|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीगल क्या मंगल तक पहुँच पाया?
मंगल ग्रह जाने वाले अंतरिक्ष यान बीगल2 पर नज़र रख रहे वैज्ञानिक उससे संपर्क स्थापित न हो पाने पर निराश हैं. उन्होंने दो आशंकाएँ ज़ाहिर की हैं-या तो वह नष्ट हो गया है और या संचार में कोई समस्या है. साढ़े तीन करोड़ पाउंड की लागत से बने इस अंतरिक्ष यान को छह महीने में लगभग 40 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करके वहाँ पहुँचना था. बीगल2 मंगल के वातावरण में पहुँचकर पैराशूट के सहारे ज़मीन पर उतरने वाला था और वैज्ञानिकों को लग रहा था कि यह काम सफलतापूर्वक हो गया होगा. अभियान का यही हिस्सा सबसे ख़तरनाक होता है. अगर ये अभियान सफल रहता है तो इसके बाद मंगल पर जीवन के निशान ढूँढ़ने का 180 दिन का अभियान शुरू होगा. यदि सब कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से ही हुआ तो बीगल2 काफ़ी आँकड़े भेजेगा. तनावपूर्ण समय वैसे मंगल को भेजे गए अभियान कम ही सफल हुए हैं. वर्ष 1960 के बाद से अब तक लगभग 30 अभियान भेजे गए हैं जिमें से सिर्फ़ तीन ही मंगल की सतह तक पहुँच सके.
ये सभी अमरीका के महँगे अभियान थे. जबकि बीगल2 बहुत ही कम समय में और कम बजट में तैयार किया गया अंतरिक्ष यान है. बीगल2 अभियान के मैनेजर लेस्टर विश्वविद्यालय के डॉक्टर मार्क सिम्स ने कहा कि अंतिम दिन तो बिल्कुल लॉटरी जीतने जैसा ही होता है. उन्होंने कहा कि सभी विश्लेषणों से तो यही लगता है कि सब कुछ सही है मगर फिर भी यदि कहीं भी कुछ भी ग़लत हो गया तो शायद सब ख़त्म हो जाएगा. डॉक्टर सिम्स ने उम्मीद ज़ाहिर की कि सब कुछ अच्छा ही होगा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||