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स्पैम रोकने में अमरीका नाकाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विशेषज्ञों का मानना है कि अनचाही ईमेल के ख़िलाफ़ अमरीकी क़ानून का कोई ख़ास असर नहीं हुआ है. ईमेल सुरक्षा पर काम करने वाली अमरीकी कंपनी पोस्टिनी के अनुसार अनचाही ईमेल या स्पैम विरोधी कैन-स्पैम क़ानून का ज़्यादा असर नहीं हो पाया है. इसके अनुसार जनवरी महीने में कुल ईमेल ट्रैफ़िक का 79 प्रतिशत 'जंक मेल' था. यानी इससे पहले के महीने के मुक़ाबले स्पैम की संख्या में मात्र एक प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. हर पाँचवाँ संदेश स्पैम उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दिसंबर में कैन-स्पैम क़ानून पर हस्ताक्षर किए थे. इस क़ानून में जंक मेल पर पूरी तरह रोक लगाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसमें अमरीकी उपभोक्ताओं को ये विकल्प दिया गया है कि वो चाहें तो अनचाही ईमेल प्राप्त करने से इनकार कर दें. क़ानून के आलोचकों का मानना है कि पहले ही विभिन्न क़ानून की खामियों का फ़ायदा उठा कर अपना धंधा चला रहे स्पैम भेजने वाली कंपनियों पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ सकता. जनवरी के ईमेल आंकड़ों के ताज़ा अध्ययन से पता चला है कि इंटरनेट का उपयोग करने वालों को अब भी वायग्रा जैसी दवाओं और अश्लील तस्वीरों के ऑफ़र वाले अनचाहे संदेश भारी संख्या में मिल रहे हैं. कैलीफ़ोर्निया स्थित पोस्टिनी कंपनी ने जनवरी में भेजे गए चार अरब ईमेल संदेशों का विश्लेषण कर पाया कि हर पाँचवाँ ईमेल स्पैम होता है. |
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