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शिक्षा उपग्रह का सफल प्रक्षेपण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने अपने पहले शिक्षा उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है जिसका नाम एडुसेट रखा गया है. ढाई वर्षों में 80 करोड़ रूपए की लागत से बने इस उपग्रह का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से किया गया. इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों के शिक्षकों और छात्रों को एक दूसरे से जोड़ना है. दो टन वज़न वाला उपग्रह धरती से 36 हज़ार किलोमीटर की ऊँचाई पर चक्कर काट रहा है और इसके ज़रिए वर्चुअल क्लासरूम बनाए जा सकेंगे. मिसाल के तौर पर मुंबई में बैठा शिक्षक एक साथ अलग-अलग शहरों में हज़ारों विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है और इतना ही नहीं, छात्र भी शिक्षक से सवाल पूछ सकते हैं. साथ ही, देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थी भी एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि एडुसेट के ज़रिए एक हज़ार वर्चुअल क्लासरूम बनाए जा सकेंगे जिनका इस्तेमाल स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षा देने वाले संस्थानों के लिए किया जा सकेगा. भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि एडुसेट की वजह से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आएगी क्योंकि दूर-दूराज़ के शिक्षा संस्थान भी बेहतरीन अध्यापकों की सेवा का लाभ उठा सकेंगे. इस योजना के पहले चरण में कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के संस्थानों को उपग्रह से जोड़ा जाएगा. कर्नाटक की विश्वैसरैया टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, महाराष्ट्र की वाईबी चह्वाण ओपन यूनिवर्सिटी और मध्य प्रदेश की राजीव गाँधी टेक्नीकल यूनिवर्सिटी को उपग्रह से जोड़ा जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के चेयरमैन माधवन नायर ने इसे एक क्रांतिकारी क़दम बताया है कि आशा जताई है कि जल्दी ही इस दिशा में और प्रगति होगी. |
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