गोलियां खाने में भारतीय अव्वल !

भारतीय एंटी-बायोटिक दवाओं का सबसे बड़े खरीदार बन गए हैं. बीते दस सालों में भारत में एंटी-बायोटिक की खपत 62 फ़ीसदी बढ़ी है.
<link type="page"><caption> अमरीका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी</caption><url href="http://www.princeton.edu/main/news/archive/S40/49/22E65/index.xml?section=topstories" platform="highweb"/></link> के शोध के अनुसार बीते दस वर्षों में पूरी दुनिया में एंटी-बायोटिक दवाओं का उपयोग 36 फ़ीसदी बढ़ा है. ब्रिक्स देशों में यह उछाल सबसे ज़्यादा है.
भारत में साल 2001 में आठ अरब यूनिट एंटी-बायोटिक दवाओं की खपत साल 2010 तक बढ़कर 12.9 अरब हो चुकी है.
रिसर्च के अनुसार, भारत के लोग औसतन हर साल 11 एंटी-बायोटिक गोलियां खाते हैं. लेकिन इन दवाओं का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल अमरीकी करते हैं, जो हर साल 22 एंटिबायोटिक गोलियां खाते हैं.
इस रिसर्च के वरिष्ठ शोधकर्ता <link type="page"><caption> रमनन लक्ष्मीनारायण</caption><url href="http://www.cddep.org/researchers/ramanan_laxminarayan" platform="highweb"/></link> ने बीबीसी को बताया, “भारत में एंटी-बायोटिक दवाएं आसानी से मिल रही हैं, ये अच्छी बात है लेकिन इसका इतना ज़्यादा इस्तेमाल चिंता भी पैदा करता है.”
रमनन लक्ष्मीनारायण ने बताई एंटी-बायोटिक दवाओं के बारे में कुछ खास बातें, आइए जानते हैं-
किस काम आता है एंटी-बायोटिक?
एंटी-बायोटिक दवाएं कई तरह के इंफ़ेक्शनों के इलाज़ के लिए इस्तेमाल की जाती हैं. ये दवाइयां बैक्टीरिया संबंधी बीमारियों पर तेज़ असर करता है. एंटी-बायोटिक कई तरह के होते हैं और हर मामले में बीमारी के हिसाब से इन्हें मरीज़ को दिया जाता है.
एंटी-बायोटिक दवाएं लेने के क़ायदे
सबसे ज़रूरी है कि बीमारी के लक्षण दिखने पर मरीज़ डॉक्टर के पास जाए. डॉक्टर के कहने पर ही एंटी-बायोटिक दवाएं लें.
डॉक्टर से बिना पूछे, सर्दी-खांसी की गोली की तरह एंटी-बायोटिक दवाई लेना मरीज़ के लिए खतरनाक हो सकता है. कई बार सर्दी-ज़ुकाम की वजह एलर्जी भी होती है, ऐसे में एंटी-बायोटिक दवाइयां कारगर नहीं होती.

इमेज स्रोत, Reuters
क्या नहीं करना चाहिए?
अपने से कोई दवाई नहीं खानी चाहिए. अगर एंटी-बायोटिक दवाएं ले रहे हों तो उसका कोर्स ज़रूरी पूरा करें, बीच में न छोड़े. कई बार मरीज़ थोड़ा ठीक होने पर दवाई खाना छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी के वापस आने का खतरा बढ़ जाता है.
ज़्यादा एंटीबायोटिक दवाएं लेने के खतरे
भारत में एंटी-बायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल की समस्या है. ऐसे में कई लोग छिटपुट बीमारियों के लिए एंटी-बायोटिक गोलियाँ खा लेते हैं, जिसकी उन्हें ज़रूरत नहीं होती. वहीं ज़रूरतमंद को ये दवाई नहीं मिल पाती.
एंटी-बायोटिक दवाओं के ज़्यादा इस्तेमाल से इसका असर कम हो जाने का खतरा बढ़ जाता है.
<bold>(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/07/www.facebook.com%5Cbbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/07/www.twitter.com%5Cbbchindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












