चार अरब साल में सात किलोमीटर सिकुड़ चुका है बुध ग्रह

इमेज स्रोत, NASA JHU APL CARNEGIE
वैज्ञानिकों का कहना है कि चार अरब साल पहले जब बुध ग्रह की सतह सख्त हुई थी तब की तुलना में आज यह ग्रह सात किलोमीटर छोटा हो गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रह की भीतरी सतह ठंडी होने के कारण सिकुड़ गई है और इस स्तर पर दरारें पड़ रही हैं .
वैज्ञानिकों को इस बारे में पहली बार जानकारी तब मिली जब सत्तर के दशक के मध्य में मैरीनर 10 सैटेलाइट ग्रह के पास से गुज़री थी.
लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी <link type="page"><caption> मैसेंजर सैटेलाइट</caption><url href="http://www.nature.com/ngeo/journal/vaop/ncurrent/full/ngeo2097.html" platform="highweb"/></link> से मिली ताज़ा तस्वीरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को इस ग्रह के सिकुड़ने के बारे में नई जानकारी मिली हैं.
वैज्ञानिक जर्नल नेचर जियोसाइंस की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि बुध ग्रह का सिकुड़ना पहले जितनी उम्मीद थी उससे कहीं ज़्यादा है.
मीलों लंबी दरार

<link type="page"><caption> मैरीनर 10 मिशन</caption><url href="http://messenger.jhuapl.edu/" platform="highweb"/></link> साल 1974 और 1975 में बुध के पास से गुजरा था और उसने बुध के 45 प्रतिशत इलाक़े की तस्वीरें ली थीं . उन तस्वीरों से पता चल रहा था कि बुध की सतह पर दरारें हैं.
यह दरारें सैकड़ों मील लंबी थी. मैरीनर 10 से ली गई तस्वीरों से अनुमान लगाया गया था कि इस ग्रह की त्रिज्या एक से तीन किलोमीटर कम हुई है .
ये नतीजे उन परिणामों के उलट थे जो मॉडलिंग तकनीक से मिले थे. मॉडलिंग तकनीक के अनुसार बुध जैसे ठंडे होने वाले पिण्ड को चार अरब साल में इससे ज़्यादा सिकुड़ना चाहिए था.
मैसेंजर ने बुध के 100 प्रतिशत सतह की तस्वीर लेकर वैज्ञानिकों की मुश्किल हल कर दी. मैसेंजर साल 2011 में बुध के पास से गुजरा और उसने 100% सतह की तस्वीरें लीं .
इन तस्वीरों की समीक्षा के बाद बात यह बात सामने आई है कि यह ग्रह पहले जितना अनुमान था उसेस ज़्यादा सिकुड़ चुका है.
वाशिंगटन के कारनेगी इंस्टीट्यूट के डॉ. पॉल बायरन ने बीबीसी को बताया, " ग्रह में पड़ी कुछ दरारें बहुत बड़ी हैं. ग्रह के दक्षिणी हिस्से में एक लंबी दरार पड़ी है जिसकी लंबाई 1000 किलोमीटर है.
बुध का व्यास लगभग 4000 किलोमीटर है. मैसेंजर मिशन के बाद जापान और यूरोप भी बुध पर मिशन भेजने की तैयारी कर रहे हैं. ये मिशन अगले साल भेजे जाएंगे .
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