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शनिवार, 27 अगस्त, 2005 को 13:03 GMT तक के समाचार
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ग़ैरकानूनी नहीं रहेगा संगीत डाउनलोड
बेवन्स
बेवन्स सोनी द्वारा साइन किए गए समझौतों में से एक है.
संगीत के शौक़ीनों को ध्यान में रखकर पहली बार एक इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली फ़र्म ने विश्व प्रसिद्ध संगीत कंपनी सोनी बीएमजी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है.

सितंबर में अंत में आरंभ होने वाली प्लेलाउडर सेवा के तहत संगीतप्रेमी ग्राहक सोनी कंपनी के गीत-संगीत का आपस में आनंद ले सकेंगे.

इसके बदले में प्लेलाउडर सेवा अपनी कमाई का कुछ हिस्सा रॉयल्टी के रुप में संगीत बनानेवाली कंपनियों को देगी.

इस समझौते को संगीतप्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण क़दम के रुप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे गीत-संगीत की आपस में अदलाबदली ग़ैरक़ानूनी नहीं रह जाएगी.

ब्रिटेन के रिकार्डिंग उद्योग की एक संस्था, बीपीआई के अध्यक्ष पीटर जेमिसन का कहना है कि हमारे व्यवसाय के लिए यह प्रमुख मुद्दा था कि इंटरनेट पर संगीत के इस्तेमाल पर रिकार्डिंग कंपनियों को उनकी रायल्टी का पर्याप्त और सही भुगतान किया जाए.

उनका आगे कहना था कि बीपीआई इस नई शुरुआत का स्वागत करती है और हम इसे अपना पूरा सहयोग देंगे.

सोनी बीएमजी डेविड बॉई, मैके ग्रे, आयसिस, ट्राविस, विल यंग, आउटकास्ट जैसे ग्रुपों और कलाकारों का संगीत उपलब्ध कराएगी.

इस समझौते से ऐसा पहली बार हो सकेगा कि संगीतप्रेमी काज़ा, ईडांकी और लाइमवायर जैसी पी-टू-पी विधि का इस्तेमाल करते हुए बिना किसी रोकटोक और क़ानून सम्मत तरीक़े से संगीत को आपस में बाँट सकेंगे.

समझौते का स्वागत

संगीत उद्योग की शीर्ष हस्तियों ने इस समझौते का स्वागत किया है क्योंकि पिछले कई वर्षों से संगीत उद्योग द्वारा ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से संगीत के इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिशें की जा रहीं थीं.

अगस्त में बीपीआई ने अवैध तरीक़े से भारी मात्रा में संगीत अपलोड करने वाले ब्रिटेन के पाँच लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की है.

सोनी बीएमजी के क्लाईव रिच का मानना है कि प्लेलाउडर सेवा में उन कुछ विशेषताओं को रखा गया है जो गीत-संगीत आपस में बाँटनेवालों को उस समय से आकर्षित करती रहीं हैं जब लोग ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से नैपस्टर से फाइलें डाउनलोड करते थे.

संगीत सुनता एक आदमी
इस समझौते के बाद लोगों के बीच संगीत का आदान-प्रदान ग़ैरकानूनी नहीं रह जाएगा.

हाल ही में 800 से भी अधिक संगीतप्रेमियों के बीच प्लेलाउडर के लिए किए गए एक सर्वेक्षण में यह पाया गया कि उनमें से आधे से अधिक पी-टू-पी तरीक़े का इस्तेमाल करके क़ानूनी रुप से संगीत डाउनलोड करना पसंद करेंगे.

प्लेलाउडर का कहना है कि वो अपने नेटवर्क पर संगीत बाँटने का हिसाब-किताब रखने के लिए फ़िंगरप्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करेगी.

इसमें यह भी सामने आया है कि अगर सभी इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाले इस तकनीक को काम में लाएँ तो पूरे संगीत उद्योग को प्रतिवर्ष लगभग 14 अरब डॉलर की आय हो सकती है.

संगीत आधारित इंटरनेट सेवा देने के लिए प्लेलाउडर अपने मूल पैकेज के लिए लगभग 2100 रुपए वसूल करेगी.

यह सेवा मुख्य रुप से डिजिटल संगीत डाउनलोड करने के लिए ही बनाई गई है.

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