नज़र न लग जाए, आंखों को स्मार्टफोन की

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हर तरफ स्मार्टफोन की धूम मची है. लेकिन जिन लोगों को इसकी लत लग चुकी है, उनके लिए बुरी ख़बर है.
ऑप्टिशियनों (चश्मा बनाने वालों) के अनुसार स्मार्टफोन के दीवानों को उनके ही फोन की नजर लग रही है.
ऑप्टिशियनों ने स्मार्टफोन यूजर्स को यह चेतावनी 2,000 लोगों पर किए गए एक अध्ययन के बाद दी है. इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 25 साल से कम उम्र के युवा अपने फोन का इस्तेमाल एक दिन में 32 बार करते हैं.
स्मार्टफोन के अलावा कंप्यूटर,टैबलेट्स और फ़्लैट स्क्रीन वाली टीवी का भी ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल दीर्घकालिक नुक़सान की ओर ले जा सकता है.
ऑप्टिशियन ऐंडी हेपवर्थ का कहना है, "स्मार्टफोन की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारी आंखों के लिए काफी नुक़सानदेह और आंख के पिछले हिस्से के लिए ख़तरनाक होती है."
खतरनाक नीली रोशनी
आंखों के जानकार ऐंडी हेपवर्थ बताते हैं, "जब आप अपने स्मार्टफोन की ओर देख रहे होते हैं, तो उस समय इससे रोशनी की जो किरणें निकलती हैं वह नीली बैंगनी रंग की होती हैं."

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उन्होंने आगे बताया कि अध्ययन में पता चला है कि इन नीली किरणों से 'मैक्यूलर डीजेनरेशन' का खतरा होता है, जिससे आप अंधे भी हो सकते हैं.
ऑप्टीशियनों का कहना है कि बायोलॉजिकल क्लॉक को दुरुस्त रखने के लिए 'भली-भली' नीली रोशनी काफी मददगार साबित होती है. मगर साथ ही उनका यह भी कहना है कि अधिक नीली रोशनी के प्रभाव में रहने से नींद में ख़लल पड़ता है और मूड पर भी असर होता है.
ऐंडी आगे कहते हैं, "हालांकि हम अभी आंख की समस्याओं से स्मार्टफोन के सीधे संबंध के बारे में अनजान हैं, लेकिन प्रयोगशाला में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि स्मार्टफोन आंखों को काफ़ी नुक़सान पहुंचा सकता है."
उन्होंने यह भी बताया, "स्मार्टफोन को देखते समय हम अपनी पलकें बहुत कम झपकाते हैं और फोन से हमारी दूरी सामान्यतया काफी कम होती है. इससे आंखों पर ज़ोर पड़ता है."
फोन से दूरी बर्दाश्त नहीं
निजी ऑप्टिशियनों के समूह की ओर से प्रमाणित स्मार्टफोन से जुड़े इस सर्वेक्षण के अनुसार एक वयस्क स्क्रीन को ताकते हुए दिन का औसतन सात घंटा गुज़ार देता है.

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आंकड़ों से यह बात निकल कर सामने आ रही है कि 25 साल से कम उम्र वाले 43 फीसदी लोग जब चाहते हुए भी अपना फोन चेक नहीं कर पाते तो, वह काफी चिड़चिड़े हो जाते हैं.
स्मार्टफोन यूजर अलन चिनरी का कहना है कि वह अपने स्मार्टफोन के बिना नहीं रह पाती और नर्वस हो उठती हैं.
इसके अलावा 55 फीसदी लोग स्मार्टफोन के संपर्क में रहने के कारण आंखों में तकलीफ महसूस करते हैं.
'सिरदर्द'
18 साल की अलन चिनरी अपना स्मार्टफोन हमेशा साथ रखती हैं.
वे कहती हैं, "मैंने महसूस किया है कि जब से मैं कंप्यूटर और फोन का इस्तेमाल करने लगी हूं, मेरी आंखें खराब हो रही हैं.
वह आगे कहती हैं, "मुझे बार-बार सिरदर्द होने लगा है."
अमंद संत, जो एक ऑप्टिशियन हैं, कहते हैं कि स्मार्टफोन के इन <link type="page"><caption> नुक़सानदेह असर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/05/120508_best_smartphone_ac.shtml" platform="highweb"/></link> से बचने के लिए हमें कोई बहुत भारी-भरकम नहीं बल्कि साधारण तरीका चाहिए.
संत सलाह देते हैं, "आप अपनी आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए और कंप्यूटर और फोन से बीच-बीच में दूरी बनाते रहिए."
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