ब्रिटेन: क्यों बढ़ रही हैं महिलाओं की मौत

ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि ऐसी महिलाओं की तादाद बढ़ती जा रही है जो शराब में डूब कर अपनी ज़िंदगी गंवा रही हैं.
शराब पीकर बहकजाने या बीमार पड़ जाने का अरोप अक्सर पुरुषों पर लगता है लेकिन महिलाऐं भी इन मामलों में पीछे नहीं हैं. ब्रिटेन के तीन शहरों, ग्लॉसगो, लिवरपूल और मेनचेस्टर में हुए शोध में यह बात सामने आई है.
इस शोध में वर्ष 1980 से 2011 के बीच सभी उम्र की महिलाओं और पुरुषों का अध्ययन किया गया. इस अध्ययन में ये बात सामने आई कि शराब पीने से होने वाली बीमारियों के चलते मरने वालों की कुल संख्या में कमी आई है. लेकिन इसके उलट महिलाओं में इन बीमारियों के कारण मृत्यु दर बढ़ गई है.
विशेषज्ञों ने कहा है कि अध्ययन के नतीजे 1970 के दशक में जन्मी उन महिलाओं के लिए चेतावनी हैं, जिन्हें शराब पीने की आदत है.
शराब के लिए नीति
उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादा शराब पीने की समस्या से निपटने के लिए इंग्लैंड और वेल्स की सरकार ने "शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति" बनाई है. इस सप्ताह ही इस नीति को लागू किया गया है.
"एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ" नाम की पत्रिका में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है. इसमें तीन शहरों में शराब से संबंधित <link type="page"><caption> नैतिकताओं के स्वरूपों का अध्ययन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/06/120603_alcohol_research_rn.shtml" platform="highweb"/></link> किया गया. इन तीनों ही शहरों में अभाव, ख़राब स्वास्थ्य और औद्योगिकीकरण का स्तर समान है.

इस अध्ययन में 1910-1979 और 1980 -2011 के बीच जन्मे लोगों की शराब पीने से हुई मौतों की तुलना की गई है.
मोटे तौर पर यह बात सामने आई कि शराब पीने से औरतों की तुलना में आदमी ज़्यादा मरते हैं. सबसे ज़्यादा प्रभावित वह होते हैं जो अपनी उम्र के चालीसवें या पचासवें पड़ाव पर होते हैं.
नज़रंदाज़ करना मुश्किल
विशेषज्ञों ने दोनों समय कालों की जनसँख्या से लिए गए नमूनों में 34 साल की महिलाओं की मृत्यु दर की तुलना का दमदार उदाहरण दिया है.
इस उम्र की 1950 के दशक में जन्मी महिलाओं में शराब पीने से प्रति एक लाख में से आठ महिलाओं की मृत्यु होती थी. 1960 के दशक में जन्मी महिलाओं में यह आंकड़ा बढ़ कर 14 हो गया.
1970 के दशक में जन्मी महिलाओं के लिए स्थिति और भी ख़तरनाक हो गई. इस वर्ग की प्रति एक लाख में से 20 महिलाओं की मृत्यु शराब पीने से हुई. हर दशक में तेज़ी से बढ़ता हुआ यह रुझान चेतावनी देता है.

पुरुषों के लिए 1910-1979 और 1980 -2011 के बीच की तुलना के नतीजे थोड़ा राहत देते हैं. शराब के सेवन से मरने वाले पुरुषों की सँख्या में कमी आई है.
1950 के दशक के पुरुषों में हर एक लाख में से 22 शराब पीने की वजह से मर जाते थे.
1960 के दशक के प्रति एक लाख में से 38 पुरुष इस वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठते थे. लेकिन 1970 के दशक में यह आँकड़ा घट गया. 1970 के दशक में जन्में पुरुषों में प्रति एक लाख में से केवल 30 शराब की बलि चढ़े.
<link type="page"><caption> अध्ययन करने वाले दल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/07/120706_alcohol_research_sm.shtml" platform="highweb"/></link> की प्रमुख डॉक्टर डेबोरा शिपटन ने "एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ पत्रिका में लिखा है कि महिलाओं की बढ़ती मृत्यु दर को नज़रंदाज़ करना मुश्किल है.
वह कहती हैं, "क्योंकि तीनों ही शहरों की युवा महिलाओं में यह रुझान देखने को मिला है इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि यह केवल एक शहर की बात है."
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि " इस नए प्रचलन से आने वाले दशकों में यह मृत्यु दर बढ़ सकती है."
अध्ययन करने वाले दल ने बताया कि आसानी से उपलब्ध सस्ती शराब और पीने के ज़्यादा घंटों की वजह से यह समस्या बढ़ी है.
सांस्कृतिक प्रभाव

डॉक्टर डेबोरा शिपटन ने बीबीसी को बताया कि "शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति" को इंग्लैंड और वेल्स में ख़ारिज किया जाना "शर्मनाक" है.
उन्होंने कहा कि इस नीति से समस्या का समाधान होता. हालांकि इससे <link type="page"><caption> शराब</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/07/120701_france_alcohol_driving_rn.shtml" platform="highweb"/></link> से संबंधित गहरे सांस्कृतिक प्रभाव पर फ़र्क़ नहीं पड़ता.
सरकार ने कहा कि इस बात के कोई पुख्ता सुबूत नहीं थे कि शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति बनाने से पीने के हानिकारक प्रभाव की समस्या कम हो जाएगी और इससे वो लोग प्रभावित नहीं होंगे जो कि ज़िम्मेदारी से पीते हैं.
स्कॉटलैंड की सरकार अभी भी शराब की क़ीमत 50 पेनी प्रति यूनिट रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
स्कॉच विह्स्की एसोसिएशन ने भी कुछ क़ानूनी प्रक्रियाऐं शुरू कर दी हैं. इनसे निपटे बिना शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति को लागू नहीं किया जा सकता.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहाँ क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtm" platform="highweb"/></link> कर सकतें हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)</bold>












