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स्टेम कोशिका अनुसंधान को हरी झंडी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने मानव भ्रूण से ली गई स्टेम कोशिकाओं से जुड़े रिसर्च को आर्थिक सहायता कुछ शर्तों के साथ जारी रखने का फ़ैसला किया है. संघ के मंत्रियों की बैठक में फ़ैसला किया गया कि मानव भ्रूण से ली गई उन स्टेम कोशिकाओं के ज़रिए होने वाले अनुसंधान को ही वित्तीय मदद दी जाएगी जो पहले से उपलब्ध हैं. यूरोपीय संघ ने ये भी स्पष्ट किया है कि वैसे अनुसंधान को मदद नहीं दी जाएगी जिसमें मानव भ्रूण के नष्ट होने का ख़तरा हो. वैज्ञानिकों का मानना है कि स्टेम कोशिकाएँ कई असाध्य मानी जाने वाली बीमारियों के उपचार में काम आ सकती हैं. पिछले सप्ताह अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मानव भ्रूण से ली गई स्टेम कोशिकाओं से जुड़े अनुसंधान को सरकारी मदद बढ़ाने के संसद के फ़ैसले को वीटो कर दिया था.
यूरोपीय संघ में जर्मनी और पोलैंड जैसे देश स्टेम कोशिकाओं से जुड़े अनुसंधान को संघ से आर्थिक सहायता दिए जाने के ख़िलाफ़ रहे हैं. हालाँकि ब्रिटेन समेत कई देश स्टेम कोशिका अनुसंधान के प्रबल पक्षधर हैं. चमत्कारी कोशिकाएँ स्टेम कोशिकाओं से जुड़े अनुसंधान के विरोधियों का कहना है कि चूँकि ऐसी कोशिकाएँ मानव भ्रूण से ली जाती हैं जिसके पूर्ण मानव में विकसति होने की संभावनाएँ होती हैं, इसलिए इनका समर्थन नहीं किया जा सकता. स्टेम कोशिकाओं ऐसी कोशिकाओं को कहा जाता है जिनमें शरीर के किसी भी अंग की कोशिकाओं के रूप में विकसित होने की क्षमता पाई जाती है. रिसर्च कार्य में स्टेम कोशिकाओं आम तौर पर प्रजनन संबंधी उपचार के दौरान उपयोग में लाए गए मानव भ्रूण से ली जाती हैं, लेकिन उन कोशिकाओं के निकाले जाने के बाद भ्रूण नष्ट हो जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें स्टेम सेल रिसर्च को बुश ने वीटो किया19 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मानव क्लोनिंग के क्षेत्र में बड़ी सफलता19 मई, 2005 | विज्ञान असली दाँत गिरकर फिर मिल सकते हैं03 मई, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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