|
जुड़वाँ बहनों को अलग करने की तैयारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिर से जुड़ी दो बहनों फ़रहा और सबा के ऑपरेशन की तैयारियाँ चल रही हैं, अमरीका से इस काम के लिए आए डॉक्टर उनका मुआयना कर रहे हैं. जेन हॉपकिंस चिल्ड्रन सेंटर के सर्जन डॉक्टर बेंजामिन कार्सन अब इस बात का जायज़ा ले रहे हैं कि ऑपरेशन से दोनों बहनों के जीवन को ख़तरा तो नहीं है. इन बच्चियों के ऑपरेशन का ख़र्च अबूधाबी के सुल्तान मोहम्मद बिन ज़ियाद उठा रहे हैं, इन बहनों को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रखा गया है. अपोलो अस्पताल दो-एक दिन में इस बात की घोषणा करेगा कि इन बच्चियों का ऑपरेशन किया जाएगा या नहीं. ये दोनों बहनें न सिर्फ़ सिर से जुड़ी हैं बल्कि इनके दिमाग़ में खून की सप्लाई करने वाली मुख्य नस भी एक-दूसरे जुड़ी हुई है. मुश्किल यहीं ख़त्म नहीं होती, फ़रहा के शरीर में तो दो किडनियाँ हैं लेकिन सबा के शरीर में कोई किडनी नहीं है, इसलिए इस ऑपरेशन के साथ-साथ सबा के शरीर में किडनी का प्रतिरोपण भी करना होगा. बच्चों की न्यूरोसर्जरी के विशेषज्ञ कार्सन का कहना है कि इन बहनों के दिमाग़ की एन्जियोग्राफ़ी की जा रही है ताकि पता लगाया जा सके वे किस हद तक एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. गहन जाँच अपोलो अस्पताल के प्रवक्ता करण शाह ने कहा, "डॉक्टर कार्सन बच्चियों का मुआयना कर रहे हैं, पूरे दिन जाँच चलेगी, अगले दो-एक दिन में हमारे पास और अधिक जानकारी होगी."
अस्पताल के मुख्य न्यूरोसर्जन डॉक्टर मुकुल वर्मा ने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती उनके दिमाग़ को सफलतापूर्वक अलग करने की है." डॉक्टरों का कहना है कि संभवतः उनके शरीर के किसी अन्य हिस्से की नस को काटकर दिमाग़ में लगाना होगा. इन बच्चियों के पिता मोहम्मद शकील अहमद का कहना है कि वे अगर इस तरह दस वर्ष तक जी सकती हैं तो कोई चमत्कार भी हो सकता है और वे आगे भी जी सकती हैं. बिहार में चाय की दुकान चलाने वाले शकील का कहना है कि इनके पास उतने पैसे नहीं थे कि इन बच्चियों का ऑपरेशन करवा पाते लेकिन अबूधाबी की शाह की मदद से यह काम हो रहा है. ऑपरेशन की सफलता के बारे में डॉक्टर ज्यादा कुछ नहीं कह रहे हैं और यही कह रहे हैं कि वे अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करेंगे. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||