में एंटी रोमियो दल
वर्षा सिंह के मुताबिक एंटी-रोमियो दल अच्छा क़दम है लेकिन पहले यूपी के पुलिसकर्मियों को ये बताने की ज़रूरत है कि यहां रोमियो का मतलब मनचलों, पीछा करने वालों और छेड़छाड़ करने वालों से है, ना कि दोस्तों और प्रेमियों से.
मगर ये नाम आया कहां से? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने 'लोक कल्याण संकल्प पत्र-2017' तैयार किया था, ये वहीं से आया है.
इस पत्र में 'सशक्त नारी, समान अधिकार' शीर्षक के तहत 'महिलाओं की सुरक्षा' का ज़िक्र किया गया है.
और इसमें एक बिंदू है, जिसके मुताबिक, ''हर कॉलेज के नज़दीकी पुलिस थाने में छात्राओं के साथ छेड़खानी रोकने के लिए एंटी-रोमियो दल बनाए जाएंगे.''
क्या मनचला था रोमियो?
इसके बाद ज़हन में सवाल आता है कि रोमियो था कौन? रोमियो मोन्टैग्यू, इंग्लैंड के दिग्गज लेखक विलियम शेक्सपियर के क्लासिक उपन्यास 'रोमियो एंड जूलिएट' का मुख्य किरदार है.
मोन्टैग्यू का बेटा रोमियो जूलिएट से मोहब्बत करता है और चोरी-छिपे उससे ब्याह भी रचा लेता है. लेकिन हालात उन दोनों प्रेमियों के ख़िलाफ़ होते हैं.
जूलिएट अपने प्रेमी रोमियो के साथ भागने की योजना के तहत ज़हर पीकर मरने का नाटक करती है. लेकिन रोमियो उसे असल में मृत समझ अपनी जान ले लेता है.
इस नाम पर भाजपा क्या बोली?
जब जूलिएट जागती है तो रोमियो को मरा देख ख़ुदकुशी कर लेती है. और ये प्रेम कहानी यहीं से अमर हो जाती है.
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में 'एंटी रोमियो दल' का नाम इस्तेमाल क्यों किया और इसका क्या मतलब है, इस सवाल का जवाब घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता रमापति राम त्रिपाठी ने दिया.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''एंटी रोमिया दल सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया है. जो मनचले छेड़छाड़ करते हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो.''
'नाम नहीं, उद्देश्य ज़रूरी'
रोमियो नाम कहां से दिमाग में आया, त्रिपाठी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ''इससे संदेश जाए कि इस श्रेणी के लोग सतर्क हों. जिनकी नीयत बुरी है, निशाना उन पर है.''
लेकिन रोमियो तो जूलिएट से प्यार करता है, वो मनचला कहां था, इस पर त्रिपाठी ने कहा, ''प्यार दोनों तरफ़ से होता है और जो एक तरफ़ा होता है वो बलपूर्वक है, तो इसी श्रेणी में आता है. आप नाम पर ना जाइए, इसके उद्देश्य पर जाइए.''
शेक्सपियर को पढ़ने वाले क्या बोले?
शेक्सपियर को पढ़ने-पढ़ाने वालों को भी इस बात पर हैरानी है कि एक अमर कृति के नायक का नाम अपराधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
दिल्ली के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाली प्रोफ़ेसर का कहना है कि दिक्कत मानसिकता के साथ है जो लड़कियों को तंग करने वालों को रोमियो का नाम देते हैं जबकि रोमियो-जूलिएट प्रेमी-प्रेमिका थे.
'दिक्कत मानसिकता के साथ'
उन्होंने कहा, ''और ये मामला केवल यूपी तक सीमित नहीं है. ये हमारी मानसिकता के साथ दिक्कत दिखाता है. हम लोग रोडसाइड रोमियो जैसे जुमले का इस्तेमाल करते हैं उन लोगों के लिए जो महिलाओं को तंग करते हैं.''
प्रोफ़ेसर के मुताबिक 'ईव-टीज़िंग' के साथ भी यही समस्या है, इसमें 'टीज़' करने जैसा कुछ नहीं होता. ये छेड़छाड़ या यौन हिंसा से जुड़ा मामला है. उन्होंने कहा, ''आपको सबसे पहले रज़ामंदी और बलपूर्वक में फ़र्क़ समझना होगा और हम इसे नहीं समझते.''
उनका कहना है कि हीर-रांझा, लैला-मजनूं और रोमियो-जूलिएट, ये सभी प्रेमी-प्रेमिकाओं की कहानी हैं. और हम कहते हैं कि मजनूं बना फिरा रहता है. मजनूं प्यार में पागल था, छेड़खानी नहीं करता था.
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