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नोट जितना हो जाएं बैन, जुगाड़ ज़िंदाबाद
भूकंप दो तरह के होते हैं. पहले वो, जिन्हें रिक्टर स्केल पर मापा जा सकता है. दूसरे वो, जिसे हर कोई अपनी सहूलियत और विचारधारा के हिसाब से मापता है. दूसरे वाले ये 'भूकंप' दुनिया के तमाम देशों में लाने का क्रेडिट अक्सर सरकारों के माथे जाता है.
भारत में हाल में ही कुछ लोगों के लिए 500 और 1000 के नोट बंद होना एक 'भूकंप' की तरह आया. लाइन में लगी भीड़ से उत्पन्न झटके वाले ये 'भूकंप' अभी कम से कम 50 दिन और लगेंगे. ये वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साभार है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''50 दिन दीजिए, देश वैसा हो जाएगा जैसा आपको चाहिए था.'' तब तक 500 और 1000 के नोटों को दुस्वप्न का भारत मान लीजिए.
जवाब है कुछ न किया जाए. चुपचाप लाइन में लगे रहिए. कुछेक काम जो लाइन में लगे हुए किए जा सकते हैं. वो कुछ यूं हैं:
- सर्दियां आ गई हैं. स्वेटर बुनिए
- बच्चों के जुएं निकालिए
- बैंक पीओ की तैयारी कीजिए
- योगा कीजिए
- कोई अच्छी/खराब किताब पढ़िए.
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