इस चक्रवात का नाम 'हुदहुद' क्यों?

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- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
क्या आपको 'हुदहुद' चक्रवात के बारे में पता है कि इसकी जड़ें ओमान में हैं.
हम चक्रवात के नाम की बात कर रहे हैं न कि तूफ़ान की.
यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्तरी अंडमान के पास उठा है और अब यह आंध्रप्रदेश और ओडिशा की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहा है.
मगर इसका नाम ओमान में रखा गया है. हुदहुद अरबी भाषा में हूपु नाम की चिड़िया को कहा जाता है.
पढ़ें पूरी ख़बर: कैसे रखे जाते हैं चक्रवातों के नाम
1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता आ रहा है.
डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है.

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मगर उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था क्योंकि ऐसा करना काफ़ी विवादास्पद काम था.
भारत के चक्रवात चेतावनी केंद्र के प्रमुख डॉक्टर एम माहापात्रा के मुताबिक़ इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में हमें काफ़ी सावधान और निष्पक्ष रहने की ज़रूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए.
डब्ल्यूएमओ
मगर 2004 में तब स्थिति बदल गई, जब डब्लूएमओ की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दी गई और अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया.
इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने हिस्सा लिया.

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इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी. हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए.
यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है. इस क्षेत्र में आने वाला आख़िरी चक्रवात जून में आने वाला नानुक था, जिसका नाम म्यांमार ने रखा था.
सदस्य देशों के लोग भी नाम सुझा सकते हैं. मसलन भारत सरकार इस शर्त पर लोगों की सलाह मांगती है कि नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ न हों.
वर्ण क्रम के अनुसार इस बार ओमान की बारी थी.
लंबी सूची
पिछले साल भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर आए पायलिन चक्रवात का नाम थाईलैंड ने रखा था.
इस सूची में शामिल भारतीय नाम काफ़ी आम नाम हैं, जैसे मेघ, सागर, और वायु.

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अगली बार इस इलाक़े में चक्रवात के नामकरण की बारी पाकिस्तान की होगी.
इसे नीलोफ़र कहा जाएगा. पिछली बार पाकिस्तान ने नवंबर 2012 में जिस चक्रवात का नाम रखा था उसे 'निलम' कहते हैं.
डॉक्टर महापात्रा का कहना है कि हुदहुद संभवतः इस सूची का 34वां नाम है. इसका मतलब है कि अभी इस सूची में 30 नाम और हैं.
चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और ज़रूरत पड़ने पर सूची फिर से भरी जाती है.
विवाद

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ऐसा नहीं कि 64 नामों की इस सूची को लेकर कोई विवाद नहीं रहा.
2013 में श्रीलंका की ओर से रखे 'महासेन' नाम को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रवादियों और अधिकारियों ने विरोध जताया था जिसे बाद में बदलकर 'वियारु' कर दिया गया.
उनके मुताबिक़ राजा महासेन श्रीलंका में शांति और समृद्धि लाए थे. इसलिए आपदा का नाम उनके नाम पर रखना ग़लत है.
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