दुनिया का सबसे प्राचीन 'सार्वजनिक शौचालय'

अर्जेंटीना में एक विशाल 'सामूहिक शौचालय' का पता चला है जो उस ज़माने का है जब डायनासोर इस धरती पर नज़र आने लगे थे.
वैज्ञानिकों का कहना है कि खुदाई के दौरान एक-दूसरे में गुंथे मल के हज़ारों जीवाश्म मिले हैं जो गैंडे जैसे किसी जानवर के हैं.
चौबीस करोड़ साल पुरानी इस जगह को 'दुनिया का सबसे प्राचीन सार्वजनिक शौचालय' कहा जा रहा है जो इस बात का पहला सुबूत है कि प्राचीन जीव शौच के लिए किसी एक ही जगह का इस्तेमाल करते थे.
<link type="page"><caption> अध्ययन में कहा गया है</caption><url href="http://www.nature.com/srep/2013/131128/srep03348/full/srep03348.html" platform="highweb"/></link> कि आहार, बीमारी और वनस्पति को आधार बनाकर किए गए मल के विश्लेषण से पता चला है कि इसका संबंध प्रागैतिहासिक काल से है.

हिरण, हाथी और घोड़े उन आधुनिक जीवों में शामिल हैं जो अपने इलाक़े की पहचान और परजीवियों को रोकने के लिए आमतौर पर किसी एक ही जगह पर अपना मल विसर्जित करते हैं.
लेकिन अर्जेंटीना में मिले इस विशाल 'सामूहिक शौचालय' ने 22 करोड़ वर्ष पुराने एक अन्य 'सबसे पुराने' शौचालय का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
अर्जेंटीना के ला रियोजा प्रांत में मिले मल के ये जीवाश्म आकार में 40 सेंटीमीटर चौड़े और वज़न में कई किलोग्राम भारी हैं जो भूरे और गहरे भूरे रंग के हैं.
इस खुदाई से जुड़े डॉक्टर लुकास फ़ाइरोली कहते हैं, ''अपराधी कौन है, इसमें संदेह नहीं. इतने बड़े आकार का मल केवल एक प्रजाति देती है जिसकी हड्डियां यहां पूरे इलाक़े में बिखरी मिली हैं.''

उनका इशारा शिकारी जानवर डायनोडोन्टोसोरस की ओर है जो आठ फीट लंबा जीव है जिसकी तुलना आधुनिक गैंडे से की जा सकती है.
डायनोडोन्टोसोरस बड़े और स्तनधानी रेंगने वाले जीवों की तरह भी थे जो समय के उस युग में थे जब डायनासोर पहली बार आकार ले रहे थे.
डॉक्टर लुकास फाइरोली का कहना है कि शौचालय साझा करने की प्रवृत्ति से संकेत मिलता है कि ये स्वभाव से मिलनसार और झुंड में रहते थे.
वे कहते हैं, ''परजीवियों को दूर करने के लिए ऐसा करना ज़रूरी था. जैसा कि कहते भी हैं कि आप वहां शौच नहीं कर सकते जहां आप भोजन करते हैं.''
इसका दूसरा पहलू बताते हुए वे कहते हैं, ''ये शिकारियों के लिए भी एक चेतावनी थी कि देखो, हम एक बड़े झुंड में हैं.''

यहां शिकारियों से आशय मगरमच्छ जैसे उन जीवों से है जिनके पैने दांत थे जो आकार में आठ मीटर तक लम्बे हो सकते थे.
यहां प्रति वर्ग मीटर में 94 मल-पिंड मिले हैं जो 900 वर्ग मीटर तक के इलाक़े में फैले हैं.
प्रागैतिहासिक काल के किसी जीव का मल मिलना कोई नई बात नहीं है लेकिन इतना पुराना और इतने बड़े पैमाने पर एक ही जगह पर मल मिलना बड़ी बात है.
डॉक्टर लुकास फ़ाइरोली कहते हैं कि ज्वालामुखी से निकली राख ने इस मल को परत में ढककर सुरक्षित रखने में मदद की.
इन मल पिंडों को किसी 'टाइम कैप्सूल' की तरह बताते हुए शोधकर्ता मार्टिन कहते हैं, ''जब हमने इसकी बाहरी सतह तोड़ी तो इसमें से उस ज़माने के परजीवियों, पौधौं और कवक की महक निकली. मल का हर टुकड़ा तब के इको-सिस्टम का उदाहरण है.''
वे ये भी कहते हैं कि इस खोज से उस पर्यावरण की झलक पाई जा सकती है जिसने डायनासोर को जन्म दिया था.
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