विज्ञान की दुनिया में भारत की 5 उपलब्धियां

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पिछले कुछ सालों में भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धियों से खूब नाम कमाया.
बीबीसी हिंदी ने बात की विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला से और पूछा कि 2014 में ऐसी कौन सी पांच उपलब्धियां रहीं जो भारत का गौरव बनीं.
2014 की बड़ी उपलब्धियां

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1. मंगलयान : भारतीय मंगलयान का पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह के कक्ष में पहुंच जाना 2014 की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है. पहले प्रयास में सफल रहने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना. अमरीका, रूस और यूरोपीय स्पेस एजेंसियों को कई प्रयासों के बाद मंगल ग्रह पहुंचने में सफलता मिली. चंद्रयान की सफलता के बाद ये वो कामयाबी थी जिसके मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की चर्चा होने लगी.

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2. जीएसएलवी मार्क 2 : साल की शुरूआत हुई जीएसएलवी मार्क 2 के सफल प्रक्षेपण से. ये बहुत बड़ी कामयाबी थी क्योंकि उसमें भारत ने अपने ही देश में बनाया हुआ क्रायोजेनिक इंजन लगाया था. इस उपलब्धि ने भारत को उम्मीद दी कि भारत अपनी सैटलाइट लॉन्च करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

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3. व्हीट जीनोम सीक्वेंस : इस साल भारतीय वैज्ञानिकों ने विदेशी वैज्ञानिकों के साथ मिल कर गेहूं के जीनोम को सीक्वेंस किया. गेहूं का जो जीनोम है वो बहुत बड़ा है. बहुत सालों से लोग मशक्कत कर रहे थे कि इस जीनोम को सीक्वेंस किया जाए. भारतीय वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक दिल्ली और लुधियाना की लैबॉरेट्री में इस जीनोम को सीक्वेंस किया. इस सफलता से भारत को अपनी खाद्य सुरक्षा को पुख्ता करने में मदद मिलेगी.

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4. जीएसएलवी मार्क 3 : हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अब तक के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3 का सफल प्रक्षेपण किया. 630 टन वज़न के इस रॉकेट में एक क्यू मॉड्यूल भी लगाया गया जिससे कि आने वाले समय में हिंदुस्तान अपने ऐस्ट्रॉनॉट्स को अंतरिक्ष में भेज पाएगा. यानि हिंदुस्तान की ही धरती से, हिंदुस्तान के रॉकेट से हिंदुस्तानी ऐस्ट्रॉनॉट्स का अंतरिक्ष में जाना बहुत बड़ी बात होगी. ये सफलता पाने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा.

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5. परमाणु क्षेत्र में उपलब्धियां : भारत ने इस साल खुद की बनाई हुई परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को हार्बर ट्रायल पर भेजा. थोड़े ही समय में इस पनडुब्बी का प्रयोग होना शुरू हो जाएगा, जिससे कि हमारे परमाणु हथियार सुरक्षित हो जाएंगें. एक दूसरी उपलब्धि ये रही कि राजस्थान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र ने दुनिया में सबसे ज़्यादा देर चलने का रिकॉर्ड कायम किया.
(बीबीसी हिंदी संवाददाता शालू यादव से बातचीत पर आधारित)
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