दाढ़ी बनाते हुए कट गया, जा सकती है जान !

एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध

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एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध जिस रफ़्तार से बढ़ रहा है, उससे अगले 35 साल में तीन करोड़ लोगों की असमय मौत हो सकती है.

यह कहना है ब्रितानी सरकार के बनाए एक समीक्षा दल के अध्यक्ष रहे अर्थशास्त्री जिन ओ'नील का.

उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस चुनौती का मुकाबला नहीं किया गया तो 'आप दाढ़ी बनाते हुए कट जाने जैसे बेहद मामूली घाव से भी मर सकते हैं.'

जिम ओनील

उनके नेतृत्व में बने समीक्षा दल ने नई एंटीबायोटिक दवाओं को विकसित करने के लिए शोध की राशि में दवा उद्योग से दो अरब डॉलर (1.26 खरब रुपये से ज़्यादा) देने की मांग की है.

'प्रलय जैसे हालात'

बीबीसी के विक्टोरिया डर्बीशर कार्यक्रम में ओ'नील ने कहा कि एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक या एंटीमाइक्रोबायल का संकट पूरी दुनिया में है.

वह कहते हैं कि वर्ष 2050 तक ब्रिक्स देशों- ब्राज़ील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ़्रीका, की अर्थव्यवस्था अमरीका के बराबर हो जाएगी लेकिन ख़तरा इन देशों में कई गुना होगा.

उनका कहना है, "अगर एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध इसी रफ़्तार से बढ़ता रहा तो वर्ष 2050 में विकासशील दुनिया, ख़ास तौर पर ब्रिक्स देशों में 10 लाख लोगों की हर साल मौत हो सकती है और यूरोप में यह संख्या करीब दो लाख प्रतिवर्ष हो सकती है. यह स्थिति प्रलय आने जैसी ही होगी."

एंटीबायोटिक

ओ'नील कहते हैं, "अगर नई एंटीबायोटिक विकसित नहीं की गईं तो रोज़मर्रा के काम भी जानलेवा साबित हो सकते हैं. जैसे कि दाढ़ी बनाते हुए कट जाना, बगीचे में कुछ चुभ जाना आपकी जान ले सकता है. अंग प्रत्यारोपण जैसी चीज़ें असंभव हो सकती हैं."

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