अधिग्रहण पर अधिग्रहण, गूगल का इरादा क्या है

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- Author, डेव ली
- पदनाम, टेक्नॉलॉजी रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़
हॉलीवुड की मशहूर एनिमेशन फ़िल्म वाल-ई (2008) के केंद्र में एक बड़ी कंपनी है, 'बाए एन लार्ज' (बीएनएल).
'महाकंपनी' बीएनएल के नियंत्रण में सब कुछ है, सब कुछ.
यह कंपनी कई क्षेत्रों में विश्व की अग्रणी कंपनी है, जैसे एयरोस्पेस, कृषि, मीडिया, खाद्य पदार्थ, विज्ञान, आधारभूत ढांचे और ट्रांस्पोर्ट इत्यादि.
लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था. शुरुआत में बीएनएल, सिर्फ़ दही बेचती थी और गूगल साल 1998 तक केवल 'सर्च' करता था.
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आज गूगल इंटरनेट विज्ञापन जगत में सबसे बड़ा नाम है. यह कंपनी नज़दीकी अंतरिक्ष में गुब्बारे भेजती है, और हमारे शहर के नीचे तारों का जाल बिछाती है.
यह वह कंपनी है जो दुनिया की ज़्यादातर स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स को चलाती है (ग्राहकों की मौजूदा स्थिति का हिसाब रखती है) और पहने जाने योग्य तकनीक की दुनिया में ताल ठोक रही है अपने स्मार्ट चश्मे, गूगल ग्लास के साथ.
"वेब सर्च कंपनी नहीं"
पिछले सोमवार को गूगल ने स्मार्ट-थर्मोस्टेट-निर्माता नेस्ट को 3.2 अरब डॉलर (करीब 19.68 खरब रुपये) में ख़रीदने की घोषणा की. इसी के साथ ही रोबोटिक्स में कंपनी की ख़रीदारी को लेकर हलचल मच गई है क्योंकि कंपनी ने बॉस्टन डायनेमिक्स का भी अधिग्रहण किया है.
इसका मतलब यह है कि गूगल, जिसका मशहूर सूत्रवाक्य है, "बुरे मत बनो", अब ऐसी कंपनी पर भरोसा कर रहा है जिसकी स्थापना का एक उद्देश्य सैन्य उपकरण बनाना भी था.
अरे हाँ, गूगल एक खुद चलने वाली गाड़ी भी तो बना रहा है.
सवाल यह है कि दरअसल अब गूगल है क्या?

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तकनीक और टेलीकम्युनिकेशन्स विश्लेषक बेनेडिक्ट इवान्स कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह बहुत समय पहले ही साफ़ हो गया था कि गूगल एक वेब सर्च कंपनी नहीं है."
वे कहते हैं, "गूगल एक विशाल मशीन-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट है जो एक दशक से ज़्यादा वक्त से चल रहा है. गूगल का उद्देश्य इस सिस्टम में ज़्यादा से ज़्यादा आंकड़े एकत्र करना है."
कैसे? हालांकि भविष्य की कल्पना करना मुश्किल है लेकिन कुछ संकेत हैं जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि गूगल अपने व्यापार का भविष्य किस दिशा में जाता देख रहा है.
उदाहरण के लिए, नेस्ट, उन कंपनियों में से एक है जिन्हें गूगल ने अपने गूगल वेंचर्स प्रोजेक्ट के माध्यम से सहायता की थी. साल 2009 में गूगल वेंचर्स प्रोजेक्ट "सबसे अच्छी कंपनियों को शुरुआत, जोखिम उठाने और विकास क्रम में फंडिंग" करने के लिए शुरू किया गया था.
23एंडमी
गूगल वेंचर्स की सहायता से शुरू कुछ और कंपनियों पर एक नज़र डालने से साफ़ हो जाता है कि गूगल को भविष्य किसमें दिखता है.
पहली नज़र में यह विशुद्ध निवेश की तरह नज़र आते हैं. जैसे कि "एक विशुद्ध सोशल गेमिंग" कबम, या "नए फ़िटनेस एप्स" बनाने के लिए काम कर रही कंपनी फ़िटस्टार और एक स्थानीय सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म नेक्स्टडोर हैं.

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लेकिन गूगल के हितों पर थोड़ी गहरी नज़र डालें तो आपको इनमें पूरी तरह से नई दृष्टि दिखेगी.
कैलिफ़ोर्निया की "ऑर्गेनिक कॉफ़ी रोएस्ट्री", आभासी मुद्रा बिटकॉयन का एक बाज़ार- बटरकॉयन और बच्चों के कपड़ों का विशेषज्ञ विटेलबी.
इवान्स मानते हैं कि गूगल अपने इन दांवों पर ख़ामोश ही रहता है.
वह कहते हैं, "गूगल सोशल नेटवर्किंग मामले में चूक गया और इसलिए यह तय है कि वह ड्रोन के मामले में नहीं चूकेगा और न ही वह घरों के स्वचालन में पिछड़ेगा जो तकनीक के बड़े चलन के रूप में सामने आ रहे हैं."
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लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में वह ज़्यादा कूटनीतिक ढंग से काम कर रहा है. वह कैंसर शोध, ऑटिज़्म की शुरुआत और डीएनए विश्लेषण में काम कर रही कंपनियों को सहायता दे रहा है.
इनमें सबसे आश्चर्यजनक हैः 23एंडमी. यह एक बायोटेक्नोलॉजी फ़र्म है जो त्वरित जेनेटिक जांच करती है. यह आनुवांशिक रोगों के लिए ग्राहकों को अपने डीएनए के नमूने लेकर, बेहद तेजी से, उनकी जांच की सुविधा देती है.
क्लाउट सूचना सेवा का दूसरा सिरा

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और अगर आप यह सोच रहे हैं कि यह निवेश- जिनमें से कुछ बहुत बड़े हैं, और कुछ छोटे- इस बात की ओर इशारा करते हैं कि गूगल अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट नहीं है तो आप ग़लत हैं.
इवान्स कहते हैं, "यह सभी चीज़ें अनिवार्य रूप से अंततः क्लाउड सूचना सेवा का दूसरा सिरा हैं."
वे कहते हैं, "नेस्ट के थर्मोस्टेट जैसे उपकरण सिर्फ़ दीवार पर लगे समझदार छोटे डब्बे नहीं है. उनके होने का पूरा अर्थ यह है कि वह सभी सॉफ़्टवेयर बनते हैं और वह सभी इंटरनेट का एक भाग बनते हैं. और गूगल का मतलब ही इंटरनेट को समझना है."
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वॉल-ई की काल्पनिक दुनिया में बाए एन लार्ज का दही बेचने वाले से वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए मुख्यतः इंसानों की ज़ाहिर लापरवाही को ज़िम्मेदार बताया जाता है. जिसके चलते यह दही विक्रेता चुपचाप ज़िंदगी के हर पहलू को नियंत्रित करने वाली विशाल-कंपनी बन जाती है.
वास्तविक ज़िंदगी में भी लोग बहुत उत्सुक नज़र नहीं आते. गूगल के नेस्ट के अधिग्रहण की ख़बर से सोशल मीडिया पर लोगों ने अल्पज्ञान से भरे कुछ मज़ाक किए और उद्योग के विशेषज्ञों ने भी कुछ त्वरित मज़ाक किए.
वॉल स्ट्रीट जर्नल को एक इंटरव्यू में रॉब एंडर्ले ने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि गूगल ने बिग ब्रदर को पढ़ लिया और उसे अपने करियर का उद्देश्य बना लिया."

इसी तरह, दुनिया भर में कई प्रशासनिक प्राधिकरणों ने गूगल पर सख़्ती की है, यह दिखाने के लिए कि वह हमारे निजी आंकड़ों के संग्रहण पर बिना समुचित निगरानी के कोई बड़ा विघ्न नहीं आने देंगे.
ऐसी ख़बरें थीं कि सप्ताहांत में एक बेहद गुप्त शोध प्रोजेक्ट पर काम कर रही गूगल की "एक्स" टीम के सदस्य अमरीका के खाद्य और दवा प्रशासन के अधिकारियों से मिले थे ताकि अपनी योजनाओं पर बात कर सकें.
ध्यान रहे कि उनके दूसरे उपक्रमों- जैसे कि 23एंडमी- के असर पर चिंतित नियामकों ने फ़िलहाल रोक लगा दी है.
अभिलाषा
लोगों की नज़र में कंपनी के उद्देश्यों को लेकर बढ़ता असहजता का भाव गूगल की अत्याधुनिक मानी जाने वाली खोजों की राह की बाधा है.
निजता को लेकर बड़ी समस्याएं पैदा हुई हैं- जैसे कि यह पता चलना कि गूगल की स्ट्रीट व्यू कारें सड़कों से गुज़रते हुए गैरकानूनी ढंग से लोगों के निजी वाई-फ़ाई नेटवर्कों से डाटा एकत्र कर रही थीं. गूगल के इस तर्क से कि- सब कुछ सुस्पष्ट है- उसके आलोचकों और उपभोक्ता बहुत ज़्यादा प्रभावित नहीं हुए.

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इवान्स कहते हैं, "गूगल की एक समस्या यह है कि वह सोचते हैं 'हम जानते हैं कि हम इससे कुछ भी ग़लत नहीं करेंगे, और आपको भी यह समझना चाहिए'."
वे बताते हैं, "दरअसल गूगल खुद को कैसे देखता है और कभी-कभी इसके कामों से कैसा संदेश जाता है उसमें फ़र्क है."
<link type="page"><caption> पढ़ें- गूगल का एशिया में पहला डॉटा सेंटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/12/131211_google_data_centres_nn.shtml" platform="highweb"/></link>
उनके अनुसार, "निहायत अच्छे उद्देश्यों- उत्पादों को बेहतर बनाने- से यह लोगों को असहज बनाने की ओर मुड़ गया है."
ऐसा लगता है गूगल की अभिलाषा खुद को रोज़मर्रा की ज़िंदगी के केंद्र में स्थापित करने की है- हमें जानकारी ढूंढने, गर्म रखने और इधर-उधर जाने में सहायता करने तक.
लेकिन इसके सबसे बड़े आलोचक इसके अपने उपभोक्ता ही रहेंगे जो, वॉल-ई की पृथ्वी में रहने वाले इंसानों के विपरीत, किसी 'महाकंपनी' के आगोश में आ जाने के प्रति शायद ज़्यादा उदार न हों.
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