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बीगल की चुप्पी बरक़रार
मंगल ग्रह की सतह से अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे ये अंदाज़ा लगाया जा सके कि बीगल2 वहाँ पर सुरक्षित पहुँच चुका है. अमरीका का मार्स ओडिसी उस जगह से गुज़रा जहाँ से उसे बीगल2 से संकेत लेना था मगर उसे कोई संकेत नहीं मिला. पश्चिमोत्तर इंग्लैंड के बड़े रेडियो टेलिस्कोप से भी बहुत कोशिशें हुईं कि किसी तरह कोई संकेत मिले मगर ऐसा नहीं हुआ. वैसे वैज्ञानिकों ने हिम्मत नहीं हारी है और उनका कहना है कि वे कोशिश जारी रखेंगे. वैज्ञानिकों के दल के नेता कॉलिन पिलिंजर ने कहा, "मेरा विश्वास है कि बीगल सुरक्षित पहुँच गया होगा. हम परीक्षण और इंतज़ार करते रहेंगे." बीगल2 अगर सुरक्षित है तो उससे 401.56 मेगाहर्ट्ज़ पर संकेत मिलेंगे. इस बीच बीगल2 को वहाँ छोड़ने वाला यान मार्स एक्सप्रेस चार जनवरी को इस अवस्था में होगा कि वह बीगल2 से कोई संपर्क साधने की कोशिश कर सके.
प्रोफ़ेसर पिलिंजर ने कहा कि अगर बीगल2 सुरक्षित पहुँचा है तो वह महीनों नहीं तो भी अपनी ही प्रणाली पर कुछ हफ़्तों तक तो जीवित रह ही सकता है. उनका कहना था कि इसलिए उससे संपर्क नहीं हो पाना कोई चिंता की बात नहीं थी. वैज्ञानिकों के अनुसार बीगल2 से कोई संकेत नहीं मिलने की कई वजहें हो सकती हैं. उसमें सबसे बड़ी वजह ये है कि वह शायद उस जगह पहुँच न पाया हो जहाँ से वह मार्स ओडिसी से संपर्क कर सकता. बीबीसी के विज्ञान मामलों के संवाददाता डेविड शुकमैन का कहना है कि भले ही वैज्ञानिक आम तौर पर मनोबल ऊँचा दिखाने की कोशिश कर रहे हों मगर कोई ख़बर नहीं आने से वे काफ़ी चिंतित हैं. उनका कहना था कि कोई संकेत नहीं आने से हालात दिन-ब-दिन बुरे ही हो रहे हैं. |
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