'ज़करबर्ग व्हाट्सऐप डाउनलोड क्यों नहीं कर लेता!'

- Author, तुषार बनर्जी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
इन दिनों इंटरनेट पर एक मज़ाक खूब शेयर किया जा रहा है.
इस मज़ाक में ‘संता’ अपने दोस्त ‘बंता’ से पूछता है कि मार्क ज़करबर्ग ने 19 अरब डॉलर में व्हाट्सऐप क्यों खरीदा, सीधे डाउनलोड कर लेता, फ़्री में हो जाता.
फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप के बीच लगभग 1200 अरब रुपयों की डील इंटरनेट पर ख़बरों के बाज़ार में किसी बम की तरह फटी और हर किसी को चौंका गई.
सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई, कुछ ने इसे ज़करबर्ग का मास्टरस्ट्रोक बताया तो कुछ ने इस डील को बेकार बता दिया.
लेकिन इन सबके बीच लाख टके का सवाल यही बना हुआ है कि आख़िर ज़करबर्ग ने व्हाट्सऐप को इतनी बड़ी क़ीमत में खरीदा क्यों?
इसका जवाब शायद इसी बात में है कि ज़करबर्ग फ़ेसबुक को एक मोबाइल कंपनी मानते है.
'फ़ेसबुक ने अगले फ़ेसबुक को खरीदा'
फ़ेसबुक की तरफ़ से दिसंबर 2013 में जारी किए गए आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि हर महीने करीब सवा अरब सक्रिय यूज़र फ़ेसबुक का उपयोग करते हैं. इनमें से करीब 95 करोड़ यूज़र मोबाइल से फ़ेसबुक तक पहुंचते हैं.
ऐसे में व्हाट्सऐप, फ़ेसबुक के लिए एक ज़रूरी उत्पाद बन जाता है.
साल 2009 में शुरू होने से अब तक व्हाट्सऐप ने तेज़ी से 45 करोड़ सक्रिय यूज़र जोड़े हैं. दुनियाभर में करीब 31 करोड़ यूज़र रोज़ाना व्हाट्सऐप का प्रयोग करते हैं.

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रिपोर्टों की मानें तो व्हाट्सऐप सबसे तेज़ी से बढ़ती मैसेजिंग कंपनी है. हर रोज़ लगभग दस लाख लोग व्हाट्सऐप से जुड़ रहे हैं.
एक मैसेजिंग ऐप की इतनी तेज़ गति से तरक्की और इसे मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर कई टेक्नोलॉजिस्ट इसे अगला फ़ेसबुक भी कहने लगे थे.
ऐसे में फ़ेसबुक शायद ये कतई नहीं चाहता कि कोई मैसेजिंग ऐप उसके यूज़र्स को तोड़े. फ़ेसबुक की अपनी मैसेजिंग सेवा को भी ठंडी प्रतिक्रिया मिली थी. ऐसे में मोबाइल क्षेत्र में पैर मज़बूत करने और पसारने के लिए उसे एक अच्छे उद्यम की ज़रूरत थी.
55 कर्मचारी, 32 इंजीनियर
शायद व्हाट्सऐप से ज़्यादा क़िफ़ायती मोबाइल उत्पाद फ़ेसबुक को मिल भी नहीं सकता था. अमरीकी इंजीनियर ब्रायन एक्टन और जेन क्योम की कंपनी ‘व्हाट्सऐप इंक’ में कुल 55 कर्मचारी हैं, जिसमें से 32 इंजीनियर हैं.
व्हाट्सऐप के मालिकों को 19 अरब डॉलर का भुगतान किया जाएगा. इसमें चार अरब डॉलर नकद, लगभग 12 अरब डॉलर की क़ीमत के फ़ेसबुक के शेयर शामिल हैं. इसके अलावा अगले कुछ वर्षों के दौरान वाट्सऐप के संस्थापकों और कर्मचारियों को तीन अरब डॉलर के अतिरिक्त शेयर जारी किए जाएंगे.
क़यास अब ये लगाए जा रहे हैं कि फ़ेसबुक इतनी बड़ी रकम को वापस कैसे कमाएगा.

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क्या साफ़-सुथरे दिखने वाले और तेज़ गति से चलने वाले इस मैसेजिंग टूल में विज्ञापन डाले जाएंगे? या इसे पूरी तरह से पेड बनाया जाएगा?
टेक्सट मैसेजिंग के अलावा ये ऐप वीडियो, तस्वीरें और ऑडियो भेजने का भी विकल्प देता है. बताया जाता है कि अपनी श्रेणी में ये सबसे तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा ऐप है.
पेड हो जाएगा व्हाट्सऐप?
फिलहाल पहले साल मुफ़्त सेवा के बाद व्हाट्सऐप अपने यूज़र्स से हर साल 55 रुपए का शुल्क लेता है और पूरी तरह से विज्ञापन रहित है.
हालांकि फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग पहले ही कह चुके हैं कि व्हाट्सऐप जैसे चल रहा था वैसे ही चलता रहेगा.
व्हाट्सऐप जैसे दूसरे मैसेजिंग ऐप कमाई के लिए दूसरे पैतरों का उपयोग भी करते हैं, जैसे ई-कॉमर्स. इन ऐप की बिक्री और इसके बुनियादी शुल्क को जोड़कर देखा जाए तो एक बड़ी धनराशि तैयार हो सकती है.
सोशल मीडिया में कई लोग ये भी क़यास लगाते हैं कि फ़ेसबुक ने व्हाट्सऐप को सिर्फ उसके यूज़र्स के मोबाइल नंबरों की जानकारी के लिए खरीदा. कई लोग इसके फ़ेसबुक के हाथों जाने के बाद अपने डाटा की सुरक्षा को भी लेकर चिंतित हैं.
लेकिन सुरक्षा के लिहाज से देखा जाए तो पहले भी उनका डाटा पूरी तरह से सुरक्षित कभी नहीं रहा. कई विज्ञापन प्रोग्राम हर वक्त यूज़रों के चैट रिकॉर्ड और ब्राउज़िंग इतिहास जुटाते रहते हैं ताकि उन्हें उनकी ज़रूरत के हिसाब से विज्ञापन परोसा जा सके.
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