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रूसी दूमा ने क्योटो संधि की पुष्टि की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी संसद के निचले सदन दूमा ने भारी बहुमत से जलवायु परिवर्तन संबंधी क्योटो संधि को मंज़ूरी दे दी है. सदन में संधि के पक्ष में 334 मत और विरोध में मात्र 73 मत पड़े. इसतरह इस संधि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू किए जाने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि इसे रूसी संसद के उच्च सदन और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की स्वीकृति मिलना तो तय ही है. मॉस्को से बीबीसी संवाददाता सारा रेन्सफ़ोर्ड के अनुसार स्वीकृति संबंधी बाकी दोनों प्रक्रियाएँ इसी महीने पूरा हो जाने की संभावना है. संधि के कार्यावन्वय के लिए ज़रूरी है उन देशों की स्वीकृति जो विश्व स्तर पर ग्रीन-हाउस गैसों के 55 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेवार हैं. रूस की अग्रणी पहल संधि से अमरीका के हटने के बाद रूस ही ऐसा देश बच जाता है जिसकी सहमति इस संधि को लागू करने के लिए अनिवार्य हो जाती है. रूसी दूमा की पर्यावरण समिति के प्रमुख व्लादिमीर ग्राचेव ने कहा, "क्योटो संधि की पुष्टि कर रूस पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मज़बूत कर रहा है." संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक क्लाउस टोएफ़र ने रूसी क़दम को मील का पत्थर क़रार दिया है. उल्लेखनीय है दुनिया के 126 देश पहले ही क्योटो संधि की पुष्टि कर चुके हैं. |
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