'ड्राइविंग करते हुए बात करने से ख़तरा नहीं'

कार चलाते हुए हुए फ़ोन

अमरीका में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और गाड़ी चलाते वक्त फ़ोन पर बात करने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है.

यह कहना है कारनेगी मेलन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स (एलएसई) के शोधकर्ताओं का जिन्होंने अमरीका के आठ शहरों में 80 लाख से ज़्यादा कार दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया.

शोधकर्ताओं ने स्थानीय समय के मुताबिक रात नौ बजे के बाद वाले आंकड़ों का तीन साल तक अध्ययन किया.

हालांकि उनका कहना है कि शोध में ड्राइविंग करते हुए मैसेज करने या इंटरनेट का इस्तेमाल करने को शामिल नहीं किया गया है.

आश्चर्यजनक

शोध के लिए 2002-005 के समय का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि इस दौरान अमरीका में बहुत से मोबाइल फ़ोन ऑपरेटर नौ बजे के बाद मुफ्त कॉल्स दे रहे थे.

कारनेगी विश्विवद्यालय के प्रोफ़ेसर सौरभ भार्गव और एलएसई के डॉ. विक्रम पठानिया के मुताबिक रात नौ बजे के बाद फ़ोन कॉल्स में तो भारी वृद्धि दर्ज की गई लेकिन इस दौरान <link type="page"><caption> सड़क दुर्घटना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130107_toyota_self_drive_car_sdp.shtml" platform="highweb"/></link>ओं में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई.

डॉ पठानिया ने बीबीसी को बताया कि वह इन परिणामों से “बहुत आश्चर्यचकित” हुए.

कार चलाते हुए फ़ोन
इमेज कैप्शन, कार चलाते हुए फ़ोन के इस्तेमाल पर भारत समेत कई देशों में प्रतिबंध है

उन्होंने कहा, “शुरुआत में तो हमें लगा कि यह संख्या गड़बड़ है. हमने सारी चीज़ों को एक बार फिर से जांचा- लेकिन कहीं कुछ नहीं हो रहा था.”

“हमने देखा कि मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल में भारी उछाल था लेकिन इसका <link type="page"><caption> कार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/07/130717_driverless_car_dil.shtml" platform="highweb"/></link> दुर्घटना पर कोई असर नहीं था.”

डॉ. पठानिया कहते हैं कि अमरीकी आर्थिक पत्र में शोध के नतीजे बहुत सी आपत्तियों के साथ छापे गए.

“हमने सिर्फ़ बातचीत को देखा था, मैसेज करने या इंटरनेट के इस्तेमाल को नहीं. यह भी हो सकता है कि उस समय (नौ बजे) ट्रैफ़िक ऐसा हो कि फ़ोन का आराम से किया गया इस्तेमाल कोई खतरा न पैदा करता हो.”

वह कहते हैं, “अब आगे के शोध को <link type="page"><caption> स्मार्टफ़ोन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/07/130711_smartphone_hud_rd.shtml" platform="highweb"/></link> पर केंद्रित होना चाहिए और अलग-अलग वर्ग के आधार पर फ़ोन के पूरे इस्तेमाल का अध्ययन किया जाना चाहिए.”

“युवा पुरुषों और नए ड्राइवरों का अध्ययन नई तस्वीर सामने ला सकता है.”

“लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों को ध्यान भटकाने के लिए कोई न कोई चीज़ मिल ही जाती है.”

कानून

ब्रिटेन में साल 2003 में गाड़ी चलाते वक्त फ़ोन के इस्तेमाल पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था.

हाइवे नियमावली के अनुसार हैंड्स-फ़्री पर बात की जा सकती है लेकिन “अगर पुलिस को लगता है कि आप का ध्यान भटक रहा था” तो आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

भारत में भी गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है.

मोटर व्हीकल एक्ट,1988 के अनुसार मोबाइल पर बात करते हुए पहली बार पकड़े जाने पर एक हज़ार रुपये तक का जुर्माना और छह महीने की जेल हो सकती है.

तीन साल के अंदर यही ग़लती दोबारा करने पर दो साल तक की सज़ा और दो हज़ार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है.

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