| 'उम्र बढ़ाने वाली जीन की खोज' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के वैज्ञानिकों ने कहा है उन्होंने चूहों में एक ऐसी जीन के बारे में पता लगाया है जिसमें बदलाव करने के बाद चूहों की उम्र को काफ़ी हद तक बढ़ाया जा सकता है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस जीन से चूहों की उम्र क़रीब 30 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है. अहम बात ये है कि मनुष्यों में भी इस जीन से मिलती जुलती जीन पाई जाता है और उम्मीद की जा रही है कि इसके ज़रिए वृद्धास्वथा में होने वाली दिक्कतों को क़म किया जा सकेगा. चूहों में पाई जाने वाले इस जीन का नाम कलोथो है जिसे ग्रीस की एक देवी के नाम पर रखा गया है. जिन चूहों की इस जीन में ख़राबी होती है वो जल्द बूढ़े हो जाते हैं. शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि अगर इस जीन के प्रभाव को कृत्रिम तरीक़े से बढ़ा दिया जाए तो नर चूहों की उम्र दो से तीन साल बढ़ जाती है. लेकिन मादा चूहों में इस बदलाव का क़म असर देखना को मिला है. कलोथो जीन से वृद्धास्वथा में होने वाली कई बीमारियों का असर भी देर से होता है. इसमें हड्डियों का कमज़ोर होना, धमनियों में रुकावट और माँसपेशियों की ख़राबी शामिल है. ये नया शोध उन लोगों के लिए काफ़ी अहम है जो वृद्धास्वथा में जिंदगी को बेहतर बनाने की ओर क़ाम कर रहे हैं. लेकिन इस जीन में किए गए शोध के कुछ नुक़सान भी हैं. इससे चूहे की उम्र भले ही बढ़ गई हो लेकिन उनकी प्रजनन क्षमता क़म हो जाती है. इस जीन में बदलाव से मधुमेह होने के आसार भी ज़्यादा हैं. अब शोधकर्ताओं के सामने चुनौती ये है कि इस जीन से होने वाले नुक़सान से बचते हुए इसके फ़ायदों को किस तरह पूरी तरह काम में लाया जाए. |
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