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नासा में मेरा तीसरा दिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हम पाँच बजे नासा पहुँचे, पहले दो दिनों के मुक़ाबले थोड़ा देर से पहुँचे और सीधे मीटिंग के लिए चले गए. यह मीटिंग हर रोज़ होती है जिसमें उस दिन की घटना पर चर्चा होती है. मीटिंग छोटी थी और काफ़ी रोचक थी, मीटिंग में बताया गया कि रोवर अब सफलतापूर्वक चल रहा है, पहले जो समस्या थी वह दूर कर दी गई है. रोवर एक पत्थर के पास पहुँच गया है जिसे वैज्ञानिकों ने व्हाइट बोट, रोवर अब अपनी लंबी यात्रा पर है और वह मंगल के एक क्रेटर की कोने की तरफ़ बढ़ रहा है. आज की मीटिंग में वैज्ञानिक ये तय कर रहे थे कि रोवर का अगला पड़ाव कहाँ होगा, यानी उसे कहाँ रोका जाएगा. जो ताज़ा तस्वीरें आई हैं उसे देखने के बाद तय किया गया है कि रोवर को अब तीस मीटर दूर ले जाकर रोका जाएगा. वैज्ञानिकों को वह रेत पर हवा के कुछ निशान दिख रहे हैं और वहाँ वे रोवर को रोककर हवा की गति के बारे में अध्ययन करना चाहते हैं. मीटिंग के बाद हम प्रमुख वैज्ञानिक जैक पामर से मिले, उन्होंने हमें अच्छी तरह समझाया कि रोवर का रास्ता किस तरह तय किया जा रहा है. इसके बाद हमने रोवर की भेजी तस्वीरों का अध्ययन करना शुरू कर दिया, काफ़ी सारी तस्वीरें आई हैं जिन्हें हमें देखना है. वैज्ञानिकों ने बताया कि अब तक रोवर ने क्या-क्या हासिल कर लिया है और क्या-क्या होना अभी बाक़ी है, उन्होंने रोवर की मौजूदा स्थिति पर भी जानकारी दी. रोवर के लिए आज का दिन काफ़ी अच्छा रहा. दिन का आख़िरी प्रेजेंटेशन लैरी हैस्किन ने किया जो कि भूगर्भ वैज्ञानिक हैं, उन्होंने उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनके काम करने के तरीक़ों के बारे में बताया. कल रिमोट सेंसिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी और देखा जाएगा कि किस तरह उन जानकारियों का उपयोग किया जाए. |
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