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'सीधे बैठना पीठ के लिए ख़तरनाक' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि ऑफ़िस में लंबे समय तक सीधे बैठकर काम करना पीठ के लिए ख़तरनाक है. स्कॉटलैंड और कनाडा के शोधकर्ताओं ने नई एमआरआई तकनीक के ज़रिए बैठने की स्थिति और उससे पीठ पर पड़ने वाले दबाव का अध्ययन किया है. इन शोधकर्ताओं ने उत्तरी अमरीका की रेडियोलॉजिकल सोसइटी को बताया है कि काम करते समय पीछे की ओर करीब 135 डिग्री पर टेक लगाकर बैठना सबसे ठीक होता है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बैठने का तरीका पीठ के निचले हिस्से में दर्द के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार होता है. ब्रिटिश कायरोप्रैक्टिक एसोसिएशन के आँकड़ों के अनुसार 32 प्रतिशत लोग दस घंटे से भी अधिक समय ऑफ़िस में बैठकर काम करते हैं. इनमें से आधे लोग अपनी सीट खाने के समय भी नहीं छोड़ पाते हैं. जबकि दो-तिहाई लोग घर पर भी बैठकर ही काम करते हैं. ये अनुसंधान स्कॉटलैंड के वूडेंड अस्पताल में किए गए हैं. इसके लिए 22 ऐसे लोगों को चुना गया जिनकी पीठ पूरी तरह से ठीक थी. इन सभी लोगों की एमआरआई मशीन से स्कैनिंग की गई. इस जाँच के दौरान इन्हें अपने तरीके से बैठने और खड़े होने की आज़ादी दी गई. रीढ़ पर दबाव अध्ययन के लिए बैठने के तरीकों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया. पहली श्रेणी में शरीर का ऊपरी हिस्सा आगे की ओर झुका होता है और बैठने वाले अक्सर डेस्क में टेक लगाए होते हैं. दूसरी श्रेणी में ऐसे लोगों को रखा गया जो सीधे यानी 90 डिग्री पर बैठते हैं और तीसरी श्रेणी में ऐसे लोग थे जिनके पाँव ज़मीन पर थे और वे पीछे की ओर 135 डिग्री पर टेक लगाकर कर बैठे थे. शोधकर्ताओं ने तीनों ही स्थितियों में सभी की रीढ़ की हड्डी की स्थिति का अध्ययन किया. सीधे 90 डिग्री की अवस्था में बैठने वालों की रीढ़ की हड्डी पर सबसे अधिक और पीछे की ओर 135 डिग्री पर टेक लगाकर बैठने वालों की रीढ़ की हड्डी पर सबसे कम दबाव पाया गया. शोध दल के प्रमुख और कनाडा के अल्बर्ट यूनिवर्सिटी अस्पताल के रेडियोलॉजी और डायग्नोस्टिक विभाग के डॉक्टर वसीम बशीर का कहना है, ''रीढ़ और अस्थिरज्जु पर लंबे समय तक दबाव पड़ने से आदमी दर्द, शारीरिक विकृति या स्थाई बीमारी का शिकार हो सकता है.'' ब्रिटिश कायरोप्रैक्टिक एसोसिएशन के ऋषि लोटे का कहना है, ''हर तीन में से एक आदमी के पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहता है और लंबे समय तक बैठना इसमें अहम भूमिका निभाता है. हमारे शरीर की बनावट ऐसी नहीं होती कि काफ़ी लंबे समय तक बैठा जाए.'' | इससे जुड़ी ख़बरें मोटापा पहुँचा सकता है पैरों को नुक़सान26 नवंबर, 2006 | विज्ञान आयुर्वेद अल्ज़ाइमर में 'कारगर'05 सितंबर, 2006 | विज्ञान बुढ़ापे में बहरेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार28 अगस्त, 2006 | विज्ञान ज़्यादा टीवी देखने से पीठ में दर्द26 अगस्त, 2004 | विज्ञान टेलीविज़न 'दर्द निवारक' भी है19 अगस्त, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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