इससे पहले कि आप अपने बच्चे को स्मार्टफ़ोन दें...

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बहुत सारे मां-बाप नहीं जानते कि टैबलेट और स्मार्टफ़ोन से उनके बच्चों को क्या ख़तरे हैं. ये बात बीबीसी के एक सर्वेक्षण में सामने आई है.
बीबीसी लर्निंग के सर्वे में पाया गया कि हर पांच में से एक बच्चे ने बताया कि उसने अपने टैबलेट या स्मार्टफ़ोन पर कुछ ऐसा देखा जिससे वे विचलित हुए. ये आंकड़ा मां-बाप के अनुमान से दोगुना था.
एक दूसरे अध्ययन में पाया गया कि 20 प्रतिशत से थोड़े ज़्यादा माता-पिता इस बात की निगरानी नहीं करते कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं.
ये अध्ययन सेफ़र इंटरनेट डे के तहत करवाया गया था.
बीबीसी से बात करते हुए इंग्लैंड में 90 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों से टैबलेट या स्मार्टफ़ोन से ऑनलाइन गतिविधि के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखने की बात कही है. लेकिन इनमें से ज़्यादातर ने माना कि उस दौरान वे बच्चों पर नज़र नहीं रखते.
माता-पिता की निगरानी
'गेट सेफ़ ऑनलाइन' संस्था के मुख्य कार्यकारी टोनी नीट कहते हैं, "हमारी उम्र कुछ भी हो, दुर्भाग्यवश हम सभी को ऑनलाइन पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. अगर हम सर्च इंजिन फ़िल्टर्स, सुरक्षा और निजता के फ़ीचर और बिल्ट-इन सिक्युरिटी जैसे नियंत्रणों का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो बच्चे निश्चित ही कुछ ऐसा देखेंगे जो उनकी उम्र या किसी भी उम्र के लिए ठीक नहीं है."
सर्वे में ये भी सामने आया कि आठ से 12 साल के बच्चों की तुलना में 13 से 16 साल के किशोरों को इंटरनेट पर ''बुलिंग'' या डराने-धमकाने का ख़तरा ज़्यादा होता है. लेकिन माता-पिता को किशोरों के टैबलेट के इस्तेमाल को लेकर ज़्यादा चिंता नहीं होती.

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डेविड एम कापर्स्की लैब में वरिष्ठ सुरक्षा शोधकर्ता हैं. वे कहते हैं कि माता-पिता टैबलेट और स्मार्टफ़ोन पर इंटरनेट सर्फ़िंग के ख़तरों से उतने वाक़िफ़ नहीं होते जितना उनको पर्सनल कंप्यूटर यानी डेस्क टॉप या लैप टॉप पर इंटरनेट सर्फ़िंग के ख़तरों के बारे में पता होता है.
डेविड एम कहते हैं, "जब बच्चे मोबाइल उपकरणों से वेब ऐक्सेस कर रहे हैं तब भी वे वही इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं और उसमें वही ख़तरें हैं. ये एक आम ग़लतफ़हमी है कि स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स में उतनी सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है जितनी पीसी के लिए होती है. लेकिन बहुत ज़्यादा माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में पूरी तरह जानकारी नहीं होती और इसलिए उनकी सोच को बदलने की ज़रूरत है."
ऐपल कंपनी के मोबाइल फ़ोन आईफ़ोन और टैबलेट आईपैड में माता-पिता एक पासकोड का इस्तेमाल कर नियंत्रण या पैरेंटल कंट्रोल तय कर सकते हैं. कुछ ऐप्स या वेबसाइटों को या तो पूरी तरह से या फिर उम्र के मुताबिक़ सामग्री के हिसाब से ब्लॉक किया जा सकता है.
एंड्रॉयड स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स में भी सीमित प्रोफ़ाइल अकाउंट बनाए जा सकते हैं.
बीबीसी सर्वे में हिस्सा लेने वाले 50 फ़ीसदी से ज़्यादा माता-पिता ने कहा कि उन्होंने टैबलेट में तो पैरेंटल कंट्रोल और फ़िल्टर सेट कर दिए थे लेकिन सिर्फ़ 40 फ़ीसदी ने ही कहा कि उन्होंने अपने बच्चों के स्मार्टफ़ोन में भी ऐसा ही किया है.
कापर्स्की लैब के अपने सर्वे के मुताबिक़ 18 प्रतिशत माता-पिता को नक़द या डाटा का नुक़सान सहना पड़ा क्योंकि उनके फ़ोन या टैबलेट उनके बच्चे इस्तेमाल कर रहे थे और मां-बाप उनकी निगरानी नहीं कर रहे थे.
इसका एक कारण बच्चों द्वारा अपने माता-पिता के फ़ोन पर गेम खेलते वक़्त इन-एप ख़रीदना है. हाल ही में ऐपल कंपनी को उन माता-पिता को तीन करोड़ डॉलर से ज़्यादा भुगतान करना पड़ा था क्योंकि उनके बच्चों ने बिना इजाज़त एप ख़रीदे थे.
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