सड़क जो करती है रिचार्ज

- Author, लिओ केलिओन
- पदनाम, टेक्नोलॉजी रिपोर्टर
दक्षिण कोरिया में एक ऐसी सड़क बनाई गई है जो अपने ऊपर गुजरने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को रिचार्ज कर सकती है.
इसे विकसित करने वालों का दावा है कि 12 किलोमीटर लंबी ये सड़क दुनिया में अपनी तरह की पहली परियोजना है.
इसके लिए सड़क पर वाहनों को रिचार्ज के लिए रुकने की ज़रूरत नहीं है. देश में अभी दो सार्वजनिक बसें इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं और साल 2015 तक इसमें दस और बसों को शामिल करने की योजना है.
इसे विकसित करने वाली कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की टीम के प्रमुख दोंग हो चो ने कहा, "ओएलईवी (ऑनलाइन इलेक्ट्रिक व्हीकल) के लिए हमारी परियोजना सफल रही है. ये ओएलईवी के लिए मील का पत्थर साबित होगी."
महंगा सौदा
लेकिन यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के लिए बसों और सड़कों पर उपकरण लगाना महंगा सौदा साबित हो सकता है क्योंकि ये ज़्यादा व्यावहारिक नहीं है.
कार्डिफ विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ऑटोमोटिव इंडस्ट्री रिसर्च के डॉक्टर पॉल नियूवेनहुइस ने कहा, "निश्चित रूप से इस तकनीक में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के लिए काफी संभावनाएं हैं लेकिन निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इससे संबंधित उपकरण लगाना बहुत खर्चीला होगा."
इस परियोजना को दक्षिण कोरिया के दक्षिणी शहर गूमी में स्थापित किया गया है.
शहर के ट्रेन स्टेशन से इन डोंग डिस्ट्रिक्ट को जोड़ने वाली सड़क पर ये तकनीक लगाई गई है. इसमें बस के निचले हिस्से पर एक उपकरण लगाया गया है जो शेप्ड मैग्नेटिक फील्ड इस रीजोनेंस तकनीक का इस्तेमाल करके चार्ज हो जाता है.
प्रणाली

सड़क के नीचे बिछी बिजली की तारों को विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो उपकरण के अंदर लगी एक कुंडली में जमा होता है और फिर इसे बिजली में बदला जाता है. इसे चार्ज होने वाले उपकरण को सतह से 17 सेमी ऊपर रखा जा सकता है.
पावर स्ट्रिप को सड़क के पांच से लेकर 15 प्रतिशत हिस्से में ही स्थापित किया जाएगा और इसके लिए पूरी सड़क खोदने की कोई ज़रूरत नहीं है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा शुरू करने से पहले ऊर्जा संग्रहीत करने की ज़रूरत नहीं है. इसकी बैटरी भी सामान्य बैटरी से तीन गुना छोटी हो सकती हैं. इससे वाहन का वज़न कम होता है और बिजली के उत्पादन के समय कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन घटता है.
ओएलईवी चलते वाहनों को रिचार्ज करने की पहली परियोजना है लेकिन दुनिया में वाहनों को रिचार्ज करने की दूसरी कई परियोजनाएं चल रही हैं.
ऊर्जा संग्रहण

के टोरिनो और नीदरलैंड के यूट्रेच्ट में भी कुछ बस स्टॉप पर बेतार चार्जिंग उपकरण लगाए गए हैं जहां चालक कुछ देर वाहन को रोककर उसे चार्ज कर सकता है.
अमरीका की ऊटाह स्टेट यूनिवर्सिटी भी एक कैम्पस बस के प्रोटोटाइप पर काम कर रही है जो 90 प्रतिशत से अधिक पावर ट्रांसमिशन इफिशंसी हासिल कर सकती है.
इस तकनीक को कारों में भी इस्तेमाल करने पर भी विचार चल रहा है. लंदन में कम्प्यूटर चिप बनाने वाली कंपनी क्वालकॉम इस दिशा में काम कर रही है.
विशेषज्ञ अश्विन चोटई का कहना है कि दक्षिण कोरिया की महत्वाकांक्षी योजना को आम उपयोग में लाने के लिए अभी सालों लगेंगे.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि देशभर में ऐसी सड़कों का जाल बिछने में अभी दशकों लगेंगे. अभी तो यह केवल सजावटी तकनीक लग रही है, जिसका व्यवसायीकरण हो सकता है."
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












