एक दूसरे को नाम से बुलाती हैं डॉल्फिनें

    • Author, रेबेका मोरेल
    • पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

डॉल्फिनें इंसान की दोस्त मानी जाती हैं लेकिन एक नए शोध से पता चला है कि वे इंसानों की तरह एक-दूसरे को नाम से भी बुलाती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये समुद्री स्तनपायी एक दूसरे की पहचान जानने के लिए अलग-अलग तरह की सीटी बजाती हैं.

स्कॉटलैंड के सेंट एंड्रूज विश्वविद्यालय के अनुसंधान दल के मुताबिक जब डॉल्फिनों को लगता है कि उनका नाम पुकारा जा रहा है तो वो इस पर प्रतिक्रिया देती हैं.

ये शोध <link type="page"><caption> प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज</caption><url href="http://www.pnas.org/content/early/2013/07/17/1304459110" platform="highweb"/></link> में प्रकाशित हुआ है.

व्यवस्था

विश्वविद्यालय की समुद्री स्तनपायी शोध इकाई के डॉक्टर विंसेंट जानिक ने कहा, “डॉल्फिनें समुद्र में त्रिआयामी माहौल में रहती हैं जहां कोई निश्चित चिन्ह या सीमा नहीं होती है. ऐसे में उन्हें एक समूह में एक दूसरे के संपर्क में रहने के लिए एक सुगम व्यवस्था की जरूरत होती है.”

लंबे समय से ये माना जाता रहा है कि <link type="page"><caption> डॉल्फिनें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/10/111031_dolphins_sundarbans_rj.shtml" platform="highweb"/></link> एक-दूसरे को पुकारने के लिए एक विशेष प्रकार की सीटी बजाती हैं. ठीक वैसे ही जैसे हम एक-दूसरे को नाम से पुकारते हैं.

पहले किए गए शोधों से ये बात सामने आई है कि डॉल्फिनें निरंतर सीटी बजाती रहती हैं और एक ही समूह की डॉल्फिनें इस ध्वनि को सीखती हैं और कॉपी करती हैं.

लेकिन पहली बार नाम से पुकारे जाने पर इन <link type="page"><caption> जीवों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/02/120211_nepal_dolphin_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> की प्रतिक्रिया पर शोध किया गया है.

प्रयोग

इसके लिए वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक वातावरण में रहने वाली बॉटलनोज़ डॉल्फिनों की ध्वनि को रिकॉर्ड किया. इसके बाद उन्होंने पानी के नीचे स्पीकर लगाकर इस रिकॉर्ड को बजाया.

डॉक्टर जानिक ने कहा, “हमने एक समूह की विशेष सीटी बजाई, उनकी दूसरी तरह की आवाज़े भी बजाई और फिर दूसरे समूहों की विशेष सीटियां बजाई. दूसरे समूहों से ये डॉल्फिनें कभी नहीं मिली थीं.”

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि डॉल्फिनों ने केवल उन्हीं आवाज़ों पर प्रतिक्रिया दी जिनमें उन्हें पुकारा गया था. अपने नाम की पुकार पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए सीटी बजाई.

शोध दल का मानना है कि डॉल्फिनें इंसान की तरह व्यवहार करती हैं और नाम पुकारे जाने पर जवाब देती हैं.

क्षमता

डॉक्टर जानिक का कहना है कि संभवतः विशाल समुद्र में एक साथ रहने की जरुरत के कारण डॉल्फिनों ने ये क्षमता विकसित की है.

उन्होंने कहा, “अधिकांश समय वे एक-दूसरे को देख नहीं पाती हैं. वे पानी से नीचे सूंघने की क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं जो कि जीवों को एक दूसरे को पहचानने की अहम ताकत होती है. साथ ही वे लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं रह सकती हैं. उनके पास कोई घोंसला या बिल नहीं होता है जहां वे लौटकर जा सकें.”

अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि पहली बार किसी जीव में ऐसी अद्भुत क्षमता का पता चला है. हालांकि दूसरे शोधों से पता चला है कि संभवतः तोते की कुछ प्रजातियां अपने समूह में दूसरों की पहचान के लिए ध्वनि का इस्तेमाल करती हैं.

डॉक्टर जानिक ने कहा कि ऐसे शोध से इंसान में आपसी संपर्क के विकास को समझने में मदद मिलेगी.

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