उमर ख़ालिद विवाद, पत्रकार भी बने निशाना

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- Author, प्रशांत चाहल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्यों के बीच बुधवार को दिल्ली विश्वविद्याल (डीयू) में दो दफ़ा हिंसक झड़प हुई.
पहली झड़प दोपहर में डीयू के रामजस कॉलेज परिसर और कॉलेज गेट के बाहर हुई. वहीं दूसरी बार हिंसक टकराव शाम में रामजस कॉलेज के पास मॉरिस नगर थाने के बाहर हुआ.

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मौके पर मौजूद टेलीग्राफ़ अख़बार के पत्रकार फ़िरोज़ विंसेंट बताते हैं, ''दोपहर (डेढ़ बजे के आसपास) में जिस समय छात्र एकत्र होना शुरू हुए थे, उस समय रामजस कॉलेज बस स्टॉप के पास आइसा के लगभग 150 छात्र थे. उनके दोनों तरफ़ क़रीब दोगुनी संख्या में एबीवीपी के छात्र थे और नारेबाज़ी की जा रही थी.''
बुधवार शाम दोनों संगठनों ने दावा किया कि उनके सदस्यों को इस झड़प में चोटें आई हैं. दोनों ने विरोधी संगठन को हिंसा का जिम्मेदार ठहराया.
फ़िरोज़ बताते हैं, ''शुरुआत में दोनों छात्र संगठनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए पुलिस ने एक 'मानव-श्रृंखला' बना रखी थी. उसी बीच जेएनयू के छात्र उमर ख़ालिद के कार्यक्रम को रद्द करने का मांग कर रहे रामजस स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट योगित राठी ने पहला हमला किया और झड़प शुरू हुई.''
इस झड़प में कई पत्रकारों को भी चोट आई, कुछ महिला पत्रकारों को भी जिनमें से एक तरुणी कुमार (द क्विंट से) ने बीबीसी से बात की.
तरुणी ने बताया, "पुलिस कह रही थी कि आइसा वालों के पास परमिशन है, एबीवीपी वाले हट जाएं. इस बात पर पुलिस और एबीवीपी वालों में थोड़ी तनातनी हुई. एबीवीपी के सदस्यों का रुख आक्रामक था और लगने लगा था कि विवाद बढ़ सकता है."
झड़प के दौरान फ़ेसबुक पर लाइव रिकॉर्डिंग कर रहीं तरुणी का फ़ोन छीनकर तोड़ दिया गया और उनके साथ हाथापाई भी की गई.

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इसे याद करते हुए वो कहती हैं, "प्रोटेस्ट में महिलाओं की दोनों तरफ़ से अच्छी-ख़ासी भागीदारी थी. महिला पुलिस भी मौजूद थी. दिन का समय था. ऐसे में एक महिला के तौर पर असहज होने की जरूरत महसूस नहीं हो रही थी."
हमले के बाद तरुणी के कैमरामैन को वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि क्या उन्हें धुंधला दिख रहा है? क्या वो देख पा रही हैं? इसके जवाब में तरुणी ने कहा कि ''वो देख पा रही हैं, लेकिन स्तब्ध हैं.''
तरुणी बताती हैं, "मुझपर हमला महिला ने ही किया था. मेरे बाल नोचे और चेहरा भी. इससे पहले जो मैं सुन पाई वो ये था कि इसे पकड़ो ये रिकॉर्ड कर रही है."
नाम नहीं छपवाने की शर्त पर कई अन्य फ़्रीलांस महिला पत्रकारों ने भी बताया कि रिकॉर्ड कर रहे लोगों को एक वक्त पर सीधा निशाना बनाया गया.
तरुणी कहती हैं, "झड़प से पहले एबीवीपी वाले ललकार रहे थे कि जिसे जितने कैमरे लाने हैं, ले आएं. लेकिन झड़प होने पर कई लोगों के फ़ोन तोड़ दिए गए. शायद वो रिकॉर्ड में नहीं आना चाहते थे और इसीलिए मुझपर भी हमला किया गया."

उमर ख़ालिद जेएनयू के उन पांच छात्रों में एक हैं जिन पर पिछले साल देशद्रोह का आरोप लगा था और जेल हुई थी. उमर ख़ालिद पर जेएनयू में एक कार्यक्रम में शामिल होने का आरोप था जिसमें भारत विरोधी नारे लगाए गए थे.













